

Fifth Convocation Ceremony : अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव- राज्यपाल मंगुभाई पटेल!
डॉ.दिनेश चौबे की रिपोर्ट!
Ujjain : महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन (“नैक” द्वारा “A” ग्रेड से प्रत्यायित) का पञ्चम दीक्षान्त समारोह 31 मार्च 2025 को संकुल, कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को “A” ग्रेड प्राप्त होने पर बधाई देते हुए दीक्षांत उपदेश में कहा कि संस्कृत शास्त्रों की गौरवशाली परंपरा को संपूर्ण विश्व में प्रचारित किया जाना चाहिए संस्कृत शास्त्रों में करुणा संवेदना और संस्कृति का समावेश हैं। समय और शिक्षा का सही उपयोग व्यक्ति को सफल और महान बनाता है उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए आवाहन किया कि आज की पीढी को धैर्यपूर्वक संस्कृति, परंपराओं से जुड़कर माता-पिता की सेवा करनी चाहिए, अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव हैं।
मुख्य अतिथि उच्च- तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दरसिंह परमार ने कहा कि संस्कृत के छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक हैं आने वाला युग संस्कृत का युग भारत की भूमि आदिकाल से ज्ञान की स्थली रहीं हैं हम भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए अग्रसर हैं।
संस्कृत, योग, आयुर्वेद और विज्ञान की जननी हमारे ग्रंथों में समस्त ज्ञान समाहित हैं जिसमें अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्र और ज्ञान परंपरा के संवर्धन प्रचार प्रसार में पाणिनि विश्वविद्यालय सराहनीय कार्य कर रहा है। सारस्वत अतिथि आचार्य बालकृष्ण कुलपति, (पतंजलि विश्व विद्यालय हरिद्वार) ने कहा कि उपाधि प्राप्त होना विद्यार्थियों के पुरुषार्थ तथा अथक परिश्रम का परिणाम हैं विद्या हमें मुक्ति का मार्ग दिखाती है। हमारा ज्ञान समरसता और लोक कल्याण के लिए होना चाहिए। संस्कृत छात्र अपने आचरण से संपूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रचारित करने हेतु कार्य करें।
डॉक्टर सन्ध्या पुरेचा, अध्यक्षा संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली ने कहा कि संस्कृत, वेद, उपनिषद और विज्ञान की भाषा है। संस्कृत सर्वांगीण विकास करने में सर्वथा उपयुक्त है। कला एवं ज्ञान के रक्षण हेतु संस्कृत अध्ययन आवश्यक हैं। कार्यक्रम में बालयोगी संत उमेशनाथ महाराज राज्यसभा सांसद एवं पीठाधीश्वर वाल्मीकि धाम,उज्जैन, अनिल फिरोजिया सांसद ,उज्जैन अनिल जैन (कालुहेड़ा) विधायक, उत्तर उज्जैन उपस्थित थे।
कुलगुरु प्रोफेसर विजय कुमार सीजी ने प्रस्तावना एवं वाचिक में विश्वविद्यालय की उपलब्धि तथा प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विद्या से जोड़ने पर बल दिया इस अवसर पर कुलगुरु द्वारा लिखित किताब का विमोचन राज्यपाल ने किया। आभार कुलसचिव प्रोफेसर दिलीप सोनी ने माना। समारोह में कार्य परिषद सदस्य डॉक्टर विश्वास व्यास, एडवोकेट गीतांजलि चौरसिया, गौरव धाकड़, डॉ. हरीश व्यास, सुमिना अनिल लिग्गा, डॉ. केशर सिंह चौहान, डॉ.अजय सिंह राठी सभी संकाय अध्यक्ष, विभाग अध्यक्ष एवं संबद्ध महाविद्यालय प्राचार्य, प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे। संचालन, समन्वयक डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया। समारोह में सत्र 2022-23 में उत्तीर्ण 1349 स्नातकों तथा सन 2023-24 में उत्तीर्ण हुए 1012 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई।
इस दौरान 79 विद्यार्थियों को राज्यपाल द्वारा स्वर्ण, रजत, तथा कांस्य पदक के साथ उपाधियां प्रदान की इनमें पीएचडी के 5, स्वर्ण पदक 26, रजत पदक 25 और कांस्य पदक 23 प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय ने योग, संस्कृत और आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान के लिए पतंजलि योग विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण तथा नृत्य और नाट्यशास्त्र के क्षेत्र में योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।