रेल ट्रैक पर मौत का सफर: बरखेड़ा-बुदनी रेल लाइन पर 10 साल में 12 तेंदुएं समेत 44 वन्यजीवों की मौत!

59

रेल ट्रैक पर मौत का सफर: बरखेड़ा-बुदनी रेल लाइन पर 10 साल में 12 तेंदुएं समेत 44 वन्यजीवों की मौत!

भोपाल : रातापानी टाइगर रिजर्व से गुजर रही बरखेड़ा-बुदनी तीसरी रेल लाइन परियोजना वन्यजीवों की जान पर भारी पड़ रही है। पिछले 10 सालों में यहां 12 तेंदूए समेत अन्य 44 वन्यप्राणी ट्रेन की चपेट में आकर मारे जा चुके हैं। अभी हाल ही में एक बाघ की भी कटकर मौत हो चुकी है। यह खुलासा रेलवे और वन विभाग के अफसर की संयुक्त निरीक्षण के बाद सामने आई रिपोर्ट में हुआ है। संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक साफ रेलवे ने सुरक्षा के नियमों की जमकर अनदेखी की है। राष्ट्रीय और राज्य वन्यजीव बोर्ड की शर्तों के बावजूद न तो एनीमल पासेज बने, न फेंसिंग पूरी हुई। ट्रेनें भी तय सीमा से तेज दौड़ रही हैं।

तो बच सकती थी जान…
रातापानी सेंचुरी प्रबंधन रेलवे को शॅर्ट टर्म और लांग टर्म एक्शन प्लान दे चुका है। लेकिन अभी तक इस अप और डाउन पर किसी भी तरह का काम नहीं किया गया। पिछले दस सालों में अगर शॉर्ट प्लान भी लागू कर दिया जाता ते कई वन्यप्राणियों की जान बच सकती थी। शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान में ट्रेन को 60 की स्पीड से चलाना, हॉर्न बजाना, पेट्रोलिंग और जाली लगाना है जबकि लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान में अंडरपास, ओवर पास बनाना का काम शामिल है।

बोर्ड की शर्तों के बावजूद सुरक्षा अधूरी
मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 48वीं और 49वीं बैठक में सशर्त वन्यजीव अनुमति के तहत यह परियोजना संचालित की जा रही थी। इन शर्तों का उद्देश्य परियोजना क्षेत्र में बाघ, तेन्दु और अन्य वन्यजीवों के आवास और सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। वन विभाग ने समय-समय पर रेलवे विभाग को लिखित निर्देश भेजकर इन शर्तों के पालन और आवश्यक अधोसंरचना निर्माण को सुनिश्चित करने को कहा। इसके बावजूद कई जरूरी शर्तें पूरी नहीं की गई हैं।

 बरखेड़ा-बुदनी रेल लाइन में ओवर पास का कार्य मार्च तक होगा पूरा
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बरखेड़ा-बुदनी के बीच तीसरी रेल लाइन का कार्य रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किया जा रहा है, जो क?ि मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा। वन विभाग के निदेर्शानुसार चिन्हित स्थलों पर ओवरपास बनाए जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा न हो। ट्रैक के आसपास फेंके गए कचरे को भी नियमित रूप से हटाया जा रहा है ताकि पर्यावरण स्वच्छ बना रहे। इसके अलावा, आईआरसीटीसी द्वारा ट्रेनों में सेवाएं देने वाले वेंडरों की समय-समय पर काउंसलिंग की जा रही है, जिससे स्वच्छता और यात्रियों को बेहतर सेवा सुनिश्चित की जा सके।