राज-काज: सरकारी कर्मचारियों को राज्य सरकार देगी यह तोहफा….!

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राज-काज: सरकारी कर्मचारियों को राज्य सरकार देगी यह तोहफा….!

* दिनेश निगम ‘त्यागी’

सरकारी कर्मचारियों को राज्य सरकार देगी यह तोहफा….!

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– प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ा कर 65 वर्ष करने की खुसर- फुसर एक बार फिर शुरू हो गई है। फिलहाल प्राध्यापकों और डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु ही 65 वर्ष है। प्रदेश के कर्मचारियों के लिए यह उम्र 62 साल निर्धारित है। केंद्रीय कर्मचारी अब भी 60 साल में रिटायर हाेते हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव से पहले 2018 में यह आयु 62 वर्ष की थी। भाजपा ने 2023 के अपने चुनावी संकल्प पत्र में सेवानिवृत्ति आयु में एकरूपता लाने की बात कही थी। इस आधार पर प्राध्यापकों, डाक्टरों की तरह सभी सरकारी कर्मचारियों को भी 65 साल में रिटायर करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही खबर आई थी कि सरकार सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस दिशा में फिर काम शुरू होने की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री डॉ यादव सरकारी कर्मचारियों को यह तोहफा दे सकते हैं। हालांकि अब इस संदर्भ में दो विचार चल रहे हैं। पक्ष में यह कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से सरकार को आर्थिक रूप से कुछ राहत मिल जाएगी और विरोध इस बात का कि ऐसा करने से रोजगार के अवसर घट जाएंगे।

*0 ऐसा हुआ तो क्या करेंगी नुसरत, सारा जैसी श्रद्धालु….?*

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– पिछले कुछ सालों से समाज के अंदर जो घटित हो रहा है, वैसा कभी देखने को नहीं मिला। इससे भारतीय समाज लगातार बंट रहा है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने की मांग भी इसी दिशा में एक प्रयास है। शाहरुख खान, नुसरत भरूचा, सारा अली खान और सलमान खान जैसे सेलिब्रिटी सहित अनेक श्रद्धालु महाकाल मंदिर सहित कई धार्मिक स्थानों में जाते हैं। श्रद्धा से सिर नवाते हैं। प्रार्थना करते हैं। यदि ऐसे धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा तो दूसरे समाजों, वर्गों के ये श्रद्धालु क्या करेंगे? इस तरह तो हिंदू धर्म संकुचित हो जाएगा। उत्तराखंड सहित कुछ अन्य धार्मिक स्थलों की तर्ज पर उज्जैन में महाकाल मंदिर में भी गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की मांग उठी है। महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी, हिंदू महासभा के साथ अब महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज जूना अखाड़ा ने भी मांग उठाई है कि जिस तरह मक्का-मदीना में हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है, उसी तर्ज पर भारतीय मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगनी चाहिए। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर विक्रम चौधरी ने कहा है कि धर्म क्या होता है, यह आरएसएस नहीं जानती। ये हिंदू धर्म की समग्रता को संकीर्ण अर्थों में डाल देना चाहते हैं। सनातन धर्म के दरवाजे मानवता के साथ पूरे विश्व के लिए खुले हैं। उसमें कभी किसी को गैर हिंदू नहीं माना गया।

