सरकार का हर जिम्मेदार गांव का भी बने पहरेदार,60 हजार बसों को एम्बुलेंस बनाइए

सरकार का हर जिम्मेदार गांव का भी बने पहरेदार,60 हजार बसों को एम्बुलेंस बनाइए

मीडियावाला.इन।

मध्यप्रदेश में कोरोना महामारी का संक्रमणकाल कुछ अवसरवादियों के लिए अवसर तलाशने के लिए उपलब्ध हो गया है। यूं कहा जाए कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार और मध्यप्रदेश की जनता इस बड़ी आपदा से रोज दो-दो हाथ हो रही है उसको लेकर विपक्ष के नेता हों या फिर मीडिया का ही एक समूह क्यों न हो यह मानकर चल रहे हैं कि मध्यप्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता के ऊपर इससे बड़ी आपदा कभी आ नहीं सकती और इस आपदा को अवसर के रूप में खेलने का मौका फिर दोबारा नहीं मिलेगा। चंूकि यह खोज का विषय नहीं है कि कुछ लोगों ने इस आपदा को राजनीति करने का, वाहवाही लूटने का, गरीब जनता को मौत का डर दिखाकर अस्पतालों में मनमानी वसूली के लिए अवसर बनाकर शर्मसार किर दिया है। इसके उलट हमारी यह विशेष रिपोर्ट यह कहने के लिए तैयार है कि आपदा को मानव जीवन बचाने लिए अवसर में बदल डालिये। इस विशेष रिपोर्ट में हम ग्वालियर के राज्यसभा सदस्य महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया का जिक्र करना चाहते हैं क्योंकि वे ऐसे राजनेता है जिन्होंने इस भयावह आपदा की घड़ी में मुख्यमंत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का प्रयास किया है। इसलिये उम्मीद की जा सकती है कि वे अपने परिवहन मंत्री को डांट जरूर लगायेंगे। और आवश्यक हुआ तो मुख्यमंत्री को तुरन्त पत्र भी लिखेंगे। विषय होगा कोरोना महामारी के चलते शहरों में तो आप लाशों की गिनती नहीं लगा पा रहे हैं लेकिन उन 54 हजार गांवों का क्या होगा जहां पर न डॉक्टर है न अस्पताल है और कोरोना से जूझने वाली कोई सरकारी व्यवस्था भी नहीं है। यदि गांव में कुछ है भी तो वहां के मजदूरों का, किसानों का नैतिक बल अर्थात दृढ़ इच्छा शक्ति विद्यमान है, जिसकी वजह से गांव का हांहांकार भूतल पर उजागर होते दिखाई नहीं पड़ रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने ग्रामीण जनता का कोरोना बचाव के लिए अपना मुंह फेर लिया है। यूं कहा जाए कि गांव के अंदर से कोरोना की आग बाहर निकले इसके पहले यदि सरकार जागरूकता से कोई सकारात्मक कदम उठा ले तो 54 हजार गांव की जिंदगियों को बचाया जा सकता है, बशर्ते नौकरशाही का सोच कोरोना महामारी से ज्यादा पॉजिटिव होना चाहिए। इस विशेष रिपोर्ट का आशय केवल इतना है कि आपदा में अवसर तलाशने वाले अवसरवादियों से दूर रहा जाए और शहरों तक सीमित होकर कोरोना महामारी से जूझने वाली सरकार को अपने 54 हजार गांव की तरफ मंत्रियों और नौकरशाही को दौड़ाना होगा। यह सुनिश्चत करना होगा कि प्रत्येक गांव में एक ऑक्सीजन वाला बड़ा एंबुलेंस पैरामेडिकल स्टाफ के साथ वहां 24ङ्ग7 खड़ा रहे। जिसमें गांव की जनसंख्या के आधार पर कोरोना गाइडलाइन के हिसाब से कोराना किट, पर्याप्त पीने का पानी चाहे वो बिस्लेरी बोतलें ही क्यों ना हो और सूखा रसद जो जरूरत पडऩे पर जिसकों तुरंत दिया जा सकता है। ऐसी सभी सामग्रियों के साथ  प्रत्येक गांव में एक