
30 पुरस्कार पाने वाला एक्टिविस्ट अपराधी कैसे: सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की पैरवी
लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जेल में बंदी को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया कि क्या शांतिपूर्ण आंदोलन और हिंसा के खिलाफ अपील को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अपराध माना जा सकता है।
▪️सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
▫️मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना वराले की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष हुई। सोनम वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा और कहा कि हिरासत का आधार ही गलत और असंवैधानिक है।

▪️शांति की अपील को दबाने का आरोप
▫️कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि वांगचुक की जिस स्पीच को हिरासत का आधार बनाया गया, उसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आंदोलन हिंसा, पत्थर या किसी भी हथियार से नहीं होगा। इसके बावजूद अथॉरिटी ने जानबूझकर शांति की अपील वाले हिस्से को नजरअंदाज किया।
▪️वीडियो में साफ दिखती है अहिंसा की बात
▫️अदालत को बताया गया कि उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग में वांगचुक आंदोलन को पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक रखने की बात करते हुए साफ सुने जा सकते हैं। इसके बावजूद उन्हें हिंसा भड़काने वाले व्यक्ति के रूप में पेश किया गया।
▪️अपराधी की तरह पेश करने पर सवाल
▫️याचिका में कहा गया कि सोनम वांगचुक हमेशा हिंसा के विरोध में रहे हैं और उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सुधारों के लिए लगभग 30 सम्मान प्राप्त किए हैं। ऐसे व्यक्ति को अपराधी की तरह दिखाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
▪️हिरासत को लेकर कानूनी आपत्तियां
▫️सिब्बल ने कहा कि वांगचुक की हिरासत में संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हिरासत के स्पष्ट कारण समय पर नहीं बताए गए और यह साबित नहीं किया गया कि उनके कार्यों से राष्ट्रीय सुरक्षा को वास्तविक खतरा था।
▪️प्रशासन का पक्ष पृष्ठभूमि में
▫️प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी और इसी आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई।
▪️मामले का व्यापक महत्व
▫️यह मामला केवल एक व्यक्ति की रिहाई का नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण असहमति और आंदोलन को किस नजर से देखा जाएगा।
▪️अगली सुनवाई
▫️सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है। अदालत हिरासत की वैधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी।
▫️सोनम वांगचुक मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शांतिपूर्ण आंदोलन को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अपराध बनाया जा सकता है। अब इस पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।





