राज-काज: संतोष वर्मा ने बना दिए समाज में बंटवारे के हालात….!

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राज-काज: संतोष वर्मा ने बना दिए समाज में बंटवारे के हालात….!

* दिनेश निगम ‘त्यागी’

संतोष वर्मा ने बना दिए समाज में बंटवारे के हालात….!

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– ब्राह्मण समाज और हाईकोर्ट पर टिप्पणी करने वाले अजाक्स के अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा का आईएएस अवार्ड वापस लेने और पद से हटाने के संबंध में राज्य सरकार ने केंद्र को आग्रह पत्र तो भेज दिया, पर मामला यहीं ठंडा होता दिखाई नहीं पड़ रहा। प्रदेश में सामाजिक सद्भाव न खराब हो और समाज में बंटवारे जैसे हालात न बनें, इसके लिए सरकार को सतर्क रहना होगा। वर्मा की टिप्पणी के बाद ब्राह्मण संगठन गुस्से में थे। समाज के संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव का ऐलान कर दिया था, वर्मा इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे थे। जैसे ही राज्य सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया, अजाक्स, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग संगठन उनके समर्थन में मोर्चा संभालते दिख रहे हैं। आदिवासियों का संगठन जयस इंदौर में बड़ी पद यात्रा निकाल चुका है। भोपाल में अजाक्स ने प्रदर्शन कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। छतरपुर में पिछड़ा वर्ग महासभा ने कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंप कर संतोष वर्मा को न्याय देने की मांग की है। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर भी कह चुके हैं कि संतोष के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हर घर से एक संतोष पैदा होगा। साफ है कि इस मसले को लेकर समाज के अंदर वर्ग संघर्ष के हालात बन सकते हैं, इसे लेकर असंतोष को दबाने और सतर्क रहने की जरूरत है।

 कॉश, पहले जैसा न हो इस ‘बुंदेलखंड पैकेज’ का हश्र….!

– केंद्र में जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी तब उप्र और मप्र के बुंदेलखंड के लिए बड़े पैकेज की घोषणा की गई थी। उम्मीद थी कि इससे अंचल का कायाकल्प होगा, पर नतीजा अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। विकास से ज्यादा चर्चा बुंदेलखंड पैकेज में भ्रष्टाचार की हुई। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खजुराहो से इस अंचल के लिए पैकेज का ऐलान किया है। इसकी घोषणा होते ही पहला सवाल यही उठा कि इसका हश्र भी तो पहले वाले बुंदेलखंड पैकेज जैसा नहीं होगा? हालांकि अधिकाशं की राय इसके विपरीत है। दरअसल, डॉ यादव ने अपने मंत्रियों और अफसरों के साथ दो दिन तक खजुराहो में डेरा डाल कर बुंदेलखंड पर फोकस बनाया। मंत्रिपरिषद की बैठक के साथ यहां कई विभागों की समीक्षा की। केबिनेट में जो निर्णय लिए गए, उसे देख कर ही लगा कि बुंदेलखंड के चौतरफा विकास का प्लान बनाया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से मेडिकल कॉलेजों को लेकर घोषणा हुई। दमोह के लिए सिंचाइ परियोजना स्वीकृत हुई। सागर से दमोह के बीच फोरलेन सड़क के लिए बजट दिया गया। इससे भी आगे बढ़ कर सागर में औद्योगकि पार्क के लिए 24 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च करने की घोषणा की गई। अर्थात, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क और उद्योग सहित प्रमुख क्षेत्रों की ओर ध्यान दिया गया। साफ है कि यह पैकेज बुंदेलखंड की तरक्की के द्वार खोल सकता है।

भाजपा की गुटबाजी पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हेमंत….

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– अपना कार्यभार ग्रहण करने के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी में अनुशासन को लेकर सख्त संदेश दिया था। अनुशासन तोड़ने या पार्टी की छवि खराब करने वाले कुछ छोटे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई जबकि कुछ बड़े नेताओं को समझाइश दी गई थी। सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को एक दूसरे के घर ले जाकर सुलह कराने की कोशिश की थी। पर लगता है वे भाजपा के अंदर गुटबाजी पर अंकुश नहीं लग पा रहे। दमोह के हटा और छिंदवाड़ा के ताजा मामले इसके ताजा उदाहरण हैं। हटा में भाजपा विधायक उमा देवी खटीक ने पार्टी की एक बैठक में अपनी ही सरकार के दो मंत्रियों पर आरोप लगा दिए। प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार के सामने उन्होंने कहा कि जिले के दो मंत्री लगातार उनके विधानसभा क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं। अगर मंत्री हटा में हस्तक्षेप बंद नहीं करते तो वे वहां कार्यालय खोल लें, मैं इस्तीफा दे दूंगी। गुटबाजी किस स्तर तक पहुंच गई है, अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरा, छिंदवाड़ा में जिलाध्यक्ष शेषराव यादव और सांसद बंटी साहू के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। एक आयोजन में शहर भर में पार्टी के बैनर-पोस्टर लगे, उनमें सभी नेताओं के नाम फोटो थे लेकिन सांसद बंटी साहू नदारद थे। हेमंत की कोशिश के बावजूद सागर में गाेविंद- भूपेंद्र के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

 वंदेमातरम पर टिप्पणी करने से बच सकते थे मसूद….

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– जब देश के अंदर वंदेमातरम को लेकर भाजपा- कांग्रेस के बीच बहस छिड़ी है। भाजपा वंदेमातरम के टुकड़े करने के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू को जवाबदार ठहरा रही है। जवाब में कांग्रेस आजादी की लड़ाई में आरएसएस पर अंग्रेजों के साथ खड़ा होने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि वंदेमातरम सबसे पहले कांग्रेस के मंच से ही गाया गया। ऐसे में कांग्रेस के ही विधायक आरिफ मसूद का यह कहना कि वे वंदेमातरम नहीं गा पाएंगे, पार्टी को असहज करने वाला है। आरिफ ऐसा बयान देने से बच सकते थे। वैसे भी आजादी की लड़ाई में हिंदू हों, सिख अथवा मुसलमान, सभी वंदेमातरम गा रहे थे। मुस्लिम समाज को ध्यान में रख कर ही वंदेमातरम के दौ पैरे गाए जा रहे थे। आरिफ कह सकते थे कि यह गाने मेंे उन्हें कोई परहेज नहीं। इसकी बजाय वंदेमातरम न गाने की बात कह कर आरिफ जिन्ना समर्थक मुस्लिमों की कतार में खड़े हो गए। यह ठीक है कि आरिफ को भोपाल मध्य विधानसभा सीट में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट मिलता है लेकिन यदि उन्हें हिंदू समाज वोट न दे तो वे चुनाव नहीं जीत सकते। लगातार दो बार उनकी जीत गैर हिंदू वोटों के कारण ही हुई है। वंदेमातरम पर ताजा बयान देकर वे हिंदू समाज के काेप का भाजन बन सकते हैं। चुनाव में उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्हें ऐसे मसलों पर प्रतिक्रिया देने में सावधानी बरतना चाहिए।

यह एक छात्रा खिलाड़ी नहीं, आम बच्चों की समस्या….

– प्रदेश में छतरपुर जिले के चंदला की एक छात्रा खिलाड़ी की हिम्मत को दाद देना होगी। उसने एक झटके में छात्रों व अन्य लोगों की बड़ी पीड़ा और समस्या का ध्यान सभी की ओर खींच दिया। अवसर था चंदला में आयोजित सांसद खेल महोत्सव का। इसमें खिलाड़ियों और बच्चों को सुबह 9-10 बजे से ही बुला लिया गया था। क्षेत्रीय सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की हैसियत से पहुंचना था लेकिन वे पहुंचे अपरान्ह लगभग 3 बजे। जब वे खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर रहे थे तो एक छात्रा उन पर भड़क गई। उसने कहा कि ‘नमस्ते ठीक है, लेकिन हम इतनी देर से इंतजार कर रहे हैं, हमारे पास इतना फालतू टाइम है क्या? हमारी परेशानी कौन समझेगा?’ छात्रा का अचानक यह सवाल सुन कर सभी दंग और हैरान रह गए। हालांकि शर्मा ने मुस्कुराते हुए खिलाड़ी को दुलार कर समझाया और आगे बढ़ गए। छात्रा खिलाड़ी और सांसद के बीच के इस संवाद का वीडियो जम कर वायरल हुआ। मामला शांत भले हो गया लेकिन यह पीड़ा अकेले एक छात्रा की नहीं बल्कि उन हजारों बच्चों और छात्रों की है, जिन्हें विभिन्न कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत, नृत्य अथवा भीड़ दिखाने के उद्देश्य से बुलाया जाता है लेकिन वे कई घंटे इंतजार में धूप, ठंड और बारिश में खड़े रहते हैं। कॉश, नेता बच्चों की यह पीड़ा समझ पाते!

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