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जानकारी का खुलासा तब हुआ, जब डिलीवरी के बाद एड्स विभाग के कर्मचारी नवजात शिशु को टीका लगाने पहुंचे। तब अस्पताल के स्टाफ और प्रभारी को पता चला कि एड्स पीड़ित का तो सिजेरियन हो चुका है। उसके बाद उसी ओटी में तीन और डिलीवरियां कराई जा चुकी हैं। ऐसे में स्टाफ में हड़कंप मच गया। मामले को दबाने और लीपा पोती की कोशिश की गई और स्टाफ को हिदायत देकर किसी को जानकारी देने से रोका गया।
वरिष्ठ चिकित्सकों से हुई चर्चा के अनुसार जब यह पता चलता है कि यदि किसी एड्स महिला मरीज की डिलीवरी कराई जानी है, तो उसके लिए अहतियातन विशेष ओटी कक्ष किया जाता है और उसे पूर्ण सुरक्षात्मक ढंग से प्रसूति कराई जाती है। लेकिन, यदि किसी महिला की प्रसूति सिजेरियन ऑपरेशन के तहत हो रही है, तो इसमें और भी सतर्कता बरतना जरूरी होता है।
एड्स पीड़ित महिला के बारे में पता चला कि महिला का पति भी एड्स पीड़ित है। पति ने बताया कि डॉ सीमा सोनी से उनकी पत्नी का कई महीनों से इलाज कराया जा रहा था। यह पूछने पर कि क्या ऐसा करने के लिए डॉ सीमा सोनी ने कोई रुपए लिए, तो उन्होंने इनकार किया। यह पूछने पर कि जब उन्हें पता था एड्स पीड़ित है, तब भी क्या उन्होंने पैसे नहीं लिए, इस पर भी पति ने इनकार किया। लेकिन, इस बात को स्वीकार किया कि हम दोनों ही एड्स पीड़ित हैं।
घटना के बाद ओटी बंद
शासकीय अंबेडकर अस्पताल में इस मामले को लेकर सनसनी है। एकमात्र ओटी कक्ष बंद कर दिया गया। इस कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। एड्स महिला पीड़ित का ऑपरेशन होने के बाद जिन तीन महिलाओं के ऑपरेशन हुए, उनकी जांच और सुरक्षा कैसे की जा सकेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं। यह भी पता चला है कि ट्रेंड तीन नर्स इस समय अवकाश पर हैं।