File missing in Rs 3,000 bribery case: हाईकोर्ट ने माना गंभीर अपराध

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Pensioners Welfare AssociationHigh Court Reprimanded IAS Sachin Sinha

File missing in Rs 3,000 bribery case: हाईकोर्ट ने माना गंभीर अपराध

Jabalpur: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिश्वत के एक गंभीर प्रकरण में मूल फाइल के गायब होने को बेहद गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

● रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था हेड क्लर्क

मामला जबलपुर लोक निर्माण विभाग में पदस्थ रहे हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। लोकायुक्त पुलिस ने 26 अगस्त 2019 को उन्हें एक कर्मचारी से तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह मामला वर्तमान में ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है।

● ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देकर पहुंचा था मामला हाईकोर्ट

ट्रायल कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को आरोपी के आवाज के नमूने से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने का आदेश पारित किया था। इसी आदेश के खिलाफ अनिल कुमार पाठक ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

● सुनवाई के दौरान सामने आई बड़ी चूक, मूल फाइल ही निकली गायब

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से बताया गया कि रिश्वत प्रकरण की मूल फाइल गुम हो चुकी है। इस जानकारी पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।

● लोकायुक्त एसपी की पेशी, जांच में जिम्मेदारी स्वीकार

लोकायुक्त एसपी जबलपुर अंजुलता पटले न्यायालय में उपस्थित हुईं। उन्होंने बताया कि फाइल गुम होने की प्रारंभिक जांच कराई गई है। जांच में तत्कालीन प्रभारी डीएसपी और केस ऑफिसर रहे निरीक्षक आस्कर किंडो ने फाइल के गायब होने की जिम्मेदारी स्वीकार की है।

● दोषी अधिकारी पर एफआईआर और विभागीय जांच के निर्देश

युगलपीठ ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना भोपाल को निर्देश दिए कि दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही तीन दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति के चार वर्ष अभी पूरे नहीं हुए हैं, इसलिए उसके विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू की जाए।

● याचिका वापस, लेकिन कोर्ट के आदेश रहेंगे लागू

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई से जुड़े सभी निर्देश यथावत रहेंगे और उन पर अनिवार्य रूप से अमल किया जाएगा।

यह आदेश एक कड़ा संदेश देता है कि रिश्वत मामलों में न केवल आरोपी बल्कि जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी और न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।