यह जश्न नहीं, एक लम्बी लड़ाई है

यह जश्न नहीं, एक लम्बी लड़ाई है

मीडियावाला.इन।

कोरोना एक महामारी है, एक संक्रामक रोग है जो जानलेवा है, इसे भारत-पाकिस्तान के बीच कोई एक दिवसीय मैच मत समझिये कि शाम पांच बजे जीत का जश्न मना डाला. ढोल नगाड़े, बैंड बाजे से जुलुस ही निकाल डाला? अजब देश गजब लोग क्यों कहलवाना चाहते हैं आप? माना कि आपका शहर उत्सवधर्मी है पर अपनी सनातन सदियों पुरानी वैदिक परम्पराओं पर गौर करिए और बचाव ही इलाज है इसे समझ लीजिये. एक दिन का जनता कर्फ्यू यह सिर्फ एक प्रयोग था बंद का, बल्कि यह एक संकेत भी था लम्बी तालाबंदी का जनता कर्फ्यू के रूप में| अभी यह समाप्त नहीं हुआ है इसकी स्थाई आदत डालनी होगी क्योंकि अभी यह एक लम्बी लड़ाई है संक्रामक प्रकोप पर मनुष्य द्वारा विजय की. इसे एक दिवसीय मैच की सफलता की तरह शाम को बम फटाके और V के प्रतीक से जश्न का रूप मत दीजिये, ऐसा करना इसकी गंभीरता को कम कर रहा है. बच्चे,अनपढ़ और वे जो हमारी-आपकी तरह इसके अपडेट नहीं ले सकते उन्हें लगा यह कोई ऐसा रॉकेट या हवाई जहाज था जो 22 मार्च को हमारे ऊपर से गुजरने वाला या गिरने वाला था और वह समय पूरा हो गया अब कोई खतरा नहीं. बस यहीं हम गलती कर रहे हैं. हमें याद रखना होगा कि जनता दो चार नहीं करोड़ों की संख्या में है. यह कोई बमबारी नहीं, महामारी है और अभी यह टली नहीं है. दस बीस की गलती, मसखरी व लापरवाही सम्पूर्ण मानवता पर भारी हो रही है.

समय है अति सतर्क और सावधान रहने का, इसलिए सावधान रहिये, सावधानी हटी दुर्घटना घटी हमेशा याद रखें. बुरा समय एक दिवस का नहीं होता, यह समय है गहन गंभीर स्थिति और चिंतन का.संक्रमण की संख्या रुकी नहीं है सतत इजाफा जारी है, देखते-देखते 1 से शुरू होकर 429 तक पहुँच गयी है. अमेरिका जैस विकसित देश में संक्रमित लोगों की संख्या 34,000 से ज्यादा हो गई है. स्पेन के आँकड़े हमें चौंका रहे हैं जहाँ 3076 नए मामले मिले हैं जो विश्व में सर्वाधिक हैं. ऐसी विकट स्थिति में बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. आपसे निवेदन है यह भावनाओं का नहीं समझदारी का समय है यदि आपके बच्चे,आपके परिजन उन रास्तों से यात्रा कर देश लौट रहे हैं जिन रास्तों, शहरों, देशों में संक्रमण फैला है तो उनके आगमन पर उन्हें प्रेम से गले लगाने के बजाय आइसोलेट होने में, क्वॉरेंटाइन होने में सहायता दूर से ही कीजिये. वह आपका प्रिय है, पर बीमारी लेने देने की चीज नहीं है. इस समय उन्हें आपके प्यार की नहीं, समझदारी की जरुरत है, सलाह और हिम्मत की जरुरत है. ख़ास कर उनके लिए यह समय सर्वाधिक चिंता का विषय है जिनके बच्चे उन देशों में है जहाँ पर यह समस्या विकराल हो गई है यह समय है धैर्य और संयम और समझदारी का. दूर बैठे बच्चों को उचित सलाह दीजिये, बुलाने की जिद मत करिए, वे जहाँ हैं यात्रा से ज्यादा सुरक्षित हैं, वहीं रहें सुरक्षित संयमित रहें, दुनिया पर संभव नजर बनाये रखें, आपका बेचैनी भरा फोन उन्हें पैनिक कर सकता है. आत्मबल कमजोर कर सकता है, शांत मन से उन्हें सतर्क करें, आजा बेटा,आजा कैसे भी आजा ना करें. यह इस महामारी रोकने में आपका सबसे बड़ा योगदान होगा. समझना होगा हमें कि एक आएगा जो खुद तो संकट में होगा ही, यहाँ आने पर अपने से जुड़े कई और लोगों को भी संकट में डाल देगा. अभिभावकों से विनम्रता पूर्वक निवेदन है, अपने परिजनों का हौसला बढ़ाएं, उनसे बात करते रहें, आवश्यक जरूरतों में जो संभव हो वह मदद करें. यदि उनके पास खाद्य सामग्री कम हो रही है तो वे कैसे कम सामग्री में भी पौष्टिक और काम चलाने  लायक रेसिपी बना सकते हैं यह बताएं. हमारे देश में कई ऐसी व्यंजन विधि है जो कम सामग्री में कम समय में और स्वास्थवर्धक हो सकती है बनायी जाती है. आप अपने मन, अपनी बेचैनी और भय पर नियंत्रण के बाद ही बच्चों से बात करें उन्हें भयभीत भी ना करें और सतर्क भी करें.

RB

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