MP रहवासी संघ नीति का मसौदा तैयार, लागू करने में हो रही देरी

MP रहवासी संघ नीति का मसौदा तैयार, लागू करने में हो रही देरी

मीडियावाला.इन।

भोपाल: प्रदेश की आवासीय कॉलोनियां और बहुमंजिला इमारतों में रहने वालों की समस्याओं,सुविधाओ को ध्यान में रखते हुए सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल ने मध्यप्रदेश रहवासी संघ नीति का मसौदा तैयार कर नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दिया है। लेकिन इसे लागू कराने में देरी हो रही है। नीति लागू हुई तो रहवासी संघ व्यवस्था से कॉलोनियों के विवादों को निपटाने में मदद मिलेगी और सुविधाओं का नियंत्रित विस्तार किया जा सकेगा।

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यह नीति में मध्यप्रदेश में आवास सोसायटियों और विधि अनुसार बनाई गई ऐसी अन्य पंजीकृत और गठित सोसायटियों पर लागू होगी जिनका कार्यक्षेत्र किसी नगरीय क्षेत्र के आवासीय नागरिकों को नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नगरीय प्रशासन विभाग इस नीति को लागू करेगा। इस नीति के लागू होंने के बाद विभिन्न नियमों, अधिनियमों के अंतर्गत पंजीकृत मौजूा आवासीय सोसायटियां रहवासी संघ कहलाएंगी। इस नीति को बनाने के पीछे एक ही उददेश्य है कि आवासीय कॉलोनियों और प्रकोष्ठों के निर्माण के बाद वहां हने वाले नागरिकों के लिए सुव्यवस्थिति इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं का विकास करना और सुविधाओं का कुशलता से संचालन करने का तंत्र विकसित करना। यह संघ कॉलोनियों में होंने वाले विवादों का निपटारा करने के लिए भी प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा।

इस नीति के तहत मौजूदा नियम, उपनियमों का व्यवस्थापना तथा प्रबंधन को सुव्यवस्थित बनाते हुए उनमें एकरुपता लाई जाएगी ताकि नगर के विकास को प्रोस्साहन मिले।

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नियमों में होगा बदलाव-
नई रहवासी संघ नीति के संचालन के लिए सभी प्रचलित कानूनों, नियमों, अधिनियमों में भी व्यापक संशोधन किया जाएगा। जो अनुपयोगी नियम है उन्हें निरस्त कर वर्तमान की जरुरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किया जाएगा। इसमें प्रकोष्ठ अधिनियम, गृह निर्माण समिति अधिनियम, नगर पालिका अधिनियम को मानकीकृत किया जाएगा ताकि टकराव एवं परस्पर  विरोधाभाषी विषयों से बचा जा सके। मध्यप्रदेश मोहल्ला समिति के प्रावधानों को भी संशोधित किया जाएगा। इसके अलावा नगर पालिक निगम अधिनियम में भी बदलाव होगा। मध्यप्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के तहत आवास स्टॉक भी बनाया जाएगा जिसके बाद परियोजना को पूरा करने औरलोगों को घरों का स्वामित्व मिलने के बाद हाउसिंग सोसायटी और आरएडब्ल्यू के गठन के संबंध में रेरा का भी हस्तक्षेप होगा।

एसडीएम कार्यालय में होगा पंजीयन-
आवास समितियों को एसडीएम कार्यालय में पंजीकृत किया जाएगा। वहां पर इसे यूएलबी के साथ पंजीकृत माना जाएगा। विवादों के निपटारे के लिएयूएलबी को शक्तियां भी प्रदान की जाएगी। आदर्श उपनियम भी नगरीय विकास एवं आवास विभाग उपलब्ध कराएगा। बड़े गैर गेटेड या खुले परिसर आरएडब्ल्यू का पंजीकरण  किया जाएगा। इसमें स्वतंत्र या पंक्ति वाले घरों के साथ बड़े खुले परिसर आवास समितियों में निवासी तीन मापदंडों के आधार पर आरएडब्ल्यू बना सकेगे। इसमें सौ या दो सौ घरों का समूह,सेक्टर और एक एकड़ क्षेत्र का अलग आरएडब्ल्यू होगा।

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ई-प्लेटफार्म भी- 
नगरीय प्रशासन विभाग अपने मौजूदा पोर्टल को इस नीति के प्रावधानों के अनुरुप बेहतर बनाएगा और अपडेट करेगा। इसमें एक नया खंड बनेगा जिसका उपयोग केवल आरएडब्ल्यू के पंजीयन, निर्वाचन और अन्य प्रक्रियाओं तथा आरएडब्ल्यू संबंधी जानकारी देने के लिए किया जाएगा। यह पोर्टल संबंधित विभाग और संस्थाओं तथा हितधारकों के बीच सेतु की भूमिका निभाएगा । अन्य विभागों से डाटा शेयरिंग भी की जाएगी।

रहवासी संघ का कार्यकाल दो वर्ष-
मध्यप्रदेश रहवासी संघ नीति के तहत जो रहवासी संघ बनेंगे उनका दो वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और सचिव होंगे। महिलाओं का प्रतिनिधित्व पचास फीसदी होगा। इसके लिए पदाधिकारियों का ढांचा, निर्वाचन के लिए योग्यता, चुनाव प्रक्रिया,दो चुनावों के बीच अंतराल,कार्यकाल,मतदान का अधिकार जैसी प्रक्रियाएं भी तय होंगी।

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संघ का इस तरह रहेगा नियंत्रण- 
कॉलोनियों में किरायेदारों और मालिक दोनो को संघ में शामिल किया जाएगा। संघ सभी रहवासियों तक सूचना पहुंचाने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करेगा। संघ के नियम,उपयिम,कार्यक्रम, गतिविधियों और बैठकों का ब्यौरा सभी तक पहुंचाया जाएगा। सड़क,स्ट्रीट लाईट, फुटपाथ संबंधी कार्य कराने के लिए संघ एजेंसी का चयन करेगा। सम्पत्ति को बेचने से पहले संघ से एनओसी लेनाअनिवार्य होगा। कचरा प्रबंधन, नाली, ड्रेनेज प्रबंधन, पार्क, बाउंड्रीवाल का प्रबधन भी यह संघ करेगा। सड़क संधारण, मरम्मत,सौंदर्यीकरण, सुरक्षा इंतजाम और पार्किंग की व्यवस्था  भी संघ देखेगा.  RB

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