Thursday, December 12, 2019
आम्रपाली घोटाले में आरोपी बनाए जाएंगे महेंद्र सिंह धोनी? कोर्ट में की गई अपील

आम्रपाली घोटाले में आरोपी बनाए जाएंगे महेंद्र सिंह धोनी? कोर्ट में की गई अपील

मीडियावाला.इन।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के उच्च पदस्थ सूत्रों और एफआईआर में दर्ज मजमून के मुताबिक, 'ग्राहकों को लुभावने सपने दिखाकर अरबों रुपये डकार जाने वाले आम्रपाली बिल्डर ने एम.एस. धोनी का भी खुलकर बेजा इस्तेमाल किया. उन्हें आम्रपाली ग्रुप का ब्रांड एम्बेसडर सिर्फ इसलिए बनाया गया, ताकि लोग धोनी के नाम पर आसानी से झांसे में आकर अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई इस प्रोजेक्ट में स्वाह कर सकें.'

दर्ज एफआईआर में आम्रपाली (Amrapali) ग्रुप, उसके कर्ता-धर्ता अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया, मोहित गुप्ता आदि को बतौर मुलजिम शामिल किया गया है. एफआईआर में शिकायतकर्ता रूपेश कुमार सिंह हैं. एफआईआर नंबर 265 को आईपीसी की धारा 406/409/420/120बी के तहत दर्ज किया गया है.

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के उच्च पदस्थ सूत्रों और एफआईआर में दर्ज मजमून के मुताबिक, 'ग्राहकों को लुभावने सपने दिखाकर अरबों रुपये डकार जाने वाले आम्रपाली (Amrapali) बिल्डर ने एम.एस. धोनी का भी खुलकर बेजा इस्तेमाल किया. उन्हें आम्रपाली (Amrapali) ग्रुप का ब्रांड एम्बेसडर सिर्फ इसलिए बनाया गया, ताकि लोग धोनी के नाम पर आसानी से झांसे में आकर अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई इस प्रोजेक्ट में स्वाह कर सकें.'

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में साफ साफ लिखा है कि इस गोरखधंधे में आम्रपाली (Amrapali) ग्रुप ने करीब 2 हजार 647 करोड़ रुपये अपने विभिन्न प्रोजेक्ट्स/टॉवर्स के नाम पर अनजान ग्राहकों से उगाहे. इसके बाद इतनी भारी-भरकम रकम को इधर-उधर लगा दिया, जबकि प्रोजेक्ट आज तक अधूरे पड़े हैं.

शिकायतकर्ता रूपेश कुमार सिंह ने सोमवार रात से खास बातचीत में माना, 'हां, मैंने आम्रपाली (Amrapali) द्वारा किए गए इस घोटाले में एफआईआर दर्ज कराई है. जांच अभी पुलिस कर रही है.'

दर्ज एफआईआर में दर्ज रूपेश कुमार के बयान के मुताबिक, 'सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को साफ कर दिया है कि आरोपियों ने इन प्रोजेक्ट्स को लांच ही, अनजान लोगों को गुमराह करके ठगने के लिए किया था. जैसा कि उन्हीं सब में से एक मैं खुद भी हूं.'

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में दर्ज करवाया है कि अरबों रुपये की इस ठगी में बैंक, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भी मिलीभगत है. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 10 फीसदी प्रीमियम के बदले आम्रपाली (Amrapali) को प्लाट दे दिए. उसके बाद अथॉरिटी ने यह नहीं देखा कि बिल्डर ग्राहकों को कैसे ठग रहा है? बिल्डर ग्राहकों से रकम वसूलता रहा, मगर उसने अथॉरिटी में पैसा जमा ही नहीं किया. इसके बाद भी ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी कुछ नहीं बोली.

आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 'आम्रपाली (Amrapali) बिल्डर मेरे (शिकायतकर्ता रूपेश कुमार सिंह) जैसे हजारों लोगों से 90 फीसदी तक रकम वसूल चुका है. इसके बावजूद मगर फ्लैटों का कोई अता-पता नहीं हैं.'

zee news via Dailyhunt

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