तीन फोन कॉल डिटेल जिसने चिदंबरम को पहुंचाया सलाखों के पीछे, जानिए पूरी कहानी

तीन फोन कॉल डिटेल जिसने चिदंबरम को पहुंचाया सलाखों के पीछे, जानिए पूरी कहानी

मीडियावाला.इन।

नई दिल्ली। 31 मई 2007 की एफआईपीबी की संस्तुति से पहले वित्त मंत्रालय के एप्रूवल व वित्त मंत्री की मंजूरी के साथ- साथ बेटे की कंपनी को 7 लाख डॉलर का भुगतान पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम को ले डूबा। साथ ही एफआईपीबी को आईएनएक्स के द्वारा बिल का भुगतान भी पी. चिदंबरम के गले की फांस बन गया। इसके अलावा सीबीआई और ईडी के पास तीन कॉल डिटेल्स सहित इंद्राणी मुखर्जी का बयान भी है जिसके चलते पी. चिदंबरम सीबीआई रिमांड पर हैं।

ये वही इंद्राणी मुखर्जी हैं जो अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या में जेल में हैं और आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की पूर्व निदेशक हैं। सीबीआई ने कोर्ट को 12 पन्नों की एक शीट सौंपी है जिसमें क्रमवार बताया गया है कि किस तरह आईएनएक्स मीडिया को एक बार नहीं बल्कि तीन बार फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को बदल दिया गया। ये भी कम रोचक नहीं है कि जब आयकर विभाग ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) सहित वित्त मंत्रालय के फैसले पर सवाल उठाए तो टीम को बदल दिया गया और उनकी दलीलों को सुनने से इनकार कर दिया था।

ये बातें सीबीआई और ईडी ने कोर्ट के सामने रखीं। साफ है कि सीबीआई के पास और भी कई ऐसे सबूत हैं जिनसे चिदंबरम फंस सकते हैं। आईएनएक्स मीडिया की स्थापना मीडिया कारोबारी पीटर मुखर्जी ने 2006 में की थी और 13 मार्च 2007 को विदेशी निवेश प्रस्ताव की मंजूरी प्राप्त करने के लिए एक आवेदन किया था।

ये थी वो चूक जिनके चलते फंस गए चिदंबरम

चिदंबरम के खिलाफ सबसे अहम सबूत है इंद्राणी मुखर्जी का वो बयान जिसमें उसने बताया है कि किस तरह आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश के लिए एफआईपीबी ने मंजूरी दी थी। इंद्राणी मुखर्जी के इसी बयानों की जांच जब ईडी के अधिकारी ने की तो पता चला कि आईएनएक्स के प्रकरण में बोर्ड एकमत नहीं था। उस बोर्ड के मौजूदा दो सचिवों ने 4.62 करोड़ रुपए के इस आवेदन फैसले पर असहमति जताई थी। इस पर चिदंबरम ने दोबारा बैठक करने को कहा।

लेकिन हैरान करने वाली बात ये थी कि बोर्ड ने इस पर अपनी अनुमति 31 मई 2007 को दी थी जबकि वित्त मंत्रालय और खुद चिदंबरम इस पर 26 मई को निर्णय ले चुके थे और इस संबंध में बोर्ड को पत्र भेजा गया था जिसके बाद बोