कमल के कुम्हलाने तक मध्यप्रदेश नहीं छोड़ेंगे नाथ!

कमल के कुम्हलाने तक मध्यप्रदेश नहीं छोड़ेंगे नाथ!

मीडियावाला.इन।

दमोह की जीत से प्रसन्न कांग्रेस का 2023 में फिर सत्ता में आने का मन
दिल्ली में 'परिवार' तो मप्र में नाथ के साथ बढ़ती रहेगी कांग्रेस

पेगासस के बहाने मध्यप्रदेश में पत्रकारवार्ताओं का दौर जारी है। एक दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और 'परिवार' को टारगेट किया था, तो बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज पर मिसाइलें दागीं।  बात अगर कमलनाथ की हो तो उन्होंने यह तस्वीर साफ कर दी कि वह मध्यप्रदेश छोड़ने वाले नहीं हैं। वजह साफ है छीने गए मुख्यमंत्री पद पर फिर से काबिज होने की जिद। दमोह उपचुनाव ने उम्मीदों को पर लगा दिए हैं और कांग्रेस को भरोसा है कि आगामी तीन विधानसभा उपचुनाव और एक लोकसभा उपचुनाव में भी मतदाताओं का हाथ कांग्रेस के साथ ही रहेगा। कांग्रेस को हो न हो, पर कमलनाथ को पूरा भरोसा है कि नगरीय निकाय चुनाव में भी जनता जीत का सेहरा उनकी पार्टी के सिर पर ही बांधने वाली है। क्योंकि वह मानते हैं कि जनता अब जागरूक हो गई है और जीतने के लिए पहले की तरह चुनाव प्रचार की जरूरत नहीं है। जनता ने राजनीति के पुराने तरीके को फार्मेट कर लोकल कर दिया है। पर कमलनाथ को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति लोकल हो या वोकल, पर यह जनता है जिस पर आंख मूंद कर भरोसा करने पर धोखा होने की संभावना से कोई इंकार नहीं कर सकता। खुद कमलनाथ और पूरी कांग्रेस ने सरकार गिरने के बाद मध्यप्रदेश की इसी जनता के सामने लोकतंत्र की हत्या और विधायकों की खरीद-फरोख्त का हवाला दे-देकर 28 विधानसभा उपचुनावों के बाद सरकार में वापसी का सपना सुबह, दोपहर,शाम और हर समय देखा था लेकिन जनता यानि मतदाता ने मौन रहकर ही कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश एकतरफ़ा ही सुना दिया था। इस बात को अभी सोलह महीने ही गुजरे हैं। ऐसे में दमोह उपचुनाव की जीत से प्रसन्न कांग्रेस का 2023 के रण में मैदान मारने के मन के हिस्से में यदि मायूसी आई तब भी कोई अचरज की बात नहीं होगी। क्योंकि राजनीति कितनी भी बदल गई हो, लोकल हो गई हो लेकिन जनता यानि मतदाता कांग्रेस के सभी नेताओं में कमलनाथ का चेहरा नहीं देखती। चूंकि जनता जागरूक हो गई है, इसीलिए 15 महीने की कांग्रेस सरकार में कमलनाथ के काम को सौ में से सौ नंबर भले ही मिल जाए लेकिन मंत्रियों के काम से जनता भली प्रकार से वाकिफ है। शायद यही वजह है कि अनुकूलतम परिस्तिथियों में भी जनता ने कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का प्रतिकूल फैसला खुशी-खुशी सुना दिया था। पर कमलनाथ का यह जज्बा काबिलेतारीफ है कि वह मध्यप्रदेश नहीं छोड़ेंगे और उनके रहने से ही प्रदेश में 2023 में कमल कुम्हलाने पर मजबूर होगा।

