Forensic Science : फारेंसिक साइंस के आगे मुर्दा भी सुनाता है, अपने साथ हुए अपराध की कहानी!

डॉ सत्पथी ने कहा, फारेंसिक साइंस अपराध विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा

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Forensic Science : फारेंसिक साइंस के आगे मुर्दा भी सुनाता है

(महासमुंद से किशोर कार की रिपोर्ट)

Mahasamund (Chattisgarh) : जाने-माने फॉरेंसिक साइंटिस्ट डॉ दिव्य किशोर सत्पथी (Forensic Scientist Dr Divya Kishore Satpathi) का कहना है कि फॉरेंसिक साइंस वो विधा है जिसके सामने मुर्दा भी बोल उठता है कि उसके साथ घटित अपराध और अपराध कारित लोग किस प्रकृति के थे। बढ़ते अपराध के लिए इस साइंस के आधुनिकतम रूप की जानकारी होना सभी के लिए बहुत जरुरी है।

यह जानकारी देते हुए देश के जाने-माने फॉरेंसिक साइंटिस्ट डॉ दिव्य किशोर सत्पथी (Dr Divya Kishore Satpathi) ने फारेंसिक साइंस को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस (Forensic Science) की जानकारी वर्तमान समय में समाज की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्य में फॉरेंसिक एक्सपर्ट के तौर पर विख्यात डॉ सत्पथी छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अपने गृह ग्राम तोषगांव आए हुए हैं।

उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि फारेंसिक साइंस की उपयोगिता अपराध जगत के विवेचना के दौरान की जाती है। वे इसके लिए वह एक मुहिम चला रहे हैं और हर स्तर पर लोगों को फारेंसिक साइंस की जानकारी देने की पहल की जा रही है। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा कि फारेंसिक साइंस की जानकारी न होने से कई अपराध छिप जाते हैं।

फारेंसिक साइंटिस्ट डॉ सत्पथी अपने सेवाकाल के दौरान हजारों मृतकों की फॉरेंसिक जांच कर नतीजा निकाल चुके हैं। उनका कहना है कि मेरे सामने तो मुर्दा भी बोलता उसके साथ क्या हुआ था। भोपाल गैस त्रासदी के दौरान भी इनके द्वारा हजारों शवों का परीक्षण किया गया था।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सभी वर्ग अपना फर्ज निभा रहे हैं। लेकिन, अपराधी अपराध को अंजाम दे रहे हैं और अपराध का समाज में सामने आना आवश्यक है, जिसके लिए अपराध से जुड़े हर पहलुओं की जानकारी फारेंसिक साइंस के माध्यम से ही निकाली जा सकती है।

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एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए समाज में सजगता की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सजग समाज में ही अपराध को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ सत्पथी ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान को लेकर काफी प्रचार होना चाहिए, शासन स्तर से इसके लिए विशेष व्यवस्था होनी चाहिए तथा इस विधा से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए।