कदमताल "

कदमताल "

मीडियावाला.इन।

 

" मम्मा........... दादा जी को छींकें आ रही है।" छह वर्ष की पोती शिवानी आवाज लगाती दौड़कर किचेन में गई । उसे यह पता है कि सर्दी, जुकाम, खाँसी और बुखार कोराना महामारी के लक्षण हैं। यह सब उसके किंडर गार्टन में टीचर ने सभी बच्चों को समझाया है, और यह भी कि कोराना से कैसे बच कर रहना है । 

थोड़ी ही देर में ऋतु शिवानी के पीछे-पीछे आ गई, " क्या हुआ दादा जी आपको कहते।"

" कुछ नहीं बहू, अभी थोड़ी देर पहले 'नीबू पानी' पिया था, इससे छींकें आई हैं। मैं बिल्कुल ठीक हूँ, कुछ नही हुआ है मुझे । शिवानी बेकार क्यों मम्मा को परेशान कर दिया सबेरे-सबेरे।"

" दादा जी पर आपको छींक आये तो ऐसे नहीं छींकना है । ऐसे तो आपके मुँह से निकले कीटाणु आस-पास फैल जायेंगे । आपकेा इस तरह से छींकना चाहिए, शिवानी ने अपना दाहिना हाथ उठाकर कोहनी से कंधे तक की बांह को मुँह के पास लाकर 'डेमो' दिया। ऐसे छींकने से मुँह से निकले कीटाणु कुर्तें की बाँह पर गिरेंगे, और कुर्ते को साबुन से धोने पर कीटाणु नष्ट हो जायेंगे।"

" हाँ बेटे ! अब याद रखूँगा, जैसा तुमने करके दिखाया है वैसा ही करने की आदत डाल लूँगा ।" दादा जी ने बच्चों की ही तरह अपनी बात कहते हुए हाँ में हाँ मिलाई ।

फिर पचहत्तर वर्षीय दादा जी धीरे-धीरे चलते हुए, ड्राइंग रूम में पड़े सोफा पर जाकर बैंठ गए और टी.वी. का रिमोट उठा न्यूज चैनल लगा लिया । तन्मयता से खबरें देखते-देखते कब उनकी अंगुलियाँ नथुनों में से नाक निकालने लगीं उन्हें पता ही नहीं चला। बीच-बीच में सोफा कवर से अंगुलियों को साफ भी करते जाते । शिवानी, जो अभी तक अपनी ड्राइंग बनाने में मशगूल थी, जैसे ही उसने सिर उठाया तो दादा जी की नाक की सफाई देख, फिर किचेन की ओर भागी।

"मम्मा ......... दादा जी अपनी नाक सोफा से पोंछ रहे हैं।" वह जबरजस्ती मम्मा को खींचते हुए ड्राइंग रूम में ले आई ।

दादा जी थोड़ा झेंपते हुए बोले, "ये शिवानी बिटिया बड़ी शरारती हो गई है।"

मुस्कराते हुए ऋतु ने कुछ टिशू पेपर दादा जी के बाजू में रख दिए और वापस किचेन की ओर मुड़ गई ।

"दादाजी यदि कोरोना के कीटाणु आपकी नाक में रहे होंंगे तो वे अब सोफा कवर में चिपक गए होंगे। अब जो भी कोई वहाँ बैठेगा, उससे ये कीटाणु चिपक जायेंगे।"

दादाजी हमारी टीचर मैडम कहती हैं कि जब कभी नाक साफ करना हो तो या तो टिशू पेपर से साफ कर उसे डस्टबिन में फेकना चाहिए अथवा रूमाल से साफ कर उसे वाशिंग में डालना चाहिए । फिर तुरंत साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने चाहिए।

" दादाजी............ आपको साबुन से हाथ धोने का सही तरीका पता है ? नहीं, ना। तो चलिये बाथरूम में, मैं आपको सिखाती हूँ । उठिये............ "

"अरे! शिवानी बेटे, अभी न्यूज देखकर उठूँगा, तब सिखा देना।"

"नहीं...नहीं.... दादा जी आपको अभी चलना पड़ेगा।"

हाथ खींचते हुए शिवानी, दादाजी को बाथरूम तक घसीट कर ले आई ।

"देखिये, सबसे पहले लिक्विड सोप को हथेली पर डाला, अब दोनों हथेलियों को आगे-पीछे कलाई तक खूब मलना है। अंगुलियों के बीच वाली जगह को भी। फिर नल चालू करके बीस सेकेन्ड तक पानी से हाथों धोते रहना है। हमारी टीचर मैडम ने बताया है कि 'हैप्पी बर्थ डे टू यू" वाला गाना दो बार गायेंगे तो बीस सेकंड पूरे हो जाते हैं । दादाजी, इस तरह से हाथ धोने से कोराना की कीटाणु मर जाते हैं।"

