उज्जैन में देश भर के कथक कलाकार दिखाएंगे अपना हुनर, ‘किंकिणी’ की छोटी सी गूंज सुनते हैं देश के कथक प्रेमी

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उज्जैन में देश भर के कथक कलाकार दिखाएंगे अपना हुनर, ‘किंकिणी’ की छोटी सी गूंज सुनते हैं देश के कथक प्रेमी

उज्जैन। देश भर में कथक कलाकारों और इस साधना का सम्मान करने वाले दर्शकों की कमी नहीं है। ऐसे में उज्जैन मध्य प्रदेश का ऐसा शहर है जहां हर साल सतत दो दिन देश भर के कथक कलाकार अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन तो करते ही हैं, हर साल किसी एक कलाकार को उसकी दीर्घ साधना के लिये सम्मानित भी किया जाता है। स्थानीय प्रतिभा संगीत कला संस्थान द्वारा यह दो दिवसीय किंकिणी कीर्तन राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव 16-17 मई को पं सूर्यनारायण व्यास संकुल कालिदास अकादमी में आयोजित किया जाएगा।

संस्थान की निदेशक इंजीनियर प्रतिभा रघुवंशी एलची ने बताया कि अखिल भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय नृत्य स्पर्धा में इस साल से भरतनाट्यम विधा को भी ही शामिल किया है।

🔹 कथक को उज्जैन में स्थापित करने का सपना धीरे-धीरे ही सही साकार तो हुआ-पद्मजा

सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पद्मजा रघुवंशी बताती हैं तब कथक के गढ़ दिल्ली, नोएडा, मुंबई माने जाते थे।मेरे प्रयास थे कि उज्जैन, इंदौर की भी पहचान बने। तब कथक केंद्र दिल्ली के सहयोग से संगीत नाट्य अकादमी के साथ मिलकर उज्जैन में तीन दिनी महा कथक उत्सव किया था। फिर प्रतिभा संगीत कला संस्थान की स्थापना के साथ कलाकारों को कथक प्रशिक्षण देने लगे।

उज्जैन में पं श्रीधर व्यास, गोकुल प्रसाद जी, हीरालाल जौहरी जी तो स्व दुर्गाप्रसाद जी के शिष्य पुरु दाधीच इंदौर में कलाकारों को तैयार कर रहे थे। हम सब का एकमात्र उद्देश्य था कि उज्जैन, इंदौर में भी कथक को स्टेबलिश कर सकें। यह क्या कम है कि 2019 में कजाकिस्तान से जरीना एक्जमेटोवा और 2025 में सिंगापुर से मृणाल मोड़क शामिल हो चुके हैं।

16-17 मई को नोएडा, दिल्ली, हरियाणा, गुडगांव, पुणे, मुंबई, कोलकाता रायपुर, रायगढ़, छत्तीसगढ़, अकोला, नागपुर गाजियाबाद के साथ ही मप्र के भोपाल, इंदौर, जबलपुर नीमच आदि से कथक प्रस्तुति देने कलाकार आ रहे हैं।

🔹 गुरु स्व पंडित कुंदनलाल गंगानी स्मृति, नृत्यालंकरण इस वर्ष डॉ पूनम व्यास को

कथक कलाकारों को गढ़ने वाले गुरु राजेंद्र गंगानी की प्रेरणा से उनके पिता कुंदनलाल जी की स्मृति में हर वर्ष देश के किसी एक कथक कलाकार को यह नृत्यालंकरण प्रदान किया जाता है। इस वर्ष यह नृत्यालंकरण उज्जैन की ही डॉ पूनम व्यास (बनारस घराना) को दिया जाएगा।

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बीते वर्षों में 2025 में जयपुर की प्रेरणा श्रीमाली, 2024 में पुणे की पंडिता मनीषा साठे, 2023 में चंडीगढ़ की पंडिता शोभा कोसर, 2022 में दिल्ली की गीतांजलि लालजी को प्रदान किया। कोरोना के दो साल से पहले 2019 में पुणे की पंडिता शमा भाटे और 2018 में जयपुर की डॉ शशि सांखला को प्रदान किया गया था।

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🔹 किंकिणी यानी घुंघरू की गूंज

जो नृत्य विधा के जानकार नहीं हैं उनके लिये किंकिणी नाम अटपटा हो सकता है लेकिन जो मंच पर नृत्य विधा से मोहित करना जानते हैं उन सब के लिये किंकिणी नाम आसान इसलिये है कि नृत्य की गति में पैरों में बंधे घुंघरू की आवाज की संगत होती है। किंकिणी का अर्थ छोटी घंटी, घुँघरू या करधनी (कमरबंद) होता है, जिसमें छोटी घंटियाँ लगी हों। किंकिणी का आशय नर्तकियों द्वारा पैरों में पहनी जाने वाली घुँघरू की माला या कमर में पहने जाने वाले आभूषण (करधनी) से है।