एंबुलेंस भेजा जाना चाहिए। इस कॉलम में खोज का विषय यह है कि मध्यप्रदेश में अंतर्राज्यीय बसों की आवाजाही बंद है और आज राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश से भी बसों की आवाजाही बदं कर दी है। मतलब मध्यप्रदेश में 37886 बसें खड़ी हो चुकी हैं और 17575 लाइफ परमिट जारी हैं। इसी तरह स्कूल बसें 30575 बसें उपलब्ध हैं जो स्कूलों में खड़ी हैं। कुल मिलाकर 60 हजार से अधिक ड्राइवर बेरोजगार हैं और 60 हजार बसें खड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि 15 जून तक स्कूल नहीं खुलेंगे तो सरकार में बैठै नौकरशाहों को क्या विषय पर विचार नहीं करना चाहिए कि 60 हजार बसों का उपयोग प्रत्येक गांव में एंबुलेंस के रूप में किया जाए और गांव में जिंदगी बचाने के डर से जी रही जनता को राहत दिलाई जाए। इस कॉलम का लब्बोलुआब इतना ही है कि मानव इतिहास के सबसे बुरे दौर में जहां किसी भी व्यक्ति को कल का पता नहीं हो लाशों का मंजर कितना भयानक है, न्यूयार्क टाइम्स में छपी तस्वीर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश में आपदा को कुछ लोगों ने अवसर बना लिया है। यह अवधारणा पूरी तरह समाप्त होनी चाहिए। यह विशेष रिपोर्ट दो महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करने के लिए लिखी जा रही है, जिसमें पहला है 54 हजार गांवों की जनता बुरी तरह दहशत में है, इसका भी ख्याल करना जरूरी है। और इसके लिए पहली आवश्यकता है कि हर गांव में ऑक्सीजन वाली एक एंबुलेंस रेमडेसिविर जैसी महत्वपूर्ण इंजेक्शन के साथ नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिए और इसके लिए हमारी छोटी-सी खोज है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.एन. मिश्रा, परिवहन आयुक्त मुकेश जैन बिना समय गवाएं यह निर्णय कर सकते हैं कि 60 हजार पैसेंजर बसों को जिसमें 23 हजार स्कूल बसें शामिल हैं, अस्थाई रूप से एंबुलेंस में परिवर्तित कर दिया जाए और कोरोना महामारी से जूझ रहे ग्रामीण अंचलों के लिए भी कोराना मुक्ति ग्रामीण सेवा अभियान प्रारंभ किया जाए। इस विशेष रिपोर्ट का पहला और आखिरी लक्ष्य यह है कि मध्यप्रदेश में हो या देश में आई इस भयंकर आपदा को कम से कम मीडिया वाले सरकार की आलोचना के लिए अवसर ना बनाएं, व्यवस्था कमजोर है तो उसका उजागर होना जरूरी है लेकिन मौतों का मंजर किसी को राजनीति का अवसर प्रदान नहीं करता। यह इस बात का अवसर जरूर प्रदान करता है कि हम आप सब मिलकर इस आपदा में मानव जीवन को बचाने का अवसर मिला है उसके लिए सब मिलकर अहम भूमिका निभाएं वरना आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। जो गलतियां हुई हैं चाहे वो 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में भीड़ जुटाकर हुई हो या फिर मध्यप्रदेश में दमोह विधानसभा चुनाव को लेकर भीड़ आई हो ऐसी गलतियों से सबक लेने की जरूरत भी है।

0 comments      

Add Comment


विजय कुमार दास

  वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय दास राष्ट्रीय हिंदी मेल  समाचार प त्र के  प्रधान सम्पादक है .साथ ही पत्रकारिता के सुदीर्घ अनुभवी श्री दास सेन्ट्रल पत्रकार क्लब के संस्थापक है .