
इंदौर जल त्रासदी पर हाईकोर्ट सख्त: दूषित पानी से 4 मौतों की सरकारी पुष्टि, आंकड़ा 15 तक हो सकता है, 200 से अधिक बीमार
इंदौर नहीं, जबलपुर में हुई सुनवाई, अगली पेशी 6 जनवरी को
के. के. झा की विशेष रिपोर्ट
इंदौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली गंभीर बीमारी और मौतों के मामले में शुक्रवार को मध्यप्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। लगभग 15 पेज की इस रिपोर्ट में सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि दूषित पानी पीने से चार लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 200 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 35 मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
यह मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा जब इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी ने जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति से हुई मौतों और बीमारियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
इंदौर नहीं, जबलपुर में हुई सुनवाई
याचिका पर पहली सुनवाई बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई थी। हालांकि, शीतकालीन अवकाश के कारण दूसरी सुनवाई इंदौर के बजाय जबलपुर हाईकोर्ट में हुई, जहां राज्य सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
सरकार द्वारा दाखिल रिपोर्ट में चार मौतों की पुष्टि की गई है, लेकिन साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मृतकों की संख्या 8 से 15 के बीच हो सकती है। इस स्वीकारोक्ति ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।
मुआवजे पर चुप्पी, कोर्ट ने जताई नाराजगी
स्टेटस रिपोर्ट में पीड़ित परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे, चेक वितरण की स्थिति और जिम्मेदार विभागों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या 12 से अधिक बताई जा रही है, लेकिन सरकारी आंकड़े इससे मेल नहीं खा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने इस विसंगति को गंभीरता से लेते हुए मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की है और संकेत दिए हैं कि अगली तारीख पर अधिकारियों से जवाबदेही तय की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, घर-घर सर्वे
भागीरथपुरा क्षेत्र में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। कई लोग अब भी बीमार पाए जा रहे हैं। हल्के लक्षण वाले मरीजों का इलाज घर पर ही किया जा रहा है, जबकि गंभीर मरीजों को एमवाय अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, दूषित पानी से गैस्ट्रो, पीलिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने क्षेत्र में अस्थायी रूप से वैकल्पिक जल व्यवस्था के दावे किए हैं, लेकिन स्थानीय लोग अब भी भय और असुरक्षा के माहौल में हैं।
राजनीति भी गरमाई
जल प्रदूषण और मौतों के मामले को लेकर राजनीतिक तापमान भी बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान को लेकर यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर लापरवाही तथा संवेदनहीनता के आरोप लगाए।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
भागीरथपुरा की यह घटना न केवल शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है, बल्कि नगर निगम, जल प्रदाय विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की कमी पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समय रहते दूषित जलापूर्ति को नहीं रोका गया, जिसके कारण यह त्रासदी सामने आई।
अब पूरे मामले में सभी की निगाहें 6 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हाईकोर्ट के रुख से यह तय होगा कि दोषियों पर कितनी सख्ती होती है और पीड़ितों को कब और कैसे न्याय मिलता है।