*0 एक बार फिर पते की बात कह कर फंस गए कैलाश….*

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– इस सच से कोई इंकार नहीं कर सकता कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पब्लिक लीडर हैं और उनके नाम अनेक सफलताएं दर्ज हैं। विरोधी भी उनकी संगठन क्षमता का लोहा मानते हैं। उनका दूसरा पक्ष यह भी है कि वे खरी-खरी कहने के लिए जाने जाते हैं। इसकी वजह से उन्हें विवादों और विरोध का सामना करना पड़ जाता है। एक बार फिर बच्चों के आचरण और शिक्षा को लेकर दिए एक बयान के कारण वे फिर फंस गए। उन्होंने कह दिया कि यदि कोई पीडब्ल्यूडी मंत्री है और ठेकेदार परिवार को खरीददारी कराने लगे, तो बच्चों से चरित्रवान होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि बच्चे अपना अधिकांश समय घर पर बिताते हैं, माता-पिता का आचरण ही उनके चरित्र निर्माण की नींव रखता है। यदि घर का व्यवहार ही अनुचित होगा तो कोई भी शिक्षा नीति प्रभावी नहीं हो सकती। कैलाश जी ने कुछ गलत नहीं कहा लेकिन उनके बयान को मौजूदा पीडब्ल्यूडी मंत्री से जोड़ दिया गया। कहा गया कि उन्होंने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर हमला बोल दिया। उन्हें सफाई देना पड़ गई। उन्होंने कहा कि मेरी बात को ऐसे प्रस्तुत किया गया, मानो वह किसी व्यक्ति विशेष या विभाग विशेष पर टिप्पणी कर रहे हों। जबिक वे तो बच्चों की परवरिश और नैतिक मूल्यों पर अपनी बात रख रहे थे।

*0 भाजपा का मुकाबला कैसे कर पाएगी ‘अधमरी’ कांग्रेस….*

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– कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में बुलाई गई प्रदेश के नेताओं की बैठक सुिर्खयों में है। विडंबना यह है कि बैठक की चर्चा इसलिए नहीं है कि प्रदेश संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है और उसने प्रदेश की सत्ता में वापसी की उम्मीद कार्यकर्ताओं में जगा दी है, इसके विपरीत प्रदेश नेतृत्व आलाकमान के सामने एक बार फिर एक्सपोज हो गया है। उजागर हो गया है कि विधानसभा चुनाव के दो साल से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस अतंर्कलह से उबर नहीं पाई है। बैठक में पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी तक को प्रदेश में अनुशासनहीनता का मुद्दा उठाना पड़ गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी मान लिया कि प्रदेश के नेता एकजुट नहीं हैं। लिहाजा, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठे और वे खरगे-राहुल के सामने असफल प्रदेश अध्यक्ष साबित हो गए। प्रदेश में संगठन की मजबूती को लेकर बैठक बुलाई गई थी इसिलए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व प्रदेश अध्यख द्वय अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी बुलाया जाना था लेकिन इन्हें पूछा ही नहीं गया। सवाल है कि ऐसी हालत में यह ‘अधमरी’ कांग्रेस मजबूती से पैर जमा कर बैठी भाजपा का मुकाबला कैसे करेगी? वह भी तब जब सरकार के खिलाफ मुद्दों की कमी नहीं है।

*0 प्रदेश भाजपा में कौन होगा हितानंद का उत्तराधिकारी….?*

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– हितानंद की प्रदेश भाजपा से विदाई के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल तेजी से तैरने लगा है कि अब उनका स्थान कौन लेगा? इस दायित्व के लिए कई नाम चर्चा में भी आ गए हैं। इनमें विद्या भारती के संगठन मंत्री मिथलेश माहेश्वरी, भारत भारती के अनिल अग्रवाल, मध्य प्रांत के प्रचारक विमल गुप्ता और मालवा प्रांत के प्रचारक राजमोहन के नाम शामिल हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व की तर्ज पर संघ भी नया नाम लाकर चौंका सकता है। हितानंद को सुहास भगत की विदाई के बाद वर्ष 2022 में प्रदेश भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उहोंने कई उतार-चढ़ाव देखे। एक तरफ भाजपा ने अच्छी सफलता हासिल की। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार लोकसभा की सभी 29 सीटों में जीत दर्ज की। इससे हितानंद की संगठन क्षमता और पार्टी में पकड़ का पता चलता है। तो दूसरी तरफ उनके व्यवहार को लेकर भाजपा के अंदर से ही कई बार आवाजें भी उठीं। संभवत: इसीलिए अच्छी सफलताओं के बावजूद उन्हें संगठन महामंत्री के दायित्व से हटाए जाने की अटकलें लंबे समय से चल रही थीं। अंतत: उन्हें संघ में वापस लेकर मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख बना दिया गया। जब तक नाम तय नहीं होता तब तक छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय संग़ठन महामंत्री अजय जामवाल हितानंद का दायित्व भी निभाएंगे।

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