आरक्षक भर्ती परीक्षा- अभ्यर्थियों की सही पहचान के लिए सघन सत्यापन- DGP को DIG रेंक के अफसरों ने दी जानकारी 

अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट से पहचान, फेस रिकग्निशन सिस्टम आईरिस परीक्षण कर सत्यापन किया

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आरक्षक भर्ती परीक्षा- अभ्यर्थियों की सही पहचान के लिए सघन सत्यापन- DGP को DIG रेंक के अफसरों ने दी जानकारी 

भोपाल: पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में बार-बार आ रही गड़बड़ियों के बाद वर्ष 2025 की आरक्षक भर्ती में फिजिकल एक्जाम ले रहे पुलिस उपमहानिरीक्षकों ने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के सामने दावा किया है कि इस बार अभ्यर्थियों की सही पहचान के लिए सघन सत्यापन किया है। जिसमें उन्होंने फिंगरप्रिंट आधारित पहचान, फेस रिकग्निशन सिस्टम, आईरिस एवं मेडिकल परीक्षण तथा दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया गया है। भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कुछ प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिसे लेकर भी आगे की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

दरअसल पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में फिजिकल एक्जाम के बाद DGP ने इस संबंध में समीक्षा की। समीक्षा के दौरान डीआईजी भोपाल देहात राजेश चंदेल, बालाघाट डीआईजी विनीत जैन, मुरैना डीआईजी सुनील कुमार जैन, रतलाम डीआईजी निमिष अग्रवाल, रीवा डीआईजी हेमंत चौहान, ग्वालियर डीआईजी ओर रेल भोपाल डीआईजी मौजूद थे। डीआईजी अलग-अलग रेंज में जाकर फिजिकल एक्जाम करवाए थे।

समीक्षा में भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की फील्ड स्तर पर सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों तथा व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों की समस्याओं, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों एवं उनकी सुविधाओं को लेकर भी बातचीत हुई।

DGP को यह भी बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान सॉफ्टवेयर आधारित डेटा प्रबंधन एवं आॅनलाइन अपलोड प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे अभ्यर्थियों के दस्तावेजों एवं परिणामों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही किसी भी तकनीकी बाधा की स्थिति से निपटने के लिए तकनीकी एवं मैन्युअल दोनों प्रकार की रिकॉर्ड प्रणाली को समानांतर रूप से संचालित किया गया। गौरतलब है कि भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षाएं, जिनमें दौड़, शॉर्ट पुट एवं लॉन्ग जंप शामिल हैं।