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नए निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने पदभार संभालते ही जल प्रदाय व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लापरवाही या तकनीकी खामी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि शहरवासियों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी समाधान लागू किए जाएंगे।
*• भागीरथपुरा में पूरी प्रशासनिक ताकत मैदान में*
दूषित पानी के स्रोत और पाइपलाइन लीकेज की पहचान के लिए नगर निगम ने व्यापक अभियान शुरू किया है। निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी हाल ही में पदस्थ तीन नए अपर आयुक्तों को सौंपी गई है। भागीरथपुरा क्षेत्र की 32 गलियों में 32 उपयंत्री और सहायक यंत्री बीट के अनुसार तैनात किए गए हैं, जो लगातार सैंपलिंग, पाइपलाइन जांच और लीकेज खोजने का कार्य कर रहे हैं।
*• सैंपलिंग, लीकेज और सीवेज मिक्सिंग पर फोकस*
प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में सीवेज का पानी पेयजल लाइन में न मिले। इसके लिए जल आपूर्ति नेटवर्क की बारीकी से जांच की जा रही है। संदिग्ध पाइपलाइन हिस्सों को चिन्हित कर तत्काल मरम्मत और बदलाव के निर्देश दिए गए हैं।
*• नागरिकों के लिए अस्थायी राहत व्यवस्था*
प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है। अस्पतालों में अतिरिक्त बेड, दवाइयों और चिकित्सकीय स्टाफ की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।