अनुदैर्ध्य तरंग [विज्ञान - कविता]

अनुदैर्ध्य तरंग [विज्ञान - कविता]

मीडियावाला.इन।

स्वाति तिवारी की विज्ञान कविता 

अनुदैर्ध्य तरंग [कविता]

मंदिर में बजती
 घंटियों का संगीत
 टन्...टन्.. कितनी ऊर्जा है
 इस टनकार में
मैं इन घंटियों की आवाज
 को महसूस कर रही हूं.
जानती हूँ  भगवान के
 पूजन के समय  जरुरी है
 शंख -घंटिया  बजानी ,
उत्तम फल की प्राप्ति के लिए
 घण्टा ध्वनि असुर राक्षस
और अपकारकर्ताओं को
भयभीत करके भगा देगी
 पाप निवर्तक जों मानी जाती है |
 कहने को तो केवल यह
श्रवणेंद्रिय मे उत्पन्न संवेदन  ही है ,
 शऱीरक भाष्य में ध्वनि
इसे ही  कहा है जो
 दूर से ऐसे  सुनी  जाय |
कि वर्ण बर्ण अलग और
साफ न मालूम हो ।
महाभाष्यकार ने भी
 शब्द के विस्फोट को
ही कहा  ध्वनि  ?
पाणिनि दर्शन में वर्णो का
वाचकत्व न मानकर
 स्फोट ही के बल से
 अर्थ की प्रतिपत्ति ध्वनि  है यह ।
हमारे बोलने, किसी वस्तु के टकराने,
कंपन, यंत्र आदि से भी
 उत्पन्न होती है ध्वनि.
अनुदैर्ध्य तरंग ही तो  है जो ,
ठोस, द्रव और गैस में संचरित होती है ।
तब फिर
मंदिर में घंटी लगाने की यह  परंपरा ?
क्या सिर्फ इसलिए कि
 घंटी की कर्णप्रियता
  मन-मस्तिष्क को
 अध्यात्म भाव की ओर ले जाने की
 मात्र एक सामर्थ्य ?
तब प्रश्न है ,
 इस कंपन का फायदा क्या ?
 यही   कि इसके क्षेत्र में आने वाले
 सभी जीवाणु, विषाणु और
 सूक्ष्म जीव हो जाते हैं नष्ट
और हो जाता है.वातावरण शुद्ध
 नकारात्मता दूर कर सकारात्मक
  उर्जा की धनवर्षा भी होती है.
हाँ कह सकते हो -
धार्मिक नहीं,
वैज्ञानिक भी है.
किसी मंदिर में
 प्रवेश करते हुए हैं मौजूद
 देवता की अनुमति लेनेकी यह परंपरा .
 या उनका  ध्यान अपनी ओर खींचने की
 प्रतीकात्मक व्यवस्था  .
क्योंकि हमारे घरों  में भी
हाँ जरुरी है प्रवेश पर
डोर बेल का बजाना .
हो सकता है मंदिर के देवता
सुप्तावस्था में  हों ?
 ऐसे में घंटी बजाकर
 पहले उन्हें जगाना  ,
गुंजायमान घंटा बजा कर |
विज्ञानं और ज्ञान की द्वन्द में
दसो दिशाओं में अपनी
आस्था काआडम्बर
परंपरा के नाम पर करता है मनुष्य .
पहले उससे ज्यादा  जरुरी
 अंतर आत्मा की कोई बेल  बजानी
जो ,
संवेदना के तारों को झंकृत करे ?
मानवता के मंदिरों में भी
हटे दानवी प्रवृतियां
देवत्व के अनुधेर्य तरंगो से
उर्जा का झरना
जीवन की प्रार्थना के
 साथ बह निकले .
मनुष्य के मन मंदिर में भी
तब बजने  लगे
नाद ,महा नाद करती शुभ घंटाल
शंख ध्वनियाँ .
----.स्वाति tiwari 

डॉ. स्वाति तिवारी

नयी शताब्दी में संवेदना, सोच और शिल्प की बहुआयामिता से उल्लेखनीय रचनात्मक हस्तक्षेप करने वाली महत्वपूर्ण रचनाकार स्वाति तिवारी ने पाठकों व आालोचकों के मध्य पर्याप्त प्रतिष्ठा अर्जित की है। सामाजिक सरोकारों से सक्रिय प्रतिबद्धता, नवीन वैचारिक संरचनाओं के प्रति उत्सुकता और नैतिक निजता की ललक उन्हें विशिष्ट बनाती है।

देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कहानी, लेख, कविता, व्यंग्य, रिपोर्ताज व आलोचना का प्रकाशन विविध विधाओं की चौदह से अधिक पुस्तकेंे प्रकाशित। विशेषत : उल्लेखनीय : 'सवाल आज भी जिन्दा है,' 'अकेले होते लोग' व 'स्वाति तिवारी की चुनिंदा कहानियां'। भोपाल गैस त्रासदी पर केन्द्रित 'सवाल आज भी जिन्दा है' प्रामाणिक दस्तावेजी लेखन के लिए बहुचर्चित।इस पुस्तक पर पापुलेशन फर्स्ट संस्था द्वारा राष्ट्रिय लाडली मिडिया अवार्ड ,राष्ट्र भाषा प्रचार समिति का वांग्मय सम्मान ,शोधपरक पत्रकारिता सम्मान ,मध्य प्रदेश महिला प्रेसक्लब  द्वारा महिला पत्रकारिता सम्मान प्राप्त .

एक कहानीकार के रूप में सकारात्मक रचनाशीलता के अनेक आयामों की पक्षधर। हंस, नया ज्ञानोदय, लमही, पाखी, परिकथा, बिम्ब, वर्तमान साहित्य इत्यादि में प्रकाशित कहानियां चर्चित व प्रशंसित। 'ब्रह्मकमल - एक प्रेमकथा'उपन्यास वर्ष 2015 मेंज्ञानपीठ  पाठक   सर्वेक्षण में श्रेष्ठ पुस्तकों में पांचवे क्रम पर नामांकित  .मुंबई एवं नाशिक विश्विद्यालय में उपन्यास पर शोध कार्य जारी है .

स्वाति तिवारी मानव अधिकारों की सशक्त पैरोकार, कुशल संगठनकर्ता व प्रभावी वक्ता के रूप में सुपरिचित हैं। अनेक पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का सम्पादन। फिल्म निर्माण व निर्देशन में भी निपुण। कलागुरू विष्णु चिंचालकर एवं 'परिवार परामर्श केन्द्र' पर फिल्मों का निर्माण। इंदौर लेखिका संघ' का गठन। 'दिल्ली लेखिका संघ' की सचिव रहीं। अनेक पुरस्कारों व सम्मानों से विभूषित। प्रमुख हैं -भारत सरकार द्वारा चयनित भारत की 100 वुमन अचीवर्स में शामिल ,राष्ट्रपति प्रणव मुकर्जी द्वारा सम्मानित .अंग्रेजी पत्रिका 'संडे इंडियन' द्वारा 21वीं सदी की 111 लेखिकाओं में शामिल, 'अकेले होते लोग' पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली द्वारा राष्ट्रिय सम्मान से सम्मानित व मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा 'वागीश्वरी सम्मान' से अलंकृत।मध्यप्रदेश लेखक संघ के देवकीनंदन युवा पुरस्कार एवं पुष्कर  जोशी सम्मान प्राप्त .जबलपुर की पाथेय संस्था द्वारा सावित्री देवी राष्ट्रिय सम्मान .देश व देशान्तर में हिन्दी भाषा एवं साहित्य की सेवा हेतु प्रतिबद्ध। नौवें विश्व हिन्दी सम्मेलन (2012), दक्षिण अफ्रीका में मध्यप्रदेश शासन का प्रतिनिधित्व। 'हिन्दी रोजगार की भाषा कैसे बने' भाषण वहां प्रशंसित हुआ। विश्व की अनेक देशों की यात्राएं।

विभिन्न रचनाएं अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में अनूदित। अनेक विश्वविद्यालयों में कहानियों पर पीएचडी एवं  शोद्य कार्य हुए । साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका 'दूसरी परम्परा' के सम्पादन में सक्रिय सहयोग।आदिमजाति कल्याण विभाग में सहायक नियोजन अधिकारी .मीडियावाला न्यूस पोरटल में  साहित्य सम्पादक 

सम्प्रतिःमध्यप्रदेश शासन के मुख्यपत्र 'मध्यप्रदेश संदेश' की सहयोगी सम्पादक।

सम्पर्कःEN1/9, चार इमली, भोपाल - 462016 (म.प्र.)


ईमेलःstswatitiwari@gmail.com

मो.ः09424011334,07552421441


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