कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी कोई फर्क नहीं पड़ता

कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी कोई फर्क नहीं पड़ता

मीडियावाला.इन।

मुझे तुम्हारी गालियों से डर नहीं लगता
तुम्हारे तमगे पहनकर निकलने से भी
डरना बंद दिया है मैंने

कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी या रंडी
कोई फर्क नहीं पड़ता
तुम्हारी गढ़ी ये गालियां अब
अर्थ नहीं पैदा करतीं कोई
तुम्हारे चरित्र प्रमाण पत्र
अब नहीं दरकार मुझे

बेहतर हो कि तुम आदत बदल लो
अच्छा हो कि लहजा बदल सको
क्योंकि सारी ही जमात जब
उपर उठ जाएगी इन विशेषणों से
और जब ये शब्द खो देंगे अपना असर
और इनके आवरण में छिपा
अहम तुम्हारा हो जाएगा नग्न

तैयार रहना तुम उस दिन के लिए
जब नहीं मिलेंगी तलाशने से भी
अपनी गालियों का अर्थ चमकाने के लिए
सिंहासन पर बैठाने के लिए देवियां तुम्हें

Neelima Chauhan  की फेसबुक वाल से 
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नीलिमा चोहान

दिल्ली विश्वविध्यालय में कार्यरत रही ,कविता लिखती है