यहां मरने के बाद भी घर में रहता है इंसान: रोज होता है श्रृंगार, परिवार के साथ रहती है लाश

674

यहां मरने के बाद भी घर में रहता है इंसान: रोज होता है श्रृंगार, परिवार के साथ रहती है लाश

राजेश जयंत

दुनिया के अधिकांश समाजों में मृत्यु को जीवन का अंतिम बिंदु माना जाता है। मृत्यु के बाद शव का अंतिम संस्कार कर संबंधों को विदा दे दी जाती है। लेकिन इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी प्रांत में रहने वाला टोरा जाता समुदाय इस धारणा को पूरी तरह खारिज करता है। यहां मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा का अस्थायी पड़ाव माना जाता है। यही कारण है कि इस समुदाय में इंसान की मौत के बाद भी वह वर्षों तक अपने ही घर में, अपने परिवार के साथ रहता है।

▪️दुनिया का सबसे अनोखा मृत्यु संस्कार

▫️टोरा जाता जनजाति की यह परंपरा पूरी दुनिया में सबसे अनोखी मानी जाती है। यहां न तो शव को तुरंत जलाया जाता है और न ही दफनाया जाता है। मृत्यु के बाद शव को घर में सम्मानपूर्वक रखा जाता है। उसे रोज नए कपड़े पहनाए जाते हैं, साफ-सफाई की जाती है और यदि मृत व्यक्ति महिला है तो नियमित रूप से उसका श्रृंगार भी किया जाता है। यह कोई रहस्यमय या डरावनी परंपरा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था है।

WhatsApp Image 2026 01 05 at 17.45.24

▪️मृत्यु को नहीं मानते अंत, मानते हैं यात्रा का पड़ाव

▫️टोरा जाता समुदाय का विश्वास है कि मृत्यु के साथ आत्मा शरीर नहीं छोड़ती। जब तक विधिवत और भव्य अंतिम संस्कार नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति को पूरी तरह मृत नहीं माना जाता। इस अवस्था को वे बीमार होना या गहरी नींद में होना मानते हैं। इसी कारण परिवार शोक मनाने के बजाय मृत व्यक्ति की देखभाल करता है और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखता है।

▪️परिवार के साथ रहता है शव

▫️मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य शव से बातचीत करते हैं, उसे भोजन परोसते हैं और रोजमर्रा के जीवन में उसकी उपस्थिति को स्वीकार करते हैं। उनके लिए यह भावनात्मक जुड़ाव का समय होता है, न कि भय या दुख का। इस दौरान बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी मृत व्यक्ति को परिवार का सदस्य मानते रहते हैं।

WhatsApp Image 2026 01 05 at 17.45.24 1

▪️शव संरक्षण की विशेष प्रक्रिया

▫️आमतौर पर शव कुछ ही दिनों में सड़ने लगता है, लेकिन टोरा जाता समुदाय इसे सुरक्षित रखने के लिए विशेष विधि अपनाता है। पहले के समय में जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपायों का उपयोग किया जाता था। आधुनिक समय में फॉर्मलिन जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। शव को साफ कमरे में बिस्तर पर सुलाकर रखा जाता है। नियमित सफाई और कपड़े बदलने की प्रक्रिया जारी रहती है।

▪️क्यों टाल दिया जाता है अंतिम संस्कार

▫️टोरा जाता समाज में अंतिम संस्कार को साधारण रस्म नहीं माना जाता। इसे रांबू सोलो नामक भव्य समारोह के रूप में आयोजित किया जाता है। इसमें सैकड़ों मेहमान, पारंपरिक नृत्य, धार्मिक अनुष्ठान और पशु बलि जैसी रस्में शामिल होती हैं। यह आयोजन अत्यंत खर्चीला होता है, इसलिए कई परिवार वर्षों तक इसकी तैयारी करते हैं। इसी कारण शव को तब तक घर में रखा जाता है, जब तक आयोजन की पूरी व्यवस्था न हो जाए।

WhatsApp Image 2026 01 05 at 17.45.25

▪️मा नेने पर्व और लाशों का उत्सव

▫️टोरा जाता समुदाय की सबसे चर्चित परंपरा मा नेने पर्व है। इस पर्व के दौरान हर कुछ वर्षों में पूर्वजों की कब्रें खोली जाती हैं। शवों को बाहर निकालकर साफ किया जाता है, नए कपड़े पहनाए जाते हैं और परिवार के सदस्य उनके साथ समय बिताते हैं। शव के साथ फोटो खिंचवाना, बातचीत करना और सामूहिक आयोजन करना इस पर्व का हिस्सा है। यह पर्व शोक का नहीं, बल्कि सम्मान और स्मृति का प्रतीक माना जाता है।

▪️भूत-प्रेत नहीं, संस्कृति और विश्वास

▫️सोशल मीडिया पर इस परंपरा को अक्सर भूत-प्रेत या रहस्यमय घटनाओं से जोड़कर दिखाया जाता है। वास्तविकता यह है कि इसमें किसी चमत्कार या आत्मा के लौटने का दावा नहीं है। मानवशास्त्रियों के अनुसार यह मृत्यु को देखने का एक अलग नजरिया है, जहां डर नहीं, बल्कि सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव प्रमुख है।

WhatsApp Image 2026 01 05 at 17.59.18

▪️दुनिया के लिए अजीब, उनके लिए सामान्य

▫️जो परंपरा बाहरी दुनिया को विचित्र लगती है, वही टोरा जाता समुदाय के लिए पूरी तरह सामान्य और आत्मीय है। उनके लिए अपनों को सम्मान देना, चाहे वे जीवित हों या मृत, सबसे बड़ा धर्म है।

WhatsApp Image 2026 01 05 at 17.59.19

▪️निष्कर्ष

▫️टोरा जाता समुदाय की यह परंपरा यह सिखाती है कि मृत्यु के बाद भी रिश्ते समाप्त नहीं होते। वे स्मृति, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव के रूप में जीवित रहते हैं। जहां दुनिया मृत्यु से डरती है, वहीं यह समुदाय उसे जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानकर स्वीकार करता है। यही सोच इस परंपरा को रहस्य नहीं, बल्कि मानव संवेदना का अनूठा उदाहरण बनाती है।