
Kabitt:आइये कैथ का मैथ्स समझते हैं ..
कैथ, कैथा या कबीट वैसे तो एक जंगली फल है किन्तु यह भोजन का स्त्रोत भी है और बहुमूल्य औषधि भी।
कैथ या कबीट के पेड़ सतपुड़ा के जंगलो में पाए जाते हैँ, जो कटीले और मरुस्थलीय अनुकूलन लिए दुर्गम स्थानों पर भी डटे रहते हैँ। इसके फलों का स्वाद खट्टा मीठा होता है, और ये गर्मियों में पकते हैँ। गाँव देहातों में इसके फल के गूदे से स्वादिष्ट चटनी तैयार की जाती है, जिसे सम्पूर्ण भोजन के साथ या रोटी के साथ ग्रहण किया जाता है। इसकी पत्तियों को ध्यान से देखने पर एक विशिष्ट पैटर्न दिखाई देता है, जिससे लोगों को 9 या 12 पत्तियों के सामान बेलपत्र होने का भ्रम होता है। ऐसा ही भ्रम नारिंजिया कि पत्तियों को लेकर भी होता है, जो वास्तव में माहबिल्व पत्र कहलाता है।
कैथा की चटनी:
कैथा की खट्टी-मीठी और चटपटी चटनी बनाने के लिए इसके पके हुए गूदे को निकालें और मिक्सर जार में हरा धनिया, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, काला नमक और थोड़ा सा गुड़ अवश्यक्तानुसार पानी मिलाकर पीस लें। इसे समोसे कचोरी जैसे नाश्ते के साथ और सादे भोजन के साथ भी परोस सकते हैँ।
इसे #कैथ, #कबीट, #कैथा या #हाथीफल के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो यह सम्पूर्ण भारत मे पाया जाता है, किन्तु अब इनकी संख्या सीमित ही रह गयी है। देखने मे इसके फल जरूर बेल के फलों के समान दिखाई देते हैं। किंतु स्वाद में अंतर होता है। गुणधर्म काफी हद तक बेल से मिलते जुलते ही हैं।
बेल के समान ही इसका प्रयोग पेट के विकारों में जैसे मरोड़, कब्ज, दस्त, अतिसार, आंव, खूनी आंव आदि के घरेलू उपचार में किया जाता है। इसका शर्बत बनाकर पीने से गर्मी में या लू में भी फायदा मिलता है। विटामिन C से भरपूर होने के कारण पाचक भी होता है। कच्चे फल के अधिक सेवन से गला रुंध (बैठ) जाता है, और खांसी भी हो सकती है। किंतु पके हुए फलो को खाने में कोई नुकसान नही है। अगर फल कच्चा या अधपका है तो फिर इसे आग में भूनकर खाना चाहिए, ऐसा करने से इसके औषधीय गुण और अधिक बढ़ जाते हैँ।

हाथियों के या गणेश जी के प्रिय होने के कारण इसे हाथी फल या #elephant_apple कहा जाता है। गुरुदेव Deepak Acharya जी, ने एक बार जंगल यात्रा के समय बताया था कि हाथी इसे साबुत ही निगल जाते हैं, और साबुत ही मल के साथ शरीर से बाहर निकाल भी देते हैं, किन्तु सबसे कमाल कि बात तो यह है कि इसके भीतर का सम्पूर्ण गूदा गजराज महाराज की आहार नाल में ही अवशोषित हो जाता है, जिससे यह बाहर निकलने के उपरांत पूरी तरह खाली हो जाता है।
बहुत कम लोग जानते हैँ कि इसके पके हुए फल का पाउडर फेस पैक बनाने के काम आता है, इसके अलावा फल के गूदे से मसूड़ों को मजबूती प्रदान करने वाला मंजन बनाया जाता है। छिलके की राख करंज तेल के साथ त्वचा रोगों में उपयोगी है। पत्तियों के रस का प्रयोग उल्टी और हिचकी रोकने के लिए लाभकारी है।
गर्मी के मौसम में इसके गूदे का शर्बत बनाया जाता है, जो कि बेहद स्वादिष्ट होता है। पके हुए फल को सीधे खाया भी जा सकता है, किन्तु अगर आपके पास फल अधिक है तो इसकी चटनी बनाये, यह भी बहुत स्वादिष्ट होती है।
इसके धार्मिक महत्व को दर्शाने के लिये गणपति जी की वंदना से कुछ लाईने अर्थ सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमे कैथ फल/ #कपित्थ का वर्णन ह, आनंद उठाइयेगा…
गजाननं भूतगणाधिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकम् नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
(गज-आननम् भूत-गण-अधिसेवितम् कपित्थ-जम्बू-फल-चारु-भक्षणम् उमा-सुतम् शोक-विनाश-कारकम् नमामि विघ्नेश्वर-पाद-पङ्कजम्।)
हाथी के मुख वाले, भूत-गणों के द्वारा सेवित, कैथ एवं जामुन का चाव से भक्षण करने वाले, शोक (दुःख या कष्ट) के नाशकर्ता, उमा-पुत्र का मैं नमन करता हूं, विघ्नों के नियंता श्री गणेश के चरण-कमलों के प्रति मेरा प्रणमन । भूतगण = भगवान् शिव के अनुचर । गणेश को मोदकप्रिय (लड्डुओं के शौकीन) तो कहा ही जाता है, इस श्लोक से प्रतीत होता है कि उन्हें कैथ तथा जामुन के फल भी प्रिय हैं ।
यह जानकारी आपको कैसी लगी बताइयेगा
धन्यवाद 
डॉ विकास शर्मा
वनस्पति शास्त्र विभाग
शासकीय महाविद्यालय चौरई
जिला छिंदवाड़ा (म. प्र.)





