Nau Narayan and Sapta Sagar Ujjain :अवंतिका नगरी में कोटि तीर्थ नौ नारायण और सप्त सागर–

जिनके दर्शन से नौ गृह शांत होते है और शुभ फल देते हैं .

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अवंतिका नगरी में कोटि तीर्थ नौ नारायण और सप्त सागर—-

भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर अवंतिका नगरी (उज्जैयिनी ) सर्व श्रेष्ठ तीर्थों में से एक है। मध्य प्रदेश के मालवा में उज्जैयिनी नगरी में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है जिसकी अपार महिमा है पुरातन में अवंतिका नगरी उज्जैनी को महाकाल वन के नाम से जाना जाता था जिसका वर्णन अनेक धार्मिक ग्रंथों और स्कंद पुराण में मिलता है, स्वयं भगवान् सदाशिव भगवती उम्र के पूछने पर क्षेत्र का महत्व बताते हैं .उज्जैन को सप्तपुरियों (Sapt Sagar of Ujjain) में से एक कहा जाता है यानी 7 सबसे पवित्र और धार्मिक शहर। उज्जैन में कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।

महाकाल वन में स्थित अवंतिका नगरी सभी तीर्थों में श्रेष्ठ और अनेक पापों का नाश करने वाला है। स्कंद पुराण के अवंती खंड के 36वें अध्याय में इसकी कथा है। इसकी धार्मिक कथा है कि अंधकासुर राक्षस से भयभीत इंद्र और अन्य देवता भगवान महाकाल के पास आए तब भगवान महाकाल ने अपने पैर के अंगूठे के आघात से एक दिव्य सरोवर को प्रकट किया और सभी ने उसमें स्नान करके उनसे अभय वरदान प्राप्त किया। जिस स्थान पर दिव्य सरोवर प्रगट हुआ वह अवंतिका नगरी कोटि तीर्थ के नाम से विख्यात हुआ । इस सर्वश्रेष्ठ तीर्थ में नौ नारायण और सप्तसागर भी विद्यमान है, जिनके दर्शन का महत्व अधिक मास और श्रावण मास में अधिक है।

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oar2🙏जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 - Shree Vaibhav Mahalakshmi Mandir | FacebookAdhik Maas 2023: उज्जैन के नौ नारायण मंदिर में उमड़ रहे भक्त पढ़िए सप्तसागर में क्या करें दान - Adhik Maas 2023 Devotees reach nav narayan temple know what to donate in Saptasagar
नौ नारायण —
नौ नारायण के अति प्राचीन मंदिर यहां पर स्थापित है, जिसमें अनेक नाम और रूप में भगवान विष्णु की मूर्तियां विराजित है। कहते हैं इन नौ नारायण के दर्शन मात्र से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। सभी मंदिर 500 साल से लेकर 1500 सौ साल तक प्राचीन बताए जाते हैं। यहां चार से पांच पीढ़ियों तक पुजारी परंपरा चली आ रही है।
पुराणों में उल्लेख है कि आषाढ़ मास में अधिक मास का आना महत्वपूर्ण है। इस मास में दिया गया दान 3 गुना अधिक फलदायी है। इसमें पहले मास की अमावस्या से दूसरे मास की अमावस्या तक अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास कहते हैं।अधिक मास में सप्त सागर नो नारायण और 84 महादेव के महत्व पुरषोतम मास में उज्जैन की प्रमुख यात्रा–कहाँ स्थित है ये मंदिर —

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१) अनंत नारायण– ढाबा रोड पुरुषोत्तम नारायण हरसिद्धि मंदिर के पास
२) सत्य नारायण — ढाबा रोड
३) पुरूषोत्तम नारायण –हरसिद्धि मंदिर के पास
४) आदिनारायण— सेंट्रल कोतवाली के सामने
५) शेष नारायण— क्षीर सागर के पास
६)पदम नारायण– क्षीरसागर के पास
७) बद्रीनारायण –पानदरीबा बाजार में
८) लक्ष्मीनारायण —गुदरी बाजार
९)चतुर्भुज नारायण— ढाबा रोड
७)चतुर्भुज नारायण के साथ हई–
सूर्यनारायण (सती दरवाजा) और बैकुंठ नारायण (ढाबा रोड) के भी दर्शन भक्तगण कर सकते हैं ।

-अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। इसे मल मास भी कहते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। जब भी अधिक मास होता है तो श्रृद्धालु सप्तसागरों की परिक्रमा जरूर करते हैं, मान्यता है ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अधिक मास भगवान विष्णु से संबंधित है, इसलिए इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है। यहीं कारण है कि अधिक मास में सप्त सागरों की परिक्रमा की जाती है।
इसी के साथ इस क्षेत्र को परमगुह्य क्षेत्र भी माना जाता है.

