
MP में पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में बजेगा दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, रंगरूटों को संवेदनशील बनाने की पहल
भोपाल: मध्यप्रदेश के सभी पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब हर सुबह दक्षिणामूर्ति स्तोत्र बजाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस स्तोत्र को सुनने से प्रशिक्षण ले रहे रंगरूटों में संवेदनशीलता, करुणा और सहानुभूति जैसे मानवीय गुण विकसित होंगे।
पुलिस प्रशिक्षण के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने निर्देश दिया है कि राज्य के सभी कांस्टेबल प्रशिक्षण केंद्रों में सुबह सबसे पहले सार्वजनिक प्रसारण प्रणाली पर दक्षिणामूर्ति स्तोत्र चलाया जाए। इससे पहले भी उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान रंगरूटों को श्रीमदभगवद् गीता पढ़ने का निर्देश दिया था। उससे पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम में रामचरितमानस का पाठ भी शामिल किया गया था।
प्रदेश पुलिस के सभी ट्रैनिंग सेंटर्स में यह स्तोत्र बजाया जाएगा। प्रशिक्षण केंद्रों में हजारों रंगरूट ट्रैनिंग ले रहे हैं।
दक्षिणामूर्ति स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति में रचा गया एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसमें शिव को ज्ञान, ध्यान और परम बुद्धि का स्रोत बताया गया है। दरअसल पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा का मानना है कि पुलिस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता विकसित करना नहीं है, बल्कि ऐसे पुलिसकर्मी तैयार करना भी है जो अच्छे इंसान हों और समाज के प्रति संवेदनशील, दयालु और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखें।
*क्या है दक्षिणामूर्ति स्तोत्र*
दक्षिणामूर्ति स्तोत्र संस्कृत का प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसमें कुल दस श्लोक हैं, जिनमें भगवान शिव को सर्वोच्च गुरु और ज्ञान के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है। स्तोत्र में शिव को वटवृक्ष के नीचे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठे हुए ज्ञान के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है, जो अज्ञान को दूर कर अद्वैत वेदांत के दर्शन का उपदेश देते हैं।





