नाती-पोते के लिए राजमाता बड़ा नाम

नाती-पोते के लिए राजमाता बड़ा नाम

मीडियावाला.इन।

भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक रहीं राजमाता स्व. विजया राजे सिंधिया का अब वह सपना पूरा हो जाएगा, जो अपने जीते जी अपने बेटे स्व. माधव राव सिंधिया के लिए देखा करती थीं। इतिहासकार बताते हैं राजमाता का मानना था कि जिस राजवंश ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया, उस राजवंश का नाम जनसेवा के लिए तब तक चरितार्थ नहीं हुआ जब तक ‘माँ-बेटे’ दोनों एक साथ एक विचारधारा में रहकर यह काम नहीं कर सके। यूं कहा जाए कि स्व. माधव राव सिंधिया का कांग्रेस में चला जाना राजमाता को अंतिम सांसों तक इसलिए खटकता रहा, क्योंकि राजमाता अपने उस सपने को अपने बेटे को आगे लाकर पूरा नहीं कर पाईं। परंतु जब से राजमाता के नाती एवं पोते भाजपा में शामिल हुए हैं, तब से ऐसा लगने लगा है कि राजमाता स्व. विजया राजे सिंधिया के लिए तब के युवा नरेन्द्र और आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी- उन सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठा चुके हैं, जिन्हें राजमाता ने भाजपा की स्थापना काल में देखा था। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 100 रुपए के एक सिक्के में सही राजमाता विजया राजे सिंधिया की ख्याति को दूसरी बार जनता के सामने अवतरित करने की कोशिश की है।
प्रधानमंत्री ने भले ही 100 रुपए का सिक्का राजमाता के नाम लिख दिया हो, परंतु सच तो यह है कि स्व. राजमाता विजया राजे सिंधिया की ख्याति उनकी मृत्यु के दो दशकों बाद का पड़ाव पूरे होने के अवसर जिसे राजमाता जन्म शताब्दी समारोह के रूप में मनाया जा रहा है, फिर से अपने नाती-पोते के लिए प्रगट हो गई है। विपक्षी कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा के उप चुनाव हो रहे हैं, 3 नवंबर को मतदान होना है और 16 विधानसभा क्षेत्र ग्वालियर-चंबल संभाग में ही हैं, इसलिए यह प्रधानमंत्री मोदी की सियासी चाल है, जिससे राजमाता की जबरदस्त ब्रांडिंग होगी और फायदा नाती महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया उठाएंगे। सिक्के के लोकार्पण के बाद जो प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, उससे तो उठी बौखलाहट को किसी के प्रमाण की भी जरूरत नहीं है। यूं कहा जाए भले ही सिक्का प्रचलन में 28 विधानसभा उप चुनावों के परिणामों के बाद आएगा, परंतु सिंधिया राजवंश की जनसेवा वाली छबि को इस 100 रुपए के सिक्के ने फिर से एक बार ग्वालियर-चंबल की जनता के दिलों में उतार दिया है, ऐसा मान लेने में हर्ज नहीं है। रहा सवाल राजमाता के नाम यह 100 रुपए के सिक्के की ख्याति का फायदा उन 16 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशियों को मिलेगा या नहीं, इस सवाल के उत्तर में केवल इतना ही लिखा जाना पर्याप्त है कि जब सिक्के आ ही गए हैं तो विकास और लक्ष्मी के बरसने के संकेत का फायदा 16 विधानसभा क्षेत्रों में सिंधिया समर्थक उन उम्मीदवारों को जरूर मिलेगा, जो बिकाऊ होने के आरोपों का दंश झेल रहे हैं। इस विशेष संपादकीय का लब्बोलुआब यही है कि एक 100 रुपए का सिक्का 16 हिस्सों में बंटेगा और राजमाता स्व. विजया राजे सिंधिया का अधूरा सपना अब व्यापक रूप में किस तरह पूरा होता है, इंतजार करने का विषय है। रहा सवाल सिक्के को लेकर आरोपों की होने वाली राजनीति का तो इससे चुनावी समीकरण में अंतर जरूर आएगा, क्योंकि स्व. राजमाता की ख्याति दूसरी बार फिर से अपने नाती-पोते के लिए प्रगट होना महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए जनता के बीच में सेतु का काम कर जाए तो किसी को भी आश्चर्य नहीं होगा। चुनावी परिणाम चाहे जो भी हो, सिक्के की ‘खनक’ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय के लिए बेचैनी का कारण अवश्य बनेगी।

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विजय कुमार दास

  वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय दास राष्ट्रीय हिंदी मेल  समाचार प त्र के  प्रधान सम्पादक है .साथ ही पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवी श्री दास सेन्ट्रल पत्रकार क्लब के संस्थापक है .