मध्य प्रदेश में ‘लापता लेडीज’ का संकट गहरा, 2019-21 में लगभग 1.98 लाख मामले दर्ज; इंदौर में एक पुलिस स्टेशन में अकेले 449 मामले

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मध्य प्रदेश में ‘लापता लेडीज’ का संकट गहरा, 2019-21 में लगभग 1.98 लाख मामले दर्ज; इंदौर में एक पुलिस स्टेशन में अकेले 449 मामले

वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट

इंदौर। मध्य प्रदेश में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने का मामला चिंता का गंभीर विषय बन गया है। वर्ष 2019 से 2021 के बीच प्रदेश में लगभग 1,98,414 महिलाएं और लड़कियाँ लापता दर्ज की गईं, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक बताई जा रही है।
यह चिंताजनक आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा संकलित और सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत डेटा से सामने आया है। इसके अनुसार, उक्त अवधि में 1,60,180 महिलाएँ और 38,234 लड़कियाँ मध्य प्रदेश में गुमशुदा दर्ज की गईं।
स्थिति में सुधार के संकेत अब तक स्पष्ट नहीं हैं। राज्य सरकार द्वारा 30 जून 2025 तक साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 23,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियाँ अब भी एक माह से लेकर डेढ़ वर्ष तक से लापता हैं। कई जिलों में यह संख्या 500 से अधिक है, जिनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर सहित अन्य जिले शामिल हैं।
इंदौर शहर भी इस संकट से अछूता नहीं है। शहर के बाणगंगा पुलिस थाना क्षेत्र में अकेले 449 लापता बच्चों के मामले दर्ज हैं, जो यह दर्शाता है कि केवल एक थाने के दायरे में ही समस्या कितनी गंभीर है।
गृह मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि प्रदेश में हर दिन औसतन दर्जनों महिलाएँ और लड़कियाँ बिना किसी स्पष्ट सूचना के लापता हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, घरेलू हिंसा, सामाजिक दबाव, पुलिस की सीमित संसाधन क्षमता और रिपोर्टिंग में देरी जैसे कारण इस संकट को और गहरा बना रहे हैं।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इन आंकड़ों को “खतरे की घंटी” बताते हुए कहा है कि यह सिर्फ सांख्यिकीय समस्या नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और महिलाओं के मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर संकट है। कई विश्लेषकों का यह भी कहना है कि वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि गुमशुदा मामलों की त्वरित और पारदर्शी जांच, विशेष तलाश अभियान, अंतर-राज्यीय समन्वय और मानव तस्करी में संलिप्त अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि यह बढ़ता संकट रोका जा सके।

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