HC Reprimanded Corporation : जलजमाव को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को लताड़ा!
Indore : बारिश में सड़कों पर होने वाले जलजमाव और बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर नगर निगम ने अभी तक अपना जवाब पेश नहीं किया। हाईकोर्ट के सामने 9 बार यह याचिका लग चुकी है, लेकिन हर बार निगम के वकील खाली हाथ कोर्ट के सामने हाजिर हुए। मंगलवार काे भी निगम का कोर्ट के समक्ष निरुत्तर हाजिर होना भारी पड़ा। लेकिन, इस बार कोर्ट ने निगम आयुक्त को जमकर लताड़ लगाई और जवाब न देने पर 25 हजार की कास्ट लगा दी। जवाब का समय भी तय कर दिया गया। करीब 3 साल पहले यह याचिका दायर की गई थी। पर अभी तक निगम ने कोर्ट में अपना जवाब पेश नहीं किया।
चीफ जस्टिस रवि मलिमठ की अध्यक्षता वाली डिविजन बेंच ने निगम आयुक्त पर 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई। चीफ जस्टिस ने दो साल से जवाब पेश नहीं करने, 9 बार अर्जी लगने पर जवाब के लिए समय मांगने पर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने मौखिक रूप से कहा कि यह क्या लापरवाही है। जनहित से जुड़ी समस्या पर ही जवाब नहीं दिया जा रहा। कोर्ट ने नगर निगम को सख्त लहजे में दो सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए।
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने दायर की। इस याचिका के मुताबिक शहर में प्रति व्यक्ति 280 लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन, ड्रेनेज से निकासी की क्षमता 80 लीटर है। आए दिन सड़कों पर ड्रेनेज का पानी बहता है। स्ट्रॉम वाटर लाइन भी बेतरतीब डाली गई। आधा घंटा बारिश में ही जलजमाव की स्थिति बन जाती है।
खस्ताहाल बायपास को लेकर भी याचिका
मंगलवार को ही बायपास की खराब हालत को लेकर विचाराधीन जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने चीफ जस्टिस रवि मलिमठ की अध्यक्षता वाली डिविजन बेंच के समक्ष अंडरटेकिंग दी कि 3 महीने में बायपास पर हुए गड्ढों का भराव, स्ट्रीट लाइट, क्लीयर विजिबिलिटी सहित अन्य सभी काम पूरे कर दिए जाएंगे।
मातृ फाउंडेशन ने यह याचिका दायर की थी। पूर्व में इसके कॉन्ट्रेक्टर का कॉन्ट्रेक्ट निरस्त कर दिया था। इसके बाद 63 करोड़ में नया कॉन्ट्रेक्टर नियुक्त किया गया था। इसके बाद भी बायपास की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। हर दिन लाखों रुपए का टोल मिलने के बावजूद बायपास पर जगह-जगह गड्ढे हैं। स्ट्रीट लाइट भी जगह-जगह बंद है, जिससे रात में गाड़ी चलाने वालों को भारी परेशानी उठाना पड़ रही है।