अपने दिये गए डैमों के बाद शिवानी ने दादाजी से दो बार रिहर्सल करवाई । 

अभी दादाजी मंद-मंद स्मित विखेरते हुए नाश्ते के लिए डायनिंग टेबुल पर आकर बैठे ही थे कि शिवानी के डैडी जयंत बाजार से बे्रड, दूध, फल और सब्जियाँ लेकर आ गये। सभी चीजों को बाहर दरवाजे पास छोड़ा और सीधे बाथरूम में घुस गये । 

दादाजी ने यह सोचकर कि इन्हें किचेन में रख देना चाहिए तो बहू आराम से जमा लेगी, सामान उठाया ही था कि, शिवानी दौड़ती हुए आई, "दादाजी अभी इन्हें उठाना नहीं है, यही पड़ा रहने दीजिए। डैडी नहाकर आयेंगे तो इन्हें पहले स्टरलाइज करेंगे । इन पर कोरोना के कीटाणु लगे हो सकते हैं। आपने देखा नहीं, डैडी ग्लब्ज पहनकर इन्हें लाये थे । फल और सब्जियों को गरम पानी में सिरका डालकर धोयेंगे ताकि कोरोना के कीटाणु नष्ट हो जायें ।

अब आपने बिना ग्लब्ज पहने इन्हें छू लिया है, तोबताइये कि आपकेा क्या करना है।"

"दो बार हैप्पी बर्थ डे................ वाली बात।" दादा जी ने हँसते हुए उत्तर दिया। "यू आर हंड्रेड परसेंट करेक्ट, तो चलिए सीधे बाथरूम में।" शिवानी ने दादाजी से कहा । 

जयंत नहा कर निकला तो उसने मोबाइल, वालेट, क्रेडिट कार्ड तथा कार की चाबियों को सेनेटाइज किया, फिर बाहर जाकर कार की सीट, स्टेयरिंग तथा गेट पर सेनेटाइजर से स्प्रे किया ।

उसके अंदर आते ही शिवानी ने याद दिलाया "डैडी .... हैप्पी बर्थ डे....... टू टाइम्स।" जयंत मुस्कराते हुए हाथ धोकर आया तो सभी लंच के लिए बैठे। 

"दादाजी, आपको पता है, हमारे लिए एक 'गुड न्यूज' है और एक 'सैड न्यूज'। शिवानी ने दादाजी की ओर देखते हुए कहा।"

दादाजी ने आँखें फैलाते हुए कंधे उचकाये तो शिवानी खिलखिला उठी। "सुनिये, गुड न्यूज है कि, अभी हमारा किंडर गार्टन और डैडी का ऑफिस अगले महीने भी बंद रहेंगे। डैडी घर से ही ऑफिस का काम करेंगे। है न खुशी की बात ?"

"हाँ ये तो बहुत खुशी की बात है कि शिवानी भी घर पर रहेगी और उसके डैडी भी। पर सैड न्यूज कौन सी है?" दादाजी ने बच्चों की तरह जिज्ञासा व्यक्त की ।

"मै बहुत सैड हूँ। अगले हफ्ते मेरा बर्थ डे आ रहा है और कोई भी मेरे फ्रेेंड्स नहीं आ पा रहे हैं । मैं अपनी बेस्ट फ्रेन्ड डायना को भी मिस करूंँगी। बर्थ डे के लिए मैंने जो "हैलो किट्टी थीम" बनाई है, वो भी बेकार हो गई, है ना मम्मा..........।"

"शिवानी, कोरोना की वजह से अभी कोई भी किसी के घर आ-जा नहीं सकता। तुम्हारे फ्रेंड्स जरूर नहीं आ पायेंगे। पर हम लोग पूरे धूम-धाम से बर्थ-डे सेलिब्रेट करेंंगे।  तुम्हारी "हैलो किट्टी थीम" पर डेकोरेशन भी करेंगे। डैडी ने आनलाइन आर्डर कर दिया है। आज या कल में कूरियर आ जायेगा।" ऋतु ने प्यार से शिवानी को समझाया । 

खाना खाने के बाद जयंत आराम करने चला गया, तभी दरवाजे की घंटी बजी। दादाजी ने उठकर दरवाजा खोला तो कूरियर वाले ने उन्हें पार्सल पकड़ा दिया। पार्सल लेकर वे मुड़े ही थे कि शिवानी दौड़ी हुई आई, "अरे दादाजी ऐसे पार्सल नहीं लेना था, जल्दी नीचे रख दीजिए, उस पर कोरोना के कीटाणु लगे हो सकते हैं। आपकेा बिना मास्क लगाये डिलीवरी बॉय के इतने नजदीक भी खड़ा नहीं होना था। प्रधान मंत्री जी की 'दो गज दूरी' वाली बात भूल गए क्या ? डैडी हमेशा मास्क लगाकर और ग्लव्ज पहनकर ही कूरियर पार्सल छूते हैं, आपने तो बिना ग्लब्ज के ही छू लिया। अब बताइये आपको क्या करना चाहिए?"

