पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

पर हे मेरे प्रभु..... ज़रा आहिस्ता

मीडियावाला.इन।

हे मेरे प्रभु....
तेरा जादू चल गया।

इस जहान की सड़कें खाली हो गईं हैं।
सारे आलम में शुद्ध हवा का झोंका चल रहा है।
सारे पेड़ पोधे हवा में झूम रहे हैं।
समुंदर में चलने वाली बड़े बड़े जहाज रुक गए हैं। जिससे समंदर को अब कोई गंदा नहीं कर रहा।

लोग नॉनवेज खाना छोड़ रहे हैं तो मछलियां, और चूजे मस्ती में डोल रहे हैं।

बूढ़े मां बाप का बेटा उसके पास बैठ कर बाते कर रहा है।
बच्चे अपने माता पिता के साथ खेल रहे हैं।
पति पत्नि का आपस में सामंजस्य बैठ गया है।

लोग एक दूसरे को समझ रहे हैं।
लोग सिस्टम का पालन करते नजर आ रहे हैं।

हे सत्गुरु....
ये Corona नहीं तेरी करूणा का ही नतीजा है।

पर हे मेरे प्रभु.....
ज़रा आहिस्ता,
ज़रा देखना.....
तेरे हाथों की मिट्टी से बने तेरे ये खिलौने कहीं टूट न जाएं।

हम सभी जानते हैं कि तू नेचर को बेलेंस करने में लगा है।
फिर भी थोड़ी मेहरबानी करना।
हम सब तेरे ही बच्चे हैं।
सभी पर अपनी रहमत बनाए रखना।
यही अरदास है

निरुपमा खरे की फेसबुक वाल से साभार 

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निरुपमा खरे

निरुपमा खरे यदाकदा लिखते हुए अपने भाव अपने विचार हम तक अपने फेसबुक पोस्ट से रखती है .सजग ,भारतीय संस्कारों की संरक्षक कलात्मक अभिरुचि की सोशल मिडिया लेखक और कवि है ,भोपाल में रहती है .