Thursday, December 05, 2019
'फांसी दे दो या कत्ल कर दो, फर्क नहीं पड़ता', हैदराबाद के दरिंदों को नहीं अपनाएंगे घरवाले

'फांसी दे दो या कत्ल कर दो, फर्क नहीं पड़ता', हैदराबाद के दरिंदों को नहीं अपनाएंगे घरवाले

मीडियावाला.इन।

हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी ने सबको झकझोर कर रख दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा इस वक्त सदमे में जो हैं वो या तो पीड़िता का परिवार है या फिर आरोपियों का परिवार.

TV9 भारतवर्ष हैदराबाद से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर आरोपियों के गांव पहुंचा, जहां आरोपियों के परिजनों से जानने की कोशिश की गई कि इस घटना के बाद उनकी मनोस्थिति क्या है?

मां-बहन का इकलौता सहारा

एक आरोपी के घर पहुंचने पर पता चला कि उसके पिता नहीं हैं. घर में केवल मां है और एक बहन है. यह आरोपी अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला था. घटना के बाद से मां और बहन दोनों ही सदमे में है और यकीन नहीं कर पा रहीं कि ऐसा कैसे हो गया.

आरोपी की मां ने कहा, "चारों ने बहुत बुरा किया. जो सबको सजा मिलेगी वही मेरे बेटे को भी हो. अगर मेरी बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी होती तो मैं क्या करती. मैं कोर्ट नहीं जाऊंगी. मैं यही मान लूंगी कि मुझे बेटा पैदा ही नहीं हुआ. इस घटना ने मुझे झकझोर दिया है."

तकलीफ है उसने जो किया, पर वो मेरा पति है

दूसरे आरोपी के घर पहुंचने पर पता चलता है कि अभी 8 महीने पहले ही इसकी शादी हुई थी. पिछले कुछ समय से वह बीमार था और उसे किडनी में तकलीफ थी. वो इस घटना से एक हफ्ते पहले ही गांव से हैदराबाद गया था.

इस आरोपी की मां ने कहा, "मेरा बेटा शरीफ था. मैंने अच्छे संस्कार दिए. उसका जिस लड़की से अफेयर था, उसी से हमने उसकी शादी करा दी. उसको किडनी में तकलीफ थी. उसने मुझसे 1 हफ्ते पहले 100 रुपये लिए और चला गया, फिर वह लौट कर नहीं आया. उसे जितने दिन जेल में रखना है रखो, लेकिन जान से मत मारो. मेरा बेटा मुझे ला दो."

आरोपी की पत्नी ने कहा, "मेरा पति ऐसा नही था. हमारी अभी ही शादी हुई है. जबसे लॉरी का काम पकड़ा तब ये सब गड़बड़ हुआ. अगर उन्हें वापस नहीं छोड़ा गया तो मैं खुदकुशी कर लुंगी. मुझे तकलीफ है उन्होंने जो किया, लेकिन वो पति तो मेरा ही है."

फांसी दे दो या कत्ल कर दो

तीसरे आरोपी के घर जाने पर पता चलता है कि वह भी अपने मां-बाप का इकलौता बेटा है. उसकी मां का रो-रो कर बुरा हाल है और इंटरव्यू के दौरान भी वो चक्कर खा के गिरने लगीं.

आरोपी के पिता ने कहा, "मैं कोर्ट नही जाऊंगा. इसको फांसी दे दो या कत्ल कर दो, पर मैं कोर्ट नहीं जाऊंगा. इसने जो किया वो बहुत गलत है. इसकी मां का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है. लगातार डॉक्टर से दिखा रहे हैं."

पत्थर से मारो, बस मार दो उसे

चौथे आरोपी के घर जब पहुंचे तो घर में उसकी एक छोटी बहन और मां-बाप थे. वह भी इकलौता बेटा है. आरिफ के परिजन उससे बेहद खफा है और दुबारा उसकी शक्ल नही देखना चाहते.

आरोपी के पिता ने कहा, "बेटे से नहीं मिले. टीवी में पता चला कि ये सब हुआ है. पुलिस ने हमें साइन करने के लिए बुलाया. आरिफ का मुंह देखा, लेकिन हमने उससे बात नही की. हमारे लिए आरिफ मर गया है. हमारा दिल नहीं करता उससे मिलने का. प्रशासन को जो करना है कर लें."

आरोपी की मां ने कहा, "जो सजा देनी है दे दें हमे मंजूर है. हमें बेटा ना होता तो बेहतर होता. वो हमारे लिए मर गया है. उसको पत्थर से मारो. बस मार दो. कुछ भी कर लो.

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RB

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