
सबको ‘जी-राम-जी’ रटाना है…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
भाजपा सरकारों ने अब यह तय कर लिया है कि जल्दी से जल्दी ‘जी-राम-जी’ योजना का नाम हर जुबां पर लाना है और सबको रटाना है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पत्रकार वार्ता 7 जनवरी 2026 को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विकसित भारत जी-राम-जी योजना को नरेगा और मनरेगा से बेहतर बताते हुए इसकी खूबियाँ गिनाईं। और यह भी बताया कि ‘जी-राम-जी’ योजना के बारे में हम लोग सभी को बताएंगे। प्रदेश जिला और तहसील स्तर तक इस योजना की खूबियां गिनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी योजना से देश और क्षेत्र के गांवों की तस्वीर बदल जाएगी। यह योजना ग्रामीण विकास में श्रमिकों और किसानों दोनों के लिए लाभकारी होगी।
सहायक श्रमिकों के साथ 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी अब कृषि श्रमिकों को भी मिलेगी। आजीविका के स्थायी स्रोत विकसित होंगे। ग्रामीण कौशल और उद्यमिता में भी वृद्धि होगी।
बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा, श्रमिकों को विलंबित मजदूरी के रूप में अतिरिक्त राशि दी जाएगी। विकसित भारत जी-राम-जी योजना में जवाबदेही और पारदर्शिता पर पूरा जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गांवों, गरीबों और किसानों का सर्वांगीण कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा मुख्य लक्ष्य उन्हें समृद्ध और सशक्त बनाना है। इसके लिए हम वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इस वर्ष कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। कृषि क्षेत्र में कार्यरत सभी विभागों, स्वयंसेवी संगठनों, संस्थानों और व्यक्तियों के सहयोग से हम किसानों के कल्याण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार के 15 से अधिक प्रमुख विभाग सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इनमें बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं दुधारू पालन, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वानिकी, कुटीर एवं ग्राम उद्योग, लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, मंडी बोर्ड, बीज निगम, कृषि अभियांत्रिकी, एमपी एग्रो, डेयरी यूनियन, मार्कफेड, एमपी वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं, जो किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के नेतृत्व में कार्य करेंगे। आजीविका विकास मिशन रोजगार आधारित विकास गतिविधियों के माध्यम से किसानों के कल्याण के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी प्रयास करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित भारत ‘ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन’ यानी ‘ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम 2025’ को देश के सभी गांवों, गरीबों और किसानों के सर्वांगीण विकास और ग्राम स्तर पर जरूरतमंदों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। ‘हर हाथ को काम’ प्रदान करने के लिए, यह अधिनियम अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है। जबकि एमएनआरईजीए अधिनियम में रोजगार की यह गारंटी 100 दिनों की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी’ योजना देश के सभी गांवों की तस्वीर बदल देगी। यह सभी गरीबों, कृषि श्रमिकों और किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह योजना गांवों के विकास को भी मजबूत करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले किसानों को कृषि संबंधी कार्यों के लिए मजदूर नहीं मिलते थे, लेकिन वीबी जी-राम-जी योजना ने कृषि के सबसे व्यस्त समय, विशेषकर बुवाई और कटाई के दौरान, पर्याप्त मात्रा में कृषि मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित की है। अधिनियम के अनुसार, राज्य एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि अधिसूचित कर सकते हैं, जिसमें फसलों की बुवाई और कटाई का व्यस्ततम समय भी रोजगार प्रदान करने की अवधि में शामिल किया जा सकता है। प्रावधानों के अनुसार, इस अवधि के दौरान अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अन्य कार्य नहीं किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए एक उचित कार्य योजना बनाने जा रहे हैं। इससे मिशन में तेजी आएगी। इसके अंतर्गत गौपालन को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही कई अन्य सुधार भी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में स्टॉल, बाजार आदि स्थापित करने की व्यवस्था भी की जाएगी। हमने प्रत्येक जिले में स्टॉल के माध्यम से किसानों के प्राकृतिक उत्पादों को जनता तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए हम सभी किसानों को आवश्यकतानुसार सब्सिडी भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक कर्मचारियों का पहला 6 प्रतिशत मनरेगा योजना के कार्यान्वयन में लगाया गया था। विकसित भारत जी-राम-जी योजना में इस कार्यकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है। इससे योजना के कार्यान्वयन में जवाबदेही बढ़ेगी और सभी गतिविधियां पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार मानकों के आधार पर देश के प्रत्येक राज्य को एक निश्चित राशि भी देगी। यह अधिनियम ग्रामीण आजीविका सृजन के स्थायी स्रोतों के विकास पर जोर देता है। इससे ग्रामीणों के स्थानीय ज्ञान, कौशल, उद्यमशीलता और जन्मजात कलात्मक प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अधिनियम में बेरोजगारी भत्ता और विलंबित मजदूरी का प्रावधान भी किया गया है। इसके तहत, यदि किसी ग्रामीण परिवार को उसकी मांग के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो राज्य सरकार संबंधित परिवार को निर्धारित दरों और शर्तों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए बाध्य होगी। इसी प्रकार, काम पूरा होने के बाद भी यदि किसी कारणवश श्रमिक को उसकी निश्चित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है, तो इस अधिनियम में मुआवजे के रूप में विलंबित मजदूरी की अतिरिक्त राशि देने का भी प्रावधान है।
तो कुल मिलाकर अब पूरा देश
विकसित भारत जी-राम-जी योजना की खूबियों के बारे में जानने को तैयार हो जाए। और यह मानने को भी तैयार हो जाए कि नरेगा, मनरेगा से विकसित भारत जी-राम-जी योजना बहुत बेहतर है। विपक्ष अगर योजना के बारे में भ्रम फैलाता है तो भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है। जी-राम-जी योजना ही रोजगार की गारंटी देगी, ज्यादा रोजगार देगी और विकसित भारत बनाएगी। हो सकता है कि अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा का नारा भी यही हो ‘जी-राम-जी’-भाई जी, ‘जी-राम-जी’- बहिन जी, ‘जी-राम-जी’- किसान जी, ‘जी-राम-जी’- बेटा जी और बेटी जी और ‘जी-राम-जी’- मतदाता जी… हालांकि तब तक जी-राम-जी सबकी जुबां पर होगा और सबको इसका फुल फॉर्म ‘ विकसित भारत, गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ भी सबको रट चुका होगा।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





