27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत: 2005 बैच के IAS अधिकारी- नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेश को हटाया

दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन

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27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत: 2005 बैच के IAS अधिकारी- नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेश को हटाया

नई दिल्ली: नोएडा के सेक्टर 150 स्थित एक निर्माण स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के CEO,2005 बैच के IAS लोकेश को हटा दिया है।
घटना के दो दिन बाद 2 दिनों बाद, सरकार ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए जवाबदेही तय करने हेतु प्रशासनिक और जांच कार्रवाई शुरू कर दी है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एम लोकेश को उनके पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के आदेश दिए हैं।

इस जानलेवा दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस दल की अध्यक्षता मेरठ जोन के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) करेंगे और इसमें मेरठ संभागीय आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता भी सदस्य होंगे। एसआईटी को पांच दिनों के भीतर मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

यह हादसा शुक्रवार देर रात उस समय हुआ जब नोएडा निवासी और गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता घने कोहरे में घर लौट रहे थे। पुलिस ने बताया कि उनकी कार निर्माणाधीन स्थल पर क्षतिग्रस्त चारदीवारी को तोड़कर रात करीब 12:30 बजे सड़क से उतरकर पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।

शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, कार के गड्ढे में गिरने के बाद मेहता किसी तरह आंशिक रूप से डूबी हुई गाड़ी की छत पर चढ़ गए और बार-बार मदद के लिए चिल्लाते रहे। उनके परिवार का आरोप है कि वे करीब दो घंटे तक पानी में फंसे रहे। उनका दावा है कि इस दौरान बचाव कार्य समय पर नहीं हुआ और न ही प्रशिक्षित गोताखोरों को मौके पर भेजा गया। पुलिस में दर्ज शिकायत में युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने घोर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है।

पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने कई कारणों का जिक्र किया, जिनके चलते यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि घना कोहरा, टूटी हुई चारदीवारी और निर्माण स्थल पर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, ये सभी कारक दुर्घटना का कारण बने। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर मदद पहुंच जाती तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी।

बाद में बोलते हुए मेहता ने कहा कि इलाके के लोगों ने कार के गड्ढे में गिरने के बाद उनके बेटे को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना था, लेकिन कोई संगठित बचाव अभियान नहीं चलाया गया। उन्होंने कहा, “वह काफी देर तक जीवित रहा। लोग वहां मौजूद थे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं थी, कोई गोताखोर नहीं था, कुछ भी नहीं था। जो अधिकारी आए, उन्हें पता नहीं था कि क्या करना है।” उन्होंने अधिकारियों की ओर से गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

पीड़ित को ढूंढने की कोशिश में सुबह करीब 1.45 बजे नाले में उतरे एक स्थानीय निवासी ने भी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटनास्थल पर भ्रम की स्थिति थी और एजेंसियों के बीच कोई स्पष्ट समन्वय नहीं था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवराज मेहता की मौत डूबने से हुई बताई गई है। इस घटना से नोएडा के निवासियों में आक्रोश फैल गया है और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा संबंधी खामियों पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है। उत्तर प्रदेश गृह विभाग के अधिकारियों ने कहा कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।