Monday, January 27, 2020
मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.

मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.

मीडियावाला.इन। कवि ,समाज सेवी अनुपमा तिवाडी की फेसबुक वाल से  एक कविता  ,जिसका अन्य  भाषाओँ में अनुवाद हो रहा है -यहाँ जस की तस कविता मराठी और नेपाली  अनुवाद के साथ  दे रहे है 

अनुपमा की वाल से ---------

कल रात एक सज्जन का महाराष्ट्र से फोन आया कि मैम, आपकी कविता का मैं मराठी में अनुवाद कर सकता हूँ क्या ? मैंने सहर्ष अनुमति दे दी. इसके बाद उन्होंने मुझे फ्रेंड रिवेस्ट भी भेजी. उन्होंने मराठी में इसका अनुवाद किया है और आज दो महानुभावों ने नेपाल में नेपाली भाषा में इसका अनुवाद किया है. एक लेखक को और क्या चाहिए ? बहुत आभार भरत यादव जी का कविता को मराठी में और बालाराम जी व एल. बी क्षेत्री जी का इस कविता का नेपाली में अनुवाद करने के लिए यहाँ मूल कविता भी !
रांड
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कालपासून दीपिका
पदुकोणला रांड
म्हणून लिहीले-संबोधले जात असल्याचे वाचते आहे
तस्लिमा घोषीत रांड होय तर
नीलिमा चौहान उगवती रांड आहे!
मीसुध्दा रांड होऊ इच्छित आहे!
आता रांड-रंडी हा तिरस्कृत शब्द
(राहिलेला) नाहीए,
क्षोभ आणि अभिमानमिश्रीत शब्द
(बनला) आहे तो!
काळाच्या ओघात शब्दांचे अर्थ बदलत जात असतात
मला वाटतं की,
या देशाला आणि दुनियेला
आता
देवींची नव्हे,
रंड्यांची गरज आहे!
माझी इच्छा आहे
की,या जगात यांच्यासारख्या
तमाम
रांडांनी जन्म घ्यायला हवाय!
-- अनुपमा तिवारी
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मूळ हिंदी कविता
अनुपमा तिवारी
मराठी अनुवाद
भरत यादव
अनुवाद देखें

रंडी

कल से दीपिका पादेकोण को रंडी लिखा पढ़ रही हूँ
तस्लीमा, घोषित रंडी है
नीलिमा चौहान, उभरती रंडी है
मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.
अब रंडी गिरा हुआ शब्द नहीं
क्षोभ और गर्व से मिश्रित शब्द है
समय के साथ शब्दों के अर्थ बदलते जाते हैं
मुझे लगता है
इस देश और दुनिया को अब देवियों की नहीं,
रंडियों की ज़रुरत है
मेरी कामना है
कि इन जैसी इस दुनिया में तमाम रंडियां जन्म लें !

अनुपमा तिवाड़ी

LB Chhetri Anupama Tiwari जी नेपाल कि कवि सरिता तिवारी के द्वारा अपका कविता पढ्नेका अवसर मिला | बहोत प्रभावित हुवा और मैने नेपाली मे अनुवाद कर दिया -
हिजो देखिनै पढिरहेको छु दिपिकालाई रन्डी भनेर लेखेको
तसलिमा घोषित रन्डी हो
निलिमा चौहान, फख्रॅदै गरेकी रन्डी हो
म पनि रन्डी बन्न चाहन्छु
अब रन्डी तल्लो स्तरको शब्द रहेन
यो त क्षोभ र गर्व मिश्रित शब्द हो
समयसंगै शब्दहरूको अर्थ पनि फेरिन्छन नै
मलाई लाग्छ
यो देशलाई अब देवीहरूको होइन
रण्डीहरूको खाँचो छ
मेरो कामना
यी जस्तै विश्वमा धेरै रन्डीहरूले जन्म लिउन |
अनुवादक - एल बी क्षेत्री

चित्र में ये शामिल हो सकता है: पाठ

 

Himanshu Deshmukh

· 20 घंटे · 

 

■ रंडी

कल से दीपिका पादेकोण को रंडी लिखा पढ़ रही हूँ
तस्लीमा, घोषित रंडी है
नीलिमा चौहान, उभरती रंडी है
मैं भी रंडी होना चाहती हूँ.
अब रंडी गिरा हुआ शब्द नहीं
क्षोभ और गर्व से मिश्रित शब्द है
समय के साथ शब्दों के अर्थ बदलते जाते हैं
मुझे लगता है
इस देश और दुनिया को अब देवियों की नहीं,
रंडियों की ज़रुरत है
मेरी कामना है
कि इन जैसी इस दुनिया में तमाम रंडियां जन्म लें !!

© Anupama Tiwari

 
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