गेम डिज़ाइनर ‘मोदी ‘ हैं, गेम चेंजर भी मोदी ही हैं

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गेम डिज़ाइनर ‘मोदी ‘ हैं, गेम चेंजर भी मोदी ही हैं

 

विधान सभा चुनावों को लेकर विश्लेषकों,चुनावी पंडितों,एग्जिट पोल के नाम से पोस्टमार्टम करने वाली एजेंसियों और भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलो के नेताओ के अनुमानों को सिरे से ख़ारिज कर दिया।

चुनाव परिणामों के आने के पूर्व भाजपा के नेता परिणामों को लेकर सशंकित थे,एक तरफ़ा परिणामों से उन सबकी बाँछे खिली हुई है,यद्यपि इस जीत का सेहरा तो सब मोदी,शाह,और नड्डा के सिर पर बांध रहें हैं,लेकिन जीत के कारण उनकी योजनाओं विशेष कर मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना को “गेम चेंजर” बताने में या जीत में स्वयं के योगदान का उल्लेख करने में भी राज्य के नेता पीछे नहीं हैं|

 

वर्ष 2018/19 के विधान सभाओं और लोकसभा चुनाव में भी ,गैस के सिलिंडर पर सब्सिडी,किसानों को आर्थिक अनुदान,बिजली बिल्स माफ़ जैसी अनेक योजनाओ के रहते हुए विगत चुनावों में(2018/19) विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के मताधिकार का ट्रेंड अलग अलग रहा,अर्थात राज्य विधानसभा के चुनाव में मतदाताओं ने भिन्न भिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय राज्य नेतृत्व की तुलना करते हुए मतदान किया तो परिणाम भाजपा के केद्रीय नेतृत्व की आशानुकूल नहीं आये।राज्यों में भाजपा को सरकार बनाने लायक़ बहुमत भी नहीं मिल पाया। फलस्वरूप कई राज्यो में कांग्रेस अथवा अन्य दलों की सरकारें बनी।

राज्यों में तो भाजपा को सरकार बनाने लायक़ बहुमत नहीं मिला, (यद्यपि पश्चात भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से प्रभावित होकर भाजपा में सम्मिलित होकर भाजपा की सरकारे बनी) लेकिन अल्पावधि के अंतर में संसद के निर्वाचन के लिए मतदाताओं ने मोदी के नेतृत्व में भरपूर भरोसा प्रदर्शित किया। नतीजा 2014 में 282 सीट्स से 2019 में भाजपा को 303 सीट्स पर विजय श्री प्राप्त हुई ।

हाल ही के 5 राज्यो के चुनाव के लगभग एक वर्ष पहले हिमाचल और कर्नाटक के चुनाव भाजपा ने एक बार फिर राज्य नेतृत्व को महत्व देते हुए चुनाव में जाने का निर्णय किया लेकिन विपक्षी दलों के नेतृत्व की तुलना में भाजपा के राज्यो के नेतृत्व को लगभग सिरे से ख़ारिज कर दिया।

2023 हाल के पाँच राज्यो के चुनाव 2024 में लोकसभा के चुनाव के पूर्व होनेवाले ऐसे चुनाव थे,जिनके परिणाम जनता की नब्ज को पहचानने के लिए महत्वपूर्ण हैं,साथ ही हिमाचल और कर्नाटक में कांग्रेस को सत्ता की कुर्सी प्राप्त होने के और भाजपा की शिकस्त के पश्चात 2024 के चुनावों के मद्दे नज़र भाजपा के लिए उत्तर भारत के प्रमुख हिन्दी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,और राजस्थान के चुनाव जीतना एक चुनौती था,और चुनाव में इस चुनौती को अपने अनुकूल करना भी।,

मोदी ने इन चुनावों में केंद्र की योजनाओ, स्वयं की लोकप्रियता के आधार पर जाने का जोखिम लिया,और संगठन के केंद्रीय नेतृत्व नड्डा ने अमित शाह के मार्ग दर्शन में चुनावों का संपूर्ण संचालन अपने हाथ में ले लियाI

शिवराज सिंह,वसुंधरा राजे और रमन सिंह पूर्व मुख्य मंत्रियों को विशेष महत्व नहीं देकर यह संदेश देना कि सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री का निर्णय पश्चात होगा, और सबसे महत्वपूर्ण प्रधान मंत्री की लोकप्रियता को सामने रखते हुए मोदी के नाम पर मतदाताओं से वोट देने की अपील करना, चुनाव घोषणा पत्र को मोदी की गारंटी से जोड़ना।

संपूर्ण चुनाव प्रचार में मोदी की शतक से अधिक सभायें और रोड शो,अमित शाह और नड्डा के संगठन को सक्रिय करने की जीतोड़ मेहनत और बूथ लेवल तक कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदारी सोंपने से मोदी की चुनाव लड़ने की डिज़ाइन (अभिकल्पना) ने भाजपा की जीत की संभावनाओं को साकार कर दियाI

चुनाव में केंद्र की लोक कल्याणकारी योजनाओं और चुनावों की रणनीति की अभिकल्पना(डिज़ाइन) का आरंभ पूर्व स्थापित प्रक्रियाओं को तिलांजलि देते हुए हुए, पहली बार चुनावों की घोषणा होने के पूर्व हाई कमांड द्वारा अपने सूत्रों से जानकारी प्राप्त कर,प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा,अनेक केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को चुनाव में उतारना,चुनाव संचालन का संपूर्ण नियंत्रण केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अपने पास रखना,

एंटी इनकम्बैंसी की धार को बोथरा करने के लिए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव में जाना, इन योजनाओं से आये परिवर्तन को बार बार दोहराया गया।

मोदी ने इन चुनावों के लिये जो डिज़ाइन तैयार की है,उसमें पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों को सीएम पद के लिये प्रोजेक्ट नहीं किया। मोदी सामान्यतः अपने निर्णयों में परिवर्तन नहीं करते हैं,ऐसी स्थिति में तीनों ही राज्यो में सीएम के लिये नये नाम सामने आयें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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देवेंद्र वर्मा

पूर्व प्रमुख सचिव,

छत्तीसगढ़ विधानसभा