कर्तृत्व के साथ करुणा: जब वर्दी में दिखा मातृत्व

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कर्तृत्व के साथ करुणा: जब वर्दी में दिखा मातृत्व

DATIA: कानून का पालन कराना पुलिस का दायित्व है, लेकिन कई बार उसी दायित्व के बीच मानवता का ऐसा दृश्य सामने आता है, जो व्यवस्था को भी संवेदनशील बना देता है। दतिया में अवैध शराब के विरुद्ध चल रही संयुक्त कार्रवाई के दौरान ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जिसने कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के बीच करुणा की एक मिसाल कायम कर दी।

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दतिया पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम अवैध शराब के खिलाफ सघन अभियान चला रही थी। इस कार्रवाई का नेतृत्व SDOP अनुभाग दतिया आकांक्षा जैन कर रही थीं। इसी दौरान अत्यधिक सर्दी के बीच एक स्थान पर टीम की नजर एक भूखे और लगातार रोते हुए नवजात शिशु पर पड़ी। बच्चा न केवल ठंड से कांप रहा था, बल्कि उसकी हालत स्पष्ट रूप से उपेक्षा और असुरक्षा की ओर इशारा कर रही थी।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए SDOP आकांक्षा जैन ने बिना किसी औपचारिकता के तुरंत मानवीय पहल की। उन्होंने नवजात शिशु को अपने हाथों में लिया, उसे शांत किया और तत्काल दूध पिलवाने की व्यवस्था कराई। इसके साथ ही बच्चे को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े उपलब्ध कराए गए, ताकि उसकी सेहत को किसी प्रकार का खतरा न हो।

यह क्षण केवल एक प्रशासनिक अधिकारी की संवेदनशीलता नहीं, बल्कि मातृत्व जैसी सहज करुणा का प्रतीक बन गया। कार्रवाई के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। कठोर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के बीच एक अधिकारी का इस तरह बच्चे के प्रति झुक जाना, वर्दी के भीतर छिपे मानवीय चेहरे को सामने ले आया।

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शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद उसे उसकी बड़ी बहन के सुपुर्द किया गया। साथ ही यह भी ध्यान रखा गया कि बच्चा सुरक्षित हाथों में जाए और उसकी तत्काल जरूरतें पूरी हों। प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ मानवीय जिम्मेदारी का यह संतुलन कार्रवाई को केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक भी बनाता है।

SDOP आकांक्षा जैन का यह व्यवहार उनकी कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और मानवीय छवि को रेखांकित करता है। यह घटना बताती है कि कानून लागू करने वाले हाथ अगर करुणा से जुड़े हों, तो व्यवस्था केवल सख्त नहीं, भरोसेमंद भी बनती है।

दतिया की यह घटना एक संदेश भी है कि प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। जब वर्दी में बैठा अधिकारी हालात को दिल से समझता है, तब शासन केवल चलता नहीं, लोगों के मन में उतरता है।