
संघ का सशक्तिकरण…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 साल पूरा होने के बाद अब सशक्तिकरण के नए रास्ते पर चल निकला है। प्रांतों को खत्म कर संभागों का गठन करने का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का फैसला इसका ही उदाहरण है। छोटी-छोटी सशक्त इकाइयों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अधिक सशक्तिकरण की यह परिकल्पना परिणामदायक साबित होने वाली है। युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में जोड़कर भी संघ सशक्तिकरण की नई परिभाषा गढ़ने का मन बना चुका है। बदलाव का यह रोडमैप संघ को आगामी सौ वर्ष के लिए संजीवनी देने वाला साबित हो सकता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला कर मध्य प्रदेश में वर्तमान मालवा, महाकौशल और मध्यभारत जैसे तीन प्रांतों को खत्म करने का फैसला किया है। इसकी जगह प्रदेश में इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम जैसे शहर संभागीय व्यवस्था के मुख्य केंद्र होंगे। यहीं से संबंधित क्षेत्रों का संचालन किया जाएगा। मध्यप्रदेश में 3 की जगह 9 केंद्रों से व्यवस्था का यह संचालन
निश्चित तौर से अधिक प्रभावी साबित होगा। जैसे बड़े राज्यों को छोटे-छोटे राज्यों में बांटकर बेहतर और सशक्त व्यवस्था सामने आती है, इसी तर्ज पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने निचले स्तर तक सशक्तिकरण का यह नया फॉर्मूला अख्तियार किया है। संघ की हाल ही में हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में यह फैसला लिया गया। नए सिस्टम के तहत पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी एक प्रचारक और कार्यकारिणी संभालेगी, जबकि देशभर में करीब 80 नए संभाग गठित किए जाएंगे। इससे जिला और विभाग स्तर के कार्यकर्ता सीधे संभागीय प्रचारकों से जुड़ सकेंगे। संघ का मानना है कि इस बदलाव से संगठन में कामकाज तेज होगा, फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे और युवा कार्यकर्ताओं को ज्यादा जिम्मेदारी मिलेगी। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के कार्यकाल का यह फैसला उन्हें कहीं न कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की सोच के समकक्ष खड़ा करता है।
इस नई व्यवस्था के तहत ही मध्य प्रदेश में अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम तीन प्रांत- मालवा, महाकौशल और मध्यभारत में बंटा हुआ था। नई व्यवस्था में पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी एक ही प्रचारक संभालेगा, जबकि अलग-अलग संभागों में अलग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। इस बदलाव से जिला और संभाग स्तर पर काम ज्यादा प्रभावी होगा। खासतौर पर युवा कार्यकर्ताओं को अधिक मौके मिलेंगे और उन्हें सक्रिय करने में मदद मिलेगी। इससे संघ का नेटवर्क भी और मजबूत होगा।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, शताब्दी वर्ष को “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। यह नई व्यवस्था उसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। संघ की यह नई व्यवस्था जल्द ही पूरे देश में लागू की जाएगी। मध्य प्रदेश में अभी संघ के तीन प्रांत प्रचारक हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर इन तीनों में से किसी एक प्रांत प्रचारक को प्रदेश प्रचारक बनाया जाएगा, जो पूरे मध्य प्रदेश का काम संभालेगा। बाकी दो प्रांत प्रचारकों को अखिल भारतीय स्तर पर जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा उन्हें संघ के अन्य अनुषांगिक संगठनों में भी अहम पद सौंपे जा सकते हैं।
फिलहाल यही माना जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समय के साथ विस्तार का नया फॉर्मूला आत्मसात कर लिया है। गणवेश परिवर्तन भी सोच में परिवर्तन का एक विशेष कदम था। और अब संभागीय स्तर पर सशक्तिकरण का यह नया फॉर्मूला भी समय के मुताबिक, सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। निश्चित तौर से संघ की सफलता में संघ समर्थित राजनैतिक दल का सशक्तिकरण भी तय है। और इसी वजह से 100 साल बाद संघ के इस बदलाव की खुशी संघ समर्थित राजनीतिक दल भी मनाएगा। और यह भी तय है कि देश में संघ की नई व्यवस्था के परिणाम भी जल्दी ही देखने को मिलेंगे…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





