सैकड़ों रहस्यों से भरा है भारत का ये किला, 400 साल पुराना है इसका इतिहास

सैकड़ों रहस्यों से भरा है भारत का ये किला, 400 साल पुराना है इसका इतिहास

मीडियावाला.इन।

 हमारे देश में प्राचीन काल के तमाम किले  और इमारतें  मौजूद है. इन सभी इमारतों को उनके अलग-अलग रहस्यों की वजह से जाना जाता है. आज हम आपको जिस किले के बारे में बताने जा रहे हैं वह भी तमाम रहस्यों  से भरा हुआ है. दरअ्सल, ये किला है गोलकोंडा का का किला . जो तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित है जिसे हैदराबाद के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाता है. यह किला देश की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में से एक हुसैन सागर झील से लगभग नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

यही नहीं ये क्षेत्र के सबसे संरक्षित स्मारकों में से एक है ये किला. कहा जाता है कि इस किले का निर्माण कार्य 1600 के दशक में पूरा हुआ था, लेकिन इसे बनाने की शुरुआत 13वीं शताब्दी में काकतिया राजवंश ने की थी. इस किले को अपनी वास्तुकला, पौराणिक कथाओं, इतिहास और रहस्यों के लिए आज भी जाना जाता है. इस किले के निर्माण से एक रोचक इतिहास जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि एक दिन एक चरवाहे लड़के को पहाड़ी पर एक मूर्ति मिली. जब उस मूर्ति की सूचना तत्कालीन शासक काकतिया राजा को मिली तो उन्होंने उसे पवित्र स्थान मानकर उसके चारों ओर मिट्टी का एक किला बनवा दिया,

जिसे आज गोलकोंडा किला के नाम से जाना जाता है. ये किला 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है. इस किले में आठ दरवाजे और 87 गढ़ हैं. इस किले के मुख्य दरवाजे का नाम फतेह दरवाजा है. जो 13 फीट चौड़ा और 25 फीट लंबा है. इस दरवाजे को स्टील स्पाइक्स के साथ बनाया गया है जो इसे हाथियों के हमले से सुरक्षित रखते थे. इस किले की शानदार भव्यता का अंदाजा आप यहां का दरबार हॉल देख कर ही लगा सकते हैं, जो हैदराबाद और सिकंदराबाद के दोनों शहरों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है. यहां पहुंचने के लिए एक हजार सीढियां चढ़नी पड़ती हैं.

इस किले को इस तरह से बनाया गाय है कि जब कोई किले के तल पर ताली बजाता है तो उसकी आवाज बाला हिस्सा गेट से गूंजते हुए पूरे किले में सुनाई देती है. इस जगह को 'तालिया मंडप' या आधुनिक ध्वनि अलार्म भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि किले में एक रहस्यमय सुरंग भी है, जो किले के सबसे निचले भाग से होकर किले के बाहर निकलती है. ऐसा कहा जाता है कि इस सुरंग को आपातकालीन स्थिति में शाही परिवार के लोगों को सुरक्षित बाहर पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि वर्तमान में ये सुरंग समाप्त हो गई है.

Catch News

0 comments      

Add Comment