वरिष्ठ साहित्यकार डॉ पुष्पा रानी गर्ग की 4 कृतियाँ लोकार्पित

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डॉ पुष्पा रानी गर्ग

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ पुष्पा रानी गर्ग की 4 कृतियाँ लोकार्पित

इंदौर नगर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पुष्पा रानी गर्ग की चार कृतियों “तुलसी मानस के अनमोल रत्न” (आलेख संग्रह ),”संस्कृति की वैदेही और अशोक” (ललित निबंध संग्रह),”एक बूंद प्रेम की”(काव्य संग्रह )और “अपने होने का अर्थ” (कविता संग्रह )का लोकार्पण श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति में मुख्य अतिथि डॉ. विकास दवे(निदेशक म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल) के आतिथ्य में‌ और अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार व राष्ट्रीय कवि श्री सत्यनारायण सत्तनजी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय कवि श्री सत्यनारायण सत्तनजी ने अपने उद्बोधन में
डॉ पुष्पा रानी को आधुनिक मीरा की उपाधि देते हुए कहा कि उनकी काव्य में अध्यात्म है ,भक्ति है और रस है। क्योंकि वह ब्रजभूमि से है इसलिए उनके लेखन में संस्कृति भी है। डॉ गर्ग ने मानस के अनमोल रत्न‌ लिखकर लोगों से राम बुलवाने का कार्य किया है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाइयों को संप्रेषित कर समाज को और साहित्य को शब्द रूपी पुष्प छन्द दिए हैं ,उनके ये शब्द रूपी पुष्प पूज्यनीय है ।
डॉ. पुष्पा रानी गर्ग‌ ने कहा “तुलसी मानस के अनमोल रत्न”में मेरे 39 आलेख है , ये सभी श्रेष्ठ पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।”संस्कृति की वैदेही और अशोक में” मेरे 29 ललित निबंध है “एक बूंद प्रेम की” में कोरोना काल के पहले की कविताएं हैं और “अपने होने का अर्थ में , कोरोना काल की कविता है”
ये मेरे शब्द दीपक है जो हमेशा जग को आलोकित करते रहेंगे ।
विशेष रूप से इस कार्यक्रम हेतु अमेरिका से आई पुष्पाजी की सुपुत्री कीर्ति महेश्वरी ने उनका पहला काव्य संग्रह “अपने होने का अर्थ ” की कविता “मेरे सामने शब्द खड़ा था पूछ रहा था अपने होने का अर्थ”,
“जीने की राह”, “एक खिलौना बचपन का “का वाचन किया।दूसरे काव्य संग्रह “एक बूंद प्रेम की ” में से
“जलने दो आग को ” मैं हंँसी बेचती हूंँ।” का सुन्दर वाचन किया।
डॉ. योगेंद्र नाथ शुक्ल ने पुस्तकों की चर्चा करते हुए कहा पुष्पाजी ने शुष्क वृक्ष की शुष्कता में भी भी तरलता देखी है।उनकी रचनाओं में विचार हैं, भाव और कला का अद्भुत समन्वय है। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और हर जगह मानवता मौजूद है। तुलसी के रामचरितमानस में उनकी गहरी आस्था है इसीलिए रामचरितमानस की चौपाइयां का विशद वर्णन कर समाज को सकारात्मक ऊर्जा दी है।
मुख्य अतिथि डॉ विकास दवे ने कहा कि रामचरितमानस की सूक्तियों को रेखांकित कर लोगों तक नैतिक मूल्य पहुंँचाने का सुंदर कार्य डॉ गर्ग ने किया है ।”संस्कृति की वैदेही और अशोक “के सभी ललित निबंध संदेश पूर्ण हैं ।”एक बूंद प्रेम की” काव्य संग्रह प्रेम और जीवन मूल्यों पर केंद्रित है।उनकी “पागल” कविता एक सुंदर संदेश पूर्ण ,मार्मिक कविता है। “अपने होने का अर्थ” में प्रत्येक रचना भारतीय संस्कृति तथा उसके संदेशों से ओतप्रोत है। श्रीमती चित्रा रोबर्ट भारती ने नर्मदा प्रसाद की ललित निबंध संग्रह में लिखी हुई भूमिका पढ़ते हुए कुछ अंशों को उद्रत करते हुए कहा । ” पुष्पा जी के यह निबंध वास्तव में निबंध विद्या को अर्पित ऐसी शब्दांजलि है जिनके अक्षय सौरभ को अपने अक्षय स्वरूप में तब तक विद्यमान रहना है जब तक शब्द है”
सरस्वती वंदना डॉ. पुष्पा रानी गर्ग के सुपुत्र श्री अजय गर्ग
के द्वारा की गई और कार्यक्रम का सुन्दर संचालन सुपुत्री श्रीमति चित्रा रॉबर्ट भारती के द्वारा किया गया।