सर्दियों में फिर कहर बरपा सकता है कोरोना वायरस, सामने आई ये वजह, विशेषज्ञों ने दी लोगों को अहम सलाह

सर्दियों में फिर कहर बरपा सकता है कोरोना वायरस, सामने आई ये वजह, विशेषज्ञों ने दी लोगों को अहम सलाह

मीडियावाला.इन।

Corona virus: चीन के वुहान शहर से पिछले साल दिसंबर में निकला कोरोना वायरस अब तक पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है. इस जानलेवा वायरस  से अब तक तीन करोड़ 95 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित  हो चुके हैं. इनमें से 11 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. बावजूद इसके कोरोना का कहर अभी भी शांत नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में एक बार फिर से कोरोना विकराल रूप ले सकता है.

दरअसल, बढ़ते प्रदूषण के चलते कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ने की आशंका है. क्योंकि भारत की राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में लॉकडाउन  के दौरान पर्यावरण बिल्कुल साफ हो गया था, लेकिन कुछ महीने बीतने के बाद एक बार फिर से दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में लोगों को सांस और फेंफड़ों से संबंधित परेशानियों का एक बार फिर से सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में विशेषज्ञों ने लोगों को सर्दी के मौसम में सतर्क रहने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि हवा में प्रदूषण का ज्यादा स्तर कोविड-19 (कोरोना वायरस) के प्रभाव को ज्यादा बदतर कर सकती है.

वहीं पर्यावरण व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खासतौर पर कोविड-19 के हमले की चपेट में आने की सबसे ज्यादा संभावना वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है. क्योंकि हवा में मौजूद प्रदूषण की पुरानी बीमारी का संबंध गंभीर संक्रमण और ज्यादा मौत से होता है. ऐसे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय तक मास्क का प्रयोग करने की सलाह भी दी गई है. साथ ही लोगों से कहा गया है कि जबतक बहुत जरूरी ना हो तकतक घरों से बाहर ना निकलें. विशेषज्ञों का कहना है कि सांस और फेंफड़ों से पीड़ित लोगों को प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सिकुड़न महसूस हो सकती है. जो कोविड-19 की चपेट में आने पर न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकती है.

जलवायु के क्षेत्र में काम करने वाले ग्रीनपीस इंडिया के अविनाश चंचल का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यह खतरा संक्रमण की गंभीरता और इसके दूसरों में फैलने यानी दोनों ही तरह से बढ़ जाता है. उनका कहना है कि शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण को उस मैकेनिज्म से जुड़ा हुआ माना है, जो हमारी प्रतिरक्षक क्षमता को घटाते हैं, क्योंकि इससे हमारे श्वसन मार्ग, पलकों और त्वचा की रक्षक परत को नुकसान पहुंचता है. कोविड-19 के मरीजों में मिले ताजा सबूत वायु प्रदूषण के हालात में ज्यादा खतरनाक होने का संकेत देते हैं.

Catch News

0 comments      

Add Comment