"बाथरूम में जाकर "दो बार हैप्पी बर्थ डे................ ।"

दादाजी के इतना कहते ही शिवानी चहक उठी, "वन हड्रेड परसंेट करेक्ट।"

दादाजी जब हंसते हुए बाहर आये तो शिवानी उन्हें ड्राइंग रूम में ले आई। " दादाजी यहाँ बैठिए । आज आप हमारे किंडर गार्टन के किड है और मैं टीचर ....लीसा मैडम।"

"गुड मार्निंग किड्स ! हैलो गाइज, क्या तुम्हें पता है कि कोराना से बचने के लिए 'मास्क' लगाना कितना जरूरी है। नही ंना, तो ध्यान से सुनों । जब हम कुछ बोलते हैं तो मुँह से हवा के साथ बहुत बारीक ड्रापलेट्स यानी इतनी महीन बँूदें, जिन्हें हम देख भी नहीं सकते निकल कर एक मीटर की दूरी तक गिरते हैं । अगर सामने कोई दो गज की दूरी पर नहीं खड़ा है और बिना मास्क के है तो ये कण उसके साँस के साथ उसके शरीर के अंदर चले जायेंगे। यदि मास्क से नाक और मुँह दोनो अच्छी तरह ढके हों तो कोराना के कीटाणु मास्क की ऊपरी सतह पर ही रूक जायंेगे।"

टीचर बनी शिवानी के आत्म विश्वास से भरपूर धाराप्रवाह उपदेश पर उपदेश जारी थे। और इधर दादाजी कल्पना लोक में खो चुके थे। मन ही मन वे सोचने लगे कि आज के समय के इन छोटे-छोटे बच्चों को कितना ज्ञान बांटा जा रहा है इनके स्कूलों में? सच ही कहा गया है कि, एक अच्छा टीचर भावी पीढ़ी को तैयार करने का सशक्त माध्यम है। टीचर की समझाई बात किस तरह बच्चों के मस्तिष्क में पत्थर की लकीर की भाँति अंकित हो जाती है। सामाजिक परिवर्तन के माध्यम तो बस शिक्षा और शिक्षक ही हो सकते हैं। 

" दादाजी आप सो गये हैं क्या? शिवानी ने जब उन्हें झकझोरा, तो उन्होंने दाएं-बाएं सिर हिलाया और हँस दिये । 

दादाजी के अनुभव भरे दिमाग में पोती शिवानी ने एक हलचल सी मचा दी थी । उनके भीतर एहसास जाग उठा था कि नये सामाजिक परिवर्तनों से दोस्ती करके उनके साथ कदमताल न किया तो नये ज्ञान, और नई समझ से वंचित रह जाना पड़ सकता है । 

 

   

 

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डॉ. आर.एस. खरे

डॉ. आर.एस. खरे

जन्म तिथि- 15.04.1951

जन्म स्थान- टीकमगढ़ (म.प्र.) 

शिक्षा- एम.एस.सी. (वनस्पति विज्ञान)

एम.एड., पी.एच.डी. (शिक्षा)

शासकीय सेवा के प्रारंभिक वर्षों में व्याख्याता पद पर, तत्पश्चात् म.प्र. लोक सेवा आयोग से चयनित होने पर विभिन्न आदिवासी जिलों- सीधी, बैतूल, धार, झाबुआ, बस्तर, सरगुजा, इंदौर में जिला संयोजक, सहायक आयुक्त, उपायुक्त,

अपर आयुक्त आदिवासी विकास भोपाल के पद से अप्रैल 2011 में सेवा निवृत्त

एक वर्ष नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अपर संचालक पुनर्वास के पद पर संविदा नियुक्ति

2012 से 2017 पाँच वर्ष संत हिरदाराम कन्या महाविद्यालय बैरागढ़ में शिक्षा संकाय में विभागाध्यक्ष

वर्ष 1971-72 से व्यंग्य लेखन प्रारंभ किया| कुछ रचनाएँ 1972 से 74 के मध्य 'धर्मयुग', 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' पत्रिका में प्रकाशित हुईं|

पिछले तीन वर्षों में पुनः लेखन प्रारंभ किया|

कुछ कहानियाँ- 'अक्षरा', 'सरिता', 'शिखर वार्ता' तथा 'स्पुतनिक' में प्रकाशित

कुछ व्यंग्य- 'व्यंग्य यात्रा', 'सरिता', 'अट्टहास' तथा 'स्पुतनिक' में प्रकशित 


डॉ0 आर0 एस0 खरे

11, सियाराम परिसर

सौम्या एनक्लेव, चूना-भट्टी 

भोपाल- 462016

07552420130/9827267006