उज्जैन में की जाती है सप्तसागरों की परिक्रमा

उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर 7 तालाब हैं, जिन्हें सप्त सागर कहा जाता है। वैसे तो यहां प्रतिदिन पूजा-पाठ की जाती है, लेकिन अधिक मास के दौरान एक ही दिन में 7 सप्तसागरों की परिक्रमा करने की परंपरा है। इस दौरान हर तालाब में कुछ खास चीजें चढ़ाई जाती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल मिलते हैं जीवन के सभी कष्ट भी दूर होते हैं।

उज्जैयनी में सप्तसागर के पूजन और दर्शन का भी बहुत अधिक महत्व है।कहते हैं समस्त सृष्टि ही नहीं वरन तीनों लोकों में सिर्फ अवंतिका नगरी( उज्जयिनी) में ही सप्त सागर स्थित है। इसका वर्णन स्कंद पुराण और श्रीपाद श्रीवल्लभ चरित्र (कलयुग की प्रथम पुस्तक) में मिलता है। कहते हैं स्वर्ग लोक से लेकर पाताल लोक तक सप्त सागर के दर्शन मात्र और दान-पुण्य करने से अनेक जन्मों के पुण्य का फल प्राप्त होता है।

१) रुद्रसागर -सप्तसागर के अंतर्गत आने वाले पहले सागर का नाम रुद्रसागर है, जो महाकाल मंदिर और हरसिद्धि मंदिर के बीच स्थित है। भक्त यहां नमक, सफेद कपड़े और चांदी के नंदी अर्पित करते हैं।

२) पुष्कर सागर–   सप्त सागरों में दूसरा है पुष्कर सागर। ये महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर नलिया बाखल क्षेत्र में स्थित है। यहां पीले वस्त्र व चने की दाल चढ़ाई जाती है।

) क्षीरसागर––  नई सड़क पर स्थित है । यहां साबूदाने की खीर और बर्तन चढ़ाने की परंपरा है।

)गोवर्धन सागर—- बुधवारिया में स्थित है . कृष्ण को लाल वस्त्र ,माखन मिश्री, कांसे का दान किया जाता है।

५)विष्णु सागर— अंकपत रोड पर स्थित है .प्राचीन राम जनार्दन के पास स्थित है विष्णु सागर, भक्त यहां पंचपात्र, ग्रंथ, माला आदि चीजें चढ़ाते हैं। पूरा विष्णुपद- आसान ,पुराण, घंटी ,मूर्ति, माला इत्यादि का दानकिया जाता है .

६)पुरुषोत्तम सागर— इंदिरा नगर के नजदीक स्थित है पुरुषोत्तम सागर, यहां चलनी और मालपुआ अर्पित करते हैं।

)रत्नाकर सागर— उज्जैन शहर के लगभग 4 किमी दूर ग्राम उंडासा में  है रत्नाकर सागर। यहां पंचरत्न, महिलाओं के शृंगार की सामग्री और महिलाओं के वस्त्र चढ़ाने की परंपरा है(शिव-पार्वती को संपूर्ण श्रृंगार और वस्त्र दान)

इन सातों सागर के पूजन और दान से अखंड सौभाग्य, सुख- समृद्धि ,संतान- वृद्धि, यश, कुटुंब रक्षा का वरदान प्राप्त होता है इसके जल को बेहद पवित्र और कोटि तीर्थ माना गया है प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से सप्तसागर बेहद सुंदर स्थल है और हर मौसम में सागरों का जल उपलब्ध रहता है। श्रावण मास और अधिक मास में इन तीर्थ के दर्शन का अधिक महत्व है वैसे हमेशा इनके दर्शन हर माह में उपलब्ध रहते हैं। उज्जयिनी नगरी में ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा के द्वारा एक दिन में ही इन सभी तीर्थ के दर्शन और पूजन बड़े ही सुकून और आनंद से किये जा सकते हैं, साथ ही प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के दर्शन का लाभ भी भक्तगण उठा सकते हैं ।अधिक मास भगवान विष्णु से संबंधित है, इसलिए इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है। यहीं कारण है कि अधिक मास में सप्त सागरों की परिक्रमा की जाती है।

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सुषमा व्यास ‘राजनिधि ‘
इंदौर मध्य प्रदेश