Gynecologist Dr Priyanka Sharde: शासकीय सेवा से बर्खास्त

99

Gynecologist Dr Priyanka Sharde: शासकीय सेवा से बर्खास्त

HARDA: हरदा जिला अस्पताल में पदस्थ रही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ प्रियंका शारदे को राज्य शासन ने शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस गंभीर प्रकरण के बाद की गई है, जिसमें उन पर प्रसूता महिला के परिजनों से सीजर ऑपरेशन के नाम पर रिश्वत मांगने और अस्पताल परिसर में हंगामा करने के आरोप लगे थे। मामले को गंभीर मानते हुए जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन द्वारा शासन को भेजे गए प्रतिवेदन का सीधा असर अब कार्रवाई के रूप में सामने आया है।
राज्य शासन के इस निर्णय के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रिश्वत और अनुशासनहीनता को लेकर अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। कार्रवाई में भले ही समय लगा हो, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे अंजाम तक पहुंचाया गया है।

▪️क्या है पूरा मामला
▫️यह प्रकरण उस दिन सामने आया था, जब जिला अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता महिला के परिजनों ने डॉ प्रियंका शारदे पर सीजर ऑपरेशन करने के लिए 8 हजार रुपये की मांग करने का आरोप लगाया था। परिजनों का कहना था कि राशि नहीं देने पर महिला को रेफर कर दिया गया। आरोप सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान डॉ प्रियंका शारदे अस्पताल के अंदर हंगामा करते हुए नजर आईं। मौके पर मीडिया के कई प्रतिनिधि मौजूद थे, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम के लाइव वीडियो भी रिकॉर्ड किए। यह वीडियो और खबरें सामने आने के बाद मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।

IMG 20260110 WA0017 1
▪️कलेक्टर के पत्र से तेज हुई कार्रवाई
▫️मीडिया रिपोर्टिंग और सामने आए तथ्यों के आधार पर कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने मामले को गंभीर मानते हुए डॉक्टर को सेवा से हटाने की अनुशंसा के साथ राज्य शासन को पत्र लिखा था। प्रशासनिक जांच और पत्राचार के बाद अब शासन स्तर पर अंतिम निर्णय लेते हुए डॉ प्रियंका शारदे को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
▪️अस्पताल स्टाफ और सोशल मीडिया को लेकर भी सवाल
▫️अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, डॉ प्रियंका शारदे के कार्यकाल के दौरान उनका व्यवहार कई बार विवादों में रहा। स्टाफ के बीच यह चर्चा रही कि उनके रवैये के कारण कर्मचारी असहज महसूस करते थे। इसके अलावा, उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी सवाल उठे थे, जिनमें सरकार, मंत्री और मुख्यमंत्री तक पर टिप्पणियां की गई थीं। विवाद वाले दिन भी नेताओं को लेकर आपत्तिजनक बयान देने की बात सामने आई थी।
▪️प्रशासन का संदेश साफ
▫️इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से यह संदेश साफ गया है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत मांगना, अनुशासनहीनता और सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती देना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। महिला होने या पद की मजबूरी के नाम पर ऐसे कृत्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

▫️हरदा जिला अस्पताल का यह मामला केवल एक डॉक्टर की बर्खास्तगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी भी है। राज्य शासन की कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि देर से ही सही, लेकिन गंभीर मामलों में निर्णय से पीछे नहीं हटा जाएगा।