
INDORE WATER ISSUE ECHOES IN RAJYA SABHA: इंदौर के दूषित पानी का मामला आज राज्यसभा में गूंजा, एक और मौत के साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 32
वरिष्ठ पत्रकार के के झा की रिपोर्ट
नई दिल्ली/इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल से फैली गंभीर स्वास्थ्य त्रासदी आज देश की संसद तक पहुंच गई। बजट सत्र के दौरान सोमवार को राज्यसभा में इंदौर के दूषित पानी का मुद्दा गूंजा, जहां विपक्षी सांसदों ने शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था की विफलता पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की।
इसी बीच, इंदौर से एक और दुखद खबर सामने आई।भागीरथपुरा क्षेत्र की 65 वर्षीय अनीता कुशवाहा की रविवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई, जिससे इस जलजनित त्रासदी में मरने वालों की संख्या 32 तक पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अनीता कुशवाहा पिछले एक महीने से उल्टी-दस्त और गंभीर संक्रमण से पीड़ित थीं और 28 दिसंबर को उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

दूषित पानी से फैली इस बीमारी ने भागीरथपुरा सहित आसपास के घनी आबादी वाले इलाकों में भय का माहौल बना दिया है। अब तक 1,400 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं, जिनमें से 450 से अधिक मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। हालांकि, तीन मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और वे आईसीयू में हैं।
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि यह संकट पेयजल पाइपलाइन में सीवेज के मिल जाने के कारण उत्पन्न हुआ। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण जल पाइपलाइन के ऊपर होने से यह गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसके चलते सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए।
राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि किसी भी नागरिक को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और यह मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है। वहीं कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता तंत्र की निगरानी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसे हादसे प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं। जल शक्ति मंत्री द्वारा इस मुद्दे पर जवाब दिए जाने की संभावना है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि दो दशकों से सत्ता में रहने के बावजूद राज्य सरकार नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में असफल रही है। विपक्ष ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की है। कुछ नेताओं ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की भी मांग की है।
‘स्वच्छता में नंबर वन’ माने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने न केवल शहर बल्कि पूरे देश में शहरी जल प्रबंधन की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





