विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान मणिपुर की लोकताक झील में

विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान मणिपुर की लोकताक झील में

मीडियावाला.इन।

इम्फ़ाल: विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान मणिपुर की लोकताक झील में है, यह जानकारी आपके लिए निःसंदेह चौंकाने वाली होगी।लोकताक झील भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित मणिपुर राज्य की एक मीठे पानी वाली झील है जो इम्फ़ाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 45 किमी दूर है। दिल्ली व देश के अन्य प्रमुख एयरपोर्ट से इम्फ़ाल के लिए सीधी फ़्लाइट मिल जाती है। यह अपनी सतह पर तैरते हुए वनस्पति और मिट्टी से बने द्वीपों के लिये प्रसिद्ध है, जिन्हें "कुंदी" कहा जाता है। 

झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 280 वर्ग किमी है। यह झील मणिपुर के चुडाचांदपुर जिले में स्थित है। यह मणिपुर का सबसे बड़ा जिला है। झील पर सबसे बड़ा तैरता द्वीप "केयबुल लामजाओ" कहलाता है और इसका क्षेत्रफल 40 वर्ग किमी है। यह संगइ हिरण का अंतिम घर है।संगइ या Eld's deer या Sangai (Rucervus eldii eldii) भारत के मणिपुर राज्य का राज्य प्रतीक और एक संकटग्रस्त प्रजाति का हिरन है। यह केवल मणिपुर के केयबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान में ही पाया जाता है।

इस कुंदी को 28 मार्च 1977 को केयबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भारत सरकार ने एक संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया था और यह विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है।यह विष्णुपुर जिले में आता है।लोकताक झील मणिपुर के लिये बहुत आर्थिक व सांस्कृतिक महत्त्व रखती है। इसका जल विद्युत उत्पादन, पीने और सिंचाई के लिये प्रयोग होता है। इसमें मछलियाँ भी पकड़ी जाती हैं।मणिपुरी भाषा में "लोक" का अर्थ "नदी या झरना" और "ताक" का अर्थ "अंत" होता है। RB

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