टंट्या मामा मूर्ति को लेकर कांग्रेस ने की गई कार्रवाई को लीपा पोती कहा, प्रतिमा के सामने किया धरना प्रदर्शन

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टंट्या मामा मूर्ति को लेकर कांग्रेस ने की गई कार्रवाई को लीपा पोती कहा, प्रतिमा के सामने किया धरना प्रदर्शन

खरगोन। टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना में सामने आए कथित घोटाले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने टंट्या मामा की प्रतिमा के सामने कल धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने नगर पालिका परिषद द्वारा जांच के नाम पर की जा रही लीपापोती का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

धरने को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने कहा कि जननायक आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना में हुआ भ्रष्टाचार न केवल टंट्या मामा बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नगर परिषद होने के नाते भाजपा को टंट्या मामा और आदिवासी समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। नाईक ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस इस घोटाले का पर्दाफाश नहीं करती तो क्या भाजपा नई मूर्ति लगाती।

भीकनगांव विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष झूमा सोलंकी ने जांच को दिखावा बताते हुए कहा कि छोटे कर्मचारियों को फंसाकर बड़े जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है। उन्होंने तत्काल नगर पालिका परिषद की सीएमओ को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा नगर पालिका अध्यक्ष की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

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भगवानपुरा विधायक केदार डावर ने भाजपा के आदिवासी जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मौन भ्रष्टाचार में उनकी स्वीकृति को दर्शाता है। धरना प्रदर्शन को कई कांग्रेस नेताओं ने संबोधित किया। अंत में कार्यकर्ताओं ने टंट्या मामा से क्षमा याचना कर भाजपा परिषद को सद्बुद्धि देने का आह्वान किया।

क्रांति सूर्य टंट्या मामा की गरिमा से जुड़े स्मारक के साथ हुए “मटेरियल घोटाले” ने पूरे खरगोन में राजनीतिक और प्रशासनिक भूचाल ला दिया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्थापित की गई टंट्या मामा की मूर्ति संगमरमर या धातु की बजाय एफआरपी (फाइबर) की निकलने पर कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। हालांकि नगर पालिका ने इसे मानवीय भूल बताते हुए नई मूर्ति स्थापित करने की बात कही है।

मामला सामने आते ही नगर पालिका ने मूर्ति लगाने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया, जबकि सब इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पुराने टेंडर को रद्द करते हुए अब चार महीने के भीतर नई धातु की मूर्ति लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर पालिका सीएमओ कमला कौल ने बताया कि प्रेसिडेंट और काउंसिल की बैठक में पहले जारी 9.90 लाख रुपये का टेंडर को निरस्त किया गया है और अब 15 लाख रुपये की लागत से धातु की मूर्ति स्थापित की जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि मूर्ति 15 नवम्बर ( जनजातीय गौरव दिवस )से ठीक एक दिन पहले आई थी और जल्दबाजी में बिना जांच अनावरण कर दिया गया, लेकिन अब गलती सुधारी जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस मामले में जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने सख्त कदम उठाते हुए जांच के निर्देश दिए थे। उन्हें प्रेसिडेंट एंड काउंसिल के निर्णय से अवगत करा दिया गया है।

सीएमओ ने दावा किया कि जैसे ही यह उजागर हुआ कि मूर्ति एफआरपी की है, ठेकेदार को 18 नवंबर और 22 दिसंबर को नोटिस जारी किए गए। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को आज तक एक भी रुपया भुगतान नहीं किया गया, और उसने लिखित में माफी मांगते हुए मूर्ति को दान करने की पेशकश की है। उसने यह भी कहा है कि वह इस मूर्ति का एक भी पैसा नहीं लेगा।

हालांकि, ठेकेदार नमन भट्ट ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार के आरोपों को नकारते हुए कहा कि मूर्ति की खरीद, ट्रांसपोर्टेशन और इंस्टॉलेशन में उसके करीब 9 लाख रुपये खर्च हुए हैं। उसने कहा कि यह उसका पहला काम था और सप्लायर की दी गई मूर्ति को बिना जांचे नगर पालिका को सौंप दिया गया। उसने कहा कि कांग्रेस के आरोपों के मुताबिक यदि इस तरह की मूर्ति 50000 रु में आ जाए तो वह 1000 मूर्ति का ऑर्डर देने को तैयार है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने 8 जनवरी को भी प्रदर्शन किया था, और पूरे मामले को “प्रशासनिक संरक्षण में हुई गड़बड़ी” करार देते हुए तीखा हमला बोला था। जिला मीडिया प्रभारी राजेश मंडलोई ने आरोप लगाया कि दोषियों को बचाने के लिए लीपापोती की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर विरोध न होता, तो यह फाइबर की मूर्ति ही संगमरमर बताकर इतिहास बन जाती।

नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी ने कहा कि ठेकेदार ने गलती स्वीकार कर ली है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पर व्यर्थ की राजनीति कर रही है।