स्व जगदीश किंजल्क की अंत्येष्टि में उमड़े प्रशंसक

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भोपाल; वरिष्ठ लेखक ,परिचर्चा सम्राट आकाशवाणी के सेवानिवृत्त स्टेशन डायरेक्टर श्री जगदीश किंजल्क की अंत्येष्टि आज कोलार मार्ग स्थित सनखेड़ी विश्राम घाट में हुई । कल उनका निधन हुआ था। वे 74 वर्ष के थे।

इस अवसर पर विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधि लेखक और किंजल्क जी के चाहने वाले उमड़ पड़े।

आकाशवाणी के उद्घोषक रहे राजुरकर राज ने कहा कि वे प्रसारण सेवाओं में गुणवत्ता का प्रतीक थे। उन्होंने सभी को स्नेह दिया। उनके साथ बिताया समय यादगार रहेगा।

लघु कथा लेखक घनश्याम मैथिल “अमृत ” ने कहा कि किंजल्क जी भोपाल में शिक्षक के तौर पर वर्ष 1975 में कार्यरत थे। इसके बाद आकाशवाणी में उनका चयन हुआ। उन्होंने हमेशा सभी को बहुत स्नेह और सहयोग दिया। जनसंपर्क अधिकारी और लेखक अशोक मनवानी ने कहा कि उनका गत 36 वर्ष से किंजल्क जी से संबंध है। वे सदैव रचनाकारों को प्रोत्साहित करने का कार्य करते रहे। उनकी सेवाएं हमेशा याद की जाएंगी।वे विनम्र और सकारात्मक दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे। दिव्य पुरस्कारों के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों लेखकों को आगे बढ़ाया।

श्री प्रियदर्शी खेरा, श्री अशेष श्रीवास्तव और श्री सुदर्शन कुमार सोनी ने भी लेखन में जगदीश जी द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन का उल्लेख किया। दुष्यंत संग्रहालय भोपाल,भोजपाल साहित्य मंच और अनेक संगठनों की तरफ से किंजल्क जी को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री सत्येंद्र खरे और अनेक नागरिक गण,विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। परिजनों के अलावा लगभग दो दर्जन लोगों ने श्रद्धांजलि व्यक्त की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भी सैकड़ों लोगों ने किंजल्क जी को श्रद्धांजलि दी है।

उल्लेखनीय है कि किंजल्क जी मुख्यमंत्री श्री चौहान के भी गुरु रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा कुछ वर्ष पूर्व किंजल्क जी का मुख्यमंत्री निवास पर अभिनंदन भी किया गया था। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जगदीश किंजल्क जी को राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। वे धर्मयुग और साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के भी लेखक रहे। जगदीश किंजल्क जी के पिता श्री अंबिका प्रसाद “दिव्य” देश के प्रसिद्ध साहित्यकारों में शामिल थे। जगदीश किंजल्क जी ने पिता की स्मृति में साहित्यिक पुरस्कार प्रदान करने की शुरुआत की थी और अनेक वर्ष तक समारोह पूर्वक साहित्यकारों को पुरस्कृत किया।