
इंदौर का महा-बजट तोहफा: 2360 करोड़ का इंदौर-पिथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, शहर बनेगा सेंट्रल इंडिया का आर्थिक इंजन!
वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट
इंदौर। मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आज भोपाल विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4.38 लाख करोड़ रुपये (4,38,317 करोड़) का बजट पेश किया। यह बजट महिलाओं, किसानों, युवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है, जिसमें कोई नया कर नहीं लगाया गया। इंदौर को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जहां बजट भाषण में शहर का नाम 10 बार लिया गया और हजारों करोड़ के प्रावधानों से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, आईटी और कनेक्टिविटी में क्रांति की उम्मीद जगी है।
इंदौर अब ‘विकसित मध्य प्रदेश’ की अगुवाई करने को तैयार है।
देश की सबसे स्वच्छ नगरी इंदौर को इस बजट में आर्थिक विकास का मजबूत आधार मिला है। सबसे बड़ा तोहफा है इंदौर-पिथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 2,360 करोड़ रुपये का आवंटन। यह प्रोजेक्ट औद्योगिक विकास को नई गति देगा, हजारों रोजगार पैदा करेगा और इंदौर को सेंट्रल इंडिया का प्रमुख आर्थिक केंद्र बना देगा। शहर में पहले से मौजूद मजबूत इंडस्ट्री बेस को और मजबूत करने वाला यह कॉरिडोर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।स्वास्थ्य क्षेत्र में इंदौर को बड़ा अपग्रेड मिला।
स्थानीय मेडिकल कॉलेज (श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में ऑन्कोलॉजी, ऑन्को-सर्जरी, कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी जैसे सुपर-स्पेशलिटी विभाग शुरू होंगे। यह राज्यव्यापी स्वास्थ्य बजट 23,747 करोड़ का हिस्सा है। भगीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में हालिया दूषित पानी से हुई दुर्घटनाओं के बाद यह प्रावधान और भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब इंदौरवासियों को कैंसर और हृदय रोगों के इलाज के लिए अन्य शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

टेक और इनोवेशन के क्षेत्र में इंदौर चमकेगा। राज्य में पांच नए प्लग-एंड-प्ले आईटी पार्क विकसित होंगे, जिसमें इंदौर का पार्क प्रमुख है। इसके लिए 2,300 करोड़ का प्रावधान है। प्रस्तावित गूगल क्लाउड स्टार्टअप हब इंदौर को एआई-आधारित सस्टेनेबल ग्रोथ का केंद्र बनाएगा, जहां स्टार्टअप्स को केंद्रीय भारत में नई संभावनाएं मिलेंगी।
इंदौर और उज्जैन को बजट में खास महत्व दिया गया, खासकर 2028 के सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए। कुल 13,851 करोड़ के सिंहस्थ पैकेज में इंदौर-उज्जैन छह-लेन हाईवे को गति मिलेगी (लागत में 1,164 करोड़ से अधिक का हिस्सा)। साथ ही इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे और उज्जैन बायपास (701 करोड़) जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इससे तीर्थयात्रा, दैनिक आवागमन और पर्यटन में क्रांति आएगी, यात्रा समय कम होगा और दोनों शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उज्जैन के लिए सिंहस्थ पर अलग से 3,600 करोड़ का फोकस धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाएगा।
अर्बन मोबिलिटी में ग्रीन क्रांति आएगी। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में कुल 472 ई-बसें चलेंगी (972 ई-बसों की मंजूरी में से), जो 21,561 करोड़ के अर्बन डेवलपमेंट बजट का हिस्सा है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट के लिए 300 करोड़ से अधिक का प्रावधान स्मार्टर, हरित और अधिक रहने लायक शहर सुनिश्चित करेगा।
राज्यव्यापी स्तर पर महिलाओं के लिए 1.27 लाख करोड़ के स्कीम्स में लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ शामिल हैं, जो इंदौर की परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे। किसानों को एक लाख सब्सिडाइज्ड सोलर पंप और 25,000 करोड़ के किसान लोन मिलेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर में रोड रिपेयर के लिए 12,690 करोड़ और ग्रामीण सड़कों के लिए 21,630 करोड़ का आवंटन इंदौर के आसपास के क्षेत्रों को फायदा पहुंचाएगा।
11.14 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के लक्ष्य के साथ यह बजट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि ‘विकसित मध्य प्रदेश’ की स्पष्ट ब्लूप्रिंट है। इंदौर और उज्जैन को केंद्रीय भूमिका देकर सरकार ने शहर की महत्वाकांक्षाओं को नई उड़ान दी है। स्थानीय उद्यमी उत्साहित हैं — “यह नौकरियां, बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक उछाल लाएगा,” एक युवा उद्यमी ने कहा। इंदौर अब विकास की नई गति से आगे बढ़ रहा है!





