पति के नाम इक खत

पति के नाम इक खत

मीडियावाला.इन।

पति के नाम इक खत

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भूल जाऊँ दाल में नमक या बनाना चावल

जैसे रखकर भूल जाती हूँ चाबी ख्वाबों की तरह

भूल जाती हूँ किराने का हिसाब रखकर दिन रात के शेल्फ पर

बेटे की उम्र भूल जाती हूं उँगलियों में गिननी पड़ती है

वह साल भूल जाती हूँ जब निकली थी घर से ढूंढने खुद को

कई किताबें हैं बनी मेरे विचारों की शब्दकोश

शायद बुरा लगे तुम्हें जो भूल जाऊँ खाना खाना या सोना या जीना साथ

भूल जाऊँ समय या साँस लेना या रहना जिंदा

या हो जाऊँ बेख़ुद जैसे भूल जाना खुद में होते हुए खुद को

लम्हे छोड़ दूं खिड़की पर बालकनी में मुलाकातें

कर लूँ जो आँखें बंद जानती हूं कुछ नहीं होगा तुम्हें

रहूँगी घर के आँगन में सुबह शाम किरणों की तरह

बच्चों के चेहरे पर उत्साह, हँसी और आँखों की चमक में

रहूंगी कबूतर की गुटरगुं में खिड़की पर संगत करते इठलाते

बालकनी की धूप में भी हौले से उतर आती हुई खिड़की के भीतर भरी दोपहरी में

कड़ी पत्ते के बघार वाली दाल की महक में होऊंगी जो तुम्हें पसंद नहीं

हमारे झगड़े के गवाह श्रोता हमारे पड़ोसी मिस करेंगे हमें दूर तक

मेरी कविताओं में देख सकते हो तुम मुझे

खासकर कचरे की कविता में धूल सी उड़ती हुई आसपास

देखना लैपटॉप के एंटर बटन में रहूँगी सदा

कविता की पूरी पंक्तियों के साथ और कुछ तस्वीरों में ओझल सी

बचा कर रखना साँसे इत्र की तरह

दवाइयां दीपक सी रोशनी भरते रहेंगे तुम्हारे भीतर

चले जाया करना मूवी जैसे जाते थे साथ

हर हफ्ते वहीं मिलूँगी ठीक बाजू की सीट में

अपनी यादों में मत ढूँढना मुझे वहाँ नहीं हूँ मैं नहीं मिलूंगी दोबारा किसी जन्म में भी

नहीं आए रास ये समाज, ये रीति-रिवाज, ये पाबन्दियाँ, घुटती साँसों की सौगात

पढ़े लिखे होने के बावजूद समाज के ढर्रे पर चलते रहे तुम प्रताड़ित होती रही मैं

तुम्हारे शिक्षित होने का कोई मतलब नहीं मिला मुझे

विवाह जरूरत की पूर्ति भर है

साबित हुआ पूरी जिंदगी जी कर

याद है ना कहा था दोस्त बन कर रहोगे तो रहूंगी साथ

वरना जिस दिन समझोगे पत्नी छोड़ जाऊंगी तुम्हें।

- रीदारा

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रीता दास राम

जन्म : 12 जून 1968 नागपूर                                                  

शिक्षा : बी.ए.(1988), एम॰ए॰(2000), एम॰फिल (हिन्दी) मुंबई विश्वविद्यालय (2005),पी.एच.डी. शोधछात्रा (मुंबई)।

कविता संग्रह :

1.“तृष्णा” प्रथम कविता संग्रह 2012

2.“गीली मिट्टी के रूपाकार” दूसरा काव्यसंग्रह 2016 में प्रकाशित।

कहानी :

पहली कहानी लखनऊ से प्रकाशित “लमही” अक्टूबर-दिसंबर 2015 में प्रकाशित।

सम्मान :

1. ‘शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान’ 2013 में तीसरा स्थान,‘तृष्णा’ को उज्जैन  में।

2. ‘अभिव्यक्ति गौरव सम्मान’– 2016 नागदा में ‘अभिव्यक्ति विचार मंच’ नागदा की ओर से 2015-16 का।

3. 2016 का ‘हेमंत स्मृति सम्मान’ गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद 7 फरवरी 2017 में ‘गीली मिट्टी के रूपाकार’ को ‘हेमंत फाउंडेशन’ की ओर से।  

विभिन्न पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित :

‘युग गरीमा’ मार्च 2018 (लखनऊ), ‘आजकल’जनवरी 2018 (दिल्ली), ‘वागर्थ’ जुलाई 2016, ‘पाखी’ मार्च 2016 (दिल्ली), ‘दुनिया इन दिनों’ (दिल्ली) , ‘शुक्रवार’ (लखनऊ), ‘निकट’ (आबूधाबी), ‘लमही’ (लखनऊ), ‘सृजनलोक’ (बिहार), ‘उत्तर प्रदेश’ (लखनऊ), ‘कथा’ (दिल्ली), ‘अनभै’ (मुंबई), ‘शब्द प्रवाह’ (उज्जैन), ‘आगमन’ (हापुड़), ‘कथाबिंब’ (मुंबई), ‘दूसरी परंपरा’ (लखनऊ), ‘अनवरत’ (झारखंड), ‘विश्वगाथा’ (गुजरात), ‘समीचीन’ (मुंबई), ‘शब्द सरिता’ (अलीगढ़), ‘उत्कर्ष’ (लखनऊ) आदि पत्रिकाओं एवं ‘शब्दांकन’ ई मैगजीन, ‘रचनाकार’ व ‘साहित्य रागिनी’ वेब पत्रिका, ‘स्टोरी मिरर’ पोर्टल एवं ‘बिजूका’ ब्लॉग व वाट्सप समूह आदि में कविताएँ प्रकाशित।

आलेख लेखन :

1.“स्त्री विमर्श के आलोक में- प्रेमचंद के उपन्यासों में नारी” - मुंबई की त्रैमासिक पत्रिका ‘अनभै’ (अक्टूबर-दिसम्बर 2014)

2.“अंधेरे में” का काव्य शिल्प - अनभै (अप्रेल-सितंबर 2015)

3.‘हिन्दी नाटकों का सामाजिक सरोकार’ - हिन्दी विभाग, विज्ञान एवं मानविकी संकाय एस.आर.एम. विश्वविद्यालय, कट्टनकुलातुर, चेन्नई की किताब ‘हिन्दी नाटकों में लोक चेतना’ में प्रकाशित।

4.‘इक्कीसवीं सदी के उपन्यासों में आदिवासी विमर्श’ – अनभै (अक्तूबर-जून 2016)

5.ब्रिटेन के प्रवासी भारतीय लेखकों की कहानियों में मानवीय जीवन और समस्याएँ एवं अन्य।

स्तंभ लेखन : मुंबई के अखबार “दबंग दुनिया” में और अखबार “दैनिक दक्षिण  मुंबई”में स्तंभ लेखन प्रकाशित।  

साक्षात्कार : ‘हस्तीमल हस्ती जी’पर लियागया साक्षात्कार मुंबई की ‘अनभै’ पत्रिका में प्रकाशित।

रेडिओ : वेब रेडिओ ‘रेडिओ सिटी (Radio City)’ के कार्यक्रम ‘ओपेन माइक’ में कई बार काव्यपाठ एवं अमृतलाल नागरजी की व्यंग्य रचना का पाठ।

पता: 34/603, एच॰ पी॰ नगर पूर्व, वासीनाका, चेंबूर, मुंबई – 400074.  

फोन न॰: 022 25543959,मो॰ न॰– 09619209272.