नए हालात में पुराने शिवराज की ताजपोशी

नए हालात में पुराने शिवराज की ताजपोशी

मीडियावाला.इन।

इकसठ साल के शिवराज सिंह चौहान भाजपा के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्हें प्रदेश में चौथी बार  प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिल रहा है। नए हालात में नए मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह का स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने डेढ़ साल के वनवास के बावजूद अपनी आभा कम नहीं होने दी और अपनी महात्वाकांक्षा को मरने नहीं दिया।
मध्यप्रदेश के 32  वे मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान एक संक्रमण  काल में राजकाज सम्हाल रहे हैं,ये संक्रमण वैश्विक भी है और राजनीतिक भी ।कोरोना विषाणु से आतंकित समय में शिवराज प्रदेश के लिए स्थायित्व का आश्वासन लेकर शपथ ग्रहण करेंगे ,वे प्रदेश में सबसे लम्बी पारी खेलने वाले पहले मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किये जा रहे हैं। प्रदेश के 32  में से 23  मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल  का मै साक्षी रहा हूँ और शिवराज से एक भी दिन अलग से मिले बिना मैंने शिवराज सिंह चौहान के 13  साल के शासन को बखूबी देखा और समझा है।

अपने लम्बे कार्यकाल में अनेक आरोपों-प्रत्यारोपों के बावजूद शिवराज सिंह ने जनता के बीच सर्वाधिक समय देने का कीर्तिमान कायम किया था, वे आम आदमी के मुख्यमंत्री थे किन्तु पार्टी के कतिपय अंतर्विरोधों  और सरकार के मुखिया के रूप में जाने-अनजाने हुई कुछ गलतियों के चलते उन्हें डेढ़ साल पहले सत्ताच्युत होना पड़ा था ।संयोग देखिए कि वे पिछले विधानसभा चुनाव में जिन महाराज से माफी मांगते हुए सत्ताच्युत हुए थे आज उन्हीं महाराज की वजह से पुन: सत्तारूढ़ हो रहे हैं। इस तरह उनकी नयी सरकार जनादेश की सरकार नहीं है, 'महाराज के अनुग्रह' की सरकार है ,और इसे उन्हें स्वीकार करना होगा।

मैंने पिछले देश साल में अनेक अवसरों पर लिखा कि जनादेश से बनी कमलनाथ की सरकार शिवराज सिंह की सरकार से अलग होते हुए भी वैसी सरकार नहीं है जिसे जनता कोई अपनी सरकार कहा जा सके। मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ जी की पहुंच कभी शिवराज सिंह चौहान जैसी नहीं हो पाई और इसमें उनका कोई कसूर भी नहीं था ,वे जैसे थे ,वैसे थे ,72  साल की उम्र में उनसे बदलने की अपेक्षा करना ठीक नहीं था।वे शिवराज सिंह की तरह न श्रम कर सकते थे और न जनता के बीच हाजिर रह सकते थे और इसका खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। कमलनाथ सरकार बनवाने में अग्रणीय भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य  सिंधिया को सम्भवत: कमलनाथ की अकड़ की वजह से ही कांग्रेस छोड़ना पड़ी ।शायद दिग्विजय सिंह भी एक बड़ा कारक रहे।

चौथी बार शिवराज के सर पर जो ताज रखा गया है उसमें सुर्खाब का पर 'महाराज' के नाम का लगा है ।अब उन्हें अपनी पार्टी के साथियों के साथ महाराज का भी पूरा ख्याल रखना होगा। महाराज  भाजपा में अपनी पूरी फ़ौज के साथ आये हैं इसलिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार में इन सबका स्थान सुरक्षित करना एक जरूरत भी होगी और मजबूरी भी ।अब शिवराज सिंह की सरकार एक मिलीजुली सरकार है,इसमें जनता भी है और जनता के सेवक 'महाराज' भी ।सबको खुश रखकर अगले विधानसभा चुनाव तक सरकार को चलाना आसान काम नहीं है किन्तु उम्मीद की जा सकती है कि शिवराज सिंह की विनम्रता,लचीलापन ,सहनशीलता और सशजता उन्हें इस नए दायित्व का निर्वहन करने की पूरी ताकत देगी ।
प्रदेश में हुई उठापटक के बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार की कमान शिवराज सिंह को मिलने से उनके अनेक साथियों के सपने बिखरे होंगे किन्तु उनके प्रतिद्वंदियों में से एक भी ऐसा नहीं है जो भविष्य में उनके लिए वैसी चुनौती खड़ी कर सके जैसी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ के सामने खड़ी की थी ।भाजपा में असंतोष को पीने का प्रशिक्षण दिया जाता है और बागियों को बहुत जल्द उनकी हैसियत दिखा दी जाती है ।इसलिए अब शिवराज और महाराज की साझा सरकार को बहुत सम्हलकर चलाना   पडेगा ।जनता के अपने सपने होते हैं और नेताओं के अपने सपने इन्हें साकार करने के लिए सत्ता एक साधन भर है। मेरी शुभकामनाएं हैं कि  शिवराज सिंह चौहान अपनी नई पारी में कामयाब हों और अतीत की गलतियों की पुनरावृत्ति न होने दें।

अंत में ये बात भी बताई जाना आवश्यक है कि पहले के तीन कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान के सामने एक निर्बल विपक्ष था किन्तु इस बार उनके सामने एक सबल विपक्ष है। उनके सामने सत्ता सम्हालते ही दलबदलकर भाजपा में शामिल  हुए कांग्रेस के 22  साथियों को उपचुनाव में जिताने का उत्तरदायित्व भी है । बिना इसके वे सरकार को लम्बी उम्र नहीं दे पाएंगे। यानि शिवराज सिंह चौथी बार तलवार की धार पर सरकार  चलाने वाले हैं, ज़रा सी  असावधानी नयी सरकार का खेल खराब कर सकती है। प्रदेश और देश के  मीडिया से शायद ही नई सरकार को  कोई शिकायत हो,क्योंकि मीडिया पहले से होई शिवराज सरकार का मुरीद रहा है भले ही हम जैसे कतिपय लोग हर समय,हर सरकार को टोकने का काम करते आये हैं ।सरकार अच्छी और लम्बी चले इसलिए ये सब तो चलना चाहिए ।पुन:शुभकामनाएं।

RB

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।