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पर पेगासस को लेकर बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में कमलनाथ ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि कांग्रेस में एक 'परिवार' को भाजपा जितना जी चाहे कोसती रहे लेकिन परिवार था, है और आगे भी उनके रहने तक तो बना ही रहेगा। गौरतलब है कि एक दिन पहले शिवराज ने 'परिवार' को ही टारगेट किया था। कमलनाथ ने निशाना साधा कि पेगासस के बारे में शिवराज को कुछ पता नहीं था सो वह 'परिवार' और कांग्रेस पर ही भड़कते रहे। कमलनाथ ने पेगासस के बारे में मीडिया को पूरी जानकारी विस्तार से दी। बताया कि किस तरह लायसेंस मिलता है, किस तरह पहले खाली वॉइस रिकार्डिंग हो पाती थी लेकिन अब मोबाइल से टारगेटेड पर्सन की हर खुफिया जानकारी हैक कर ली जाती है। यह भी आशंका जाहिर कर दी कि वह और शिवराज भी पेगासस का शिकार हुए हों! कर्नाटक सरकार गिराने में पेगासस का इस्तेमाल हुआ तो मध्यप्रदेश की सरकार गिराने में भी सौदा के साथ यह हथकंडा अपनाया गया हो। यह भी कह दिया कि पेगासस का खेल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए या मोदी हित में खेला गया, सरकार सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर यह साफ करे। और मोदी के भरोसेमंद हैं तो शिवराज ही उनकी तरफ से एफिडेविट दे दें। तो इशारों में यह भी कह दिया कि कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश का नंबर है सो शिवराज सावधान रहें। पेगासस की पीसी में कमलनाथ ने सभी सवालों के खुलकर जवाब दिए, निशाना साधा लेकिन इस सवाल का जवाब टाल गए कि वह कार्यवाहक अध्य्क्ष बनेंगे या नहीं। यह जरूर कहा कि लाइन कुछ भी हो पर वह मध्यप्रदेश नहीं छोड़ेंगे यानि बात साफ है कि दिल्ली में तो पार्टी पर राज 'परिवार' का ही रहेगा। चाहे भाजपा टारगेट करे, मोदी-शाह टारगेट करें या शिवराज।

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हां एक बात कमलनाथ और शिवराज में जरूर कॉमन है। वह यह कि शिवराज भी 2018 में सरकार जाने के बाद यह लगातार कहते रहे कि वह मध्यप्रदेश नहीं छोड़ेंगे। प्रदेश की साढे़ सात करोड़ जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारी भी दी लेकिन उन्होंने मध्यप्रदेश नहीं छोड़ा और अंतत: पांच साल की जगह पंद्रह महीने में ही उनकी फिर मुख्यमंत्री के पद पर ताजपोशी हो गई। अब केंद्र में जवाबदारी मिलने की बात को टालते हुए कमलनाथ भी बार-बार यही दोहरा रहे हैं। पंद्रहवीं विधानसभा के 31 महीने तो गुजर गए हैं और अब बचे समय में भी भाजपा सरकार के गिरने की संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं हैं। ऐसे में 29 महीने बाद कमल को मुरझाकर सत्ता पर नाथ काबिज हो पाते हैं, इसके लिए दिसंबर 2023 का इंतजार करना ही पडे़गा। पर टाइमिंग का खेल देखिए कि जब कमलनाथ कांग्रेस कार्यालय में रहे होंगे, उसी समय कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे डॉ. गोविंद सिंह और लखन घनघोरिया, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ उनके निवास पर एकांत में चाय पर चर्चा में मशगूल थे। यह भी हो सकता है कि संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मिश्रा से आगामी सत्र को लेकर चर्चा करने पहुंचे हों। खैर फिलहाल तो पेगासस का जिन्न मध्यप्रदेश के नेताओं की पीठ पर सवार होकर नई-पुरानी कहानियों से रूबरू करवा रहा है। सो इनका आनंद लीजिए। RB

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के जाने-माने पत्रकार हैं। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में लंबा अनुभव है। फिलहाल एसीएन भारत के स्टेट हेड हैं। इससे पहले स्वराज एक्सप्रेस (नेशनल चैनल) में विशेष संवाददाता, ईटीवी में संवाददाता,न्यूज 360 में पॉलिटिकल एडीटर, पत्रिका में राजनैतिक संवाददाता, दैनिक भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ, एलएन स्टार में विशेष संवाददाता के बतौर कार्य कर चुके हैं। इनके अलावा भी नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित विभिन्न समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन किया है।

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