टोल बकाया रहा तो अटकेंगे वाहन के कागज : ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन पर सीधा असर

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टोल बकाया रहा तो अटकेंगे वाहन के कागज : ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन पर सीधा असर

New Delhi: हाईवे पर टोल नहीं देने या भुगतान में चूक करने वालों के लिए सरकार ने सख्त संकेत दिए हैं। अब यह मामला केवल मौके पर जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि टोल भुगतान तकनीकी या जानबूझकर कारणों से नहीं हो पाता, तो वह राशि वाहन के डिजिटल रिकॉर्ड में बकाया (Outstanding Toll) के रूप में दर्ज की जाएगी। इसका सीधा असर वाहन के कागजी काम, आरसी ट्रांसफर और अन्य प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

▪️ क्या है पूरा मामला

सरकार के मुताबिक टोल प्लाजा पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां फास्टैग में बैलेंस नहीं होता, टैग रीड नहीं होता, वाहन गलत लेन से निकल जाता है या तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में वाहन तो निकल जाता है, लेकिन टोल की राशि सिस्टम में वाहन नंबर के साथ दर्ज हो जाती है। यही डिजिटल रिकॉर्ड आगे चलकर “टोल बकाया” माना जाता है।

▪️ डिजिटल रिकॉर्ड बनता है बकाया

सरकार ने साफ किया है कि टोल पर नकद उधारी नहीं चलती, लेकिन कैमरा और फास्टैग सिस्टम हर टोल क्रॉसिंग को रिकॉर्ड करता है। यदि उस समय भुगतान नहीं हुआ, तो वही राशि बाद में वाहन के खाते में बकाया के रूप में दर्ज हो जाती है। यह बकाया तब तक सिस्टम में रहता है, जब तक उसका भुगतान नहीं हो जाता।

▪️ टोल बकाया का सीधा लिंक वाहन दस्तावेजों से

नई व्यवस्था में इस डिजिटल बकाया को वाहन के आधिकारिक रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी वाहन पर टोल बकाया दर्ज है, तो वह जानकारी भविष्य में आरसी, नामांतरण और अन्य सेवाओं के दौरान सामने आ सकती है।

▪️ ट्रांसफर और आरसी से जुड़ी परेशानियां संभव

यदि वाहन मालिक गाड़ी बेचता है या ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है, तो सिस्टम में दर्ज टोल बकाया सामने आ सकता है। ऐसी स्थिति में आरसी ट्रांसफर, नामांतरण या अन्य कागजी प्रक्रिया रोक दी जा सकती है, जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता।

▪️ फास्टैग और कैमरा सिस्टम को बनाया जा रहा है और सख्त

सरकार फास्टैग और नंबर प्लेट पहचान कैमरों के जरिए हर टोल क्रॉसिंग का डिजिटल रिकॉर्ड रख रही है। बार-बार भुगतान में चूक करने वाले वाहनों को सिस्टम में चिन्हित किया जा सकता है, जिससे आगे की प्रक्रियाएं प्रभावित होंगी।

▪️ सरकार की दलील

सरकार का कहना है कि टोल से मिलने वाली राशि सड़कों, पुलों और हाईवे के रखरखाव में खर्च होती है। यदि भुगतान नहीं होता, तो इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे पर पड़ता है। इसलिए डिजिटल बकाया को नजरअंदाज करने की गुंजाइश अब नहीं छोड़ी जाएगी।

▪️ आम वाहन चालकों के लिए साफ संदेश

फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस रखें, सही लेन से गुजरें और भुगतान सफल हुआ या नहीं, यह जरूर जांचें। क्योंकि एक बार सिस्टम में टोल बकाया दर्ज हो गया, तो वह भविष्य में वाहन से जुड़े कागजी काम में अड़चन बन सकता है।

▪️ आगे क्या

सरकार संकेत दे चुकी है कि आने वाले समय में टोल, वाहन और परिवहन विभाग के डेटा को और गहराई से जोड़ा जाएगा, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष साफ है।

अब टोल नहीं देने का मतलब सिर्फ मौके पर बच जाना नहीं है। डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज बकाया आगे चलकर वाहन का पूरा कागजी काम फंसा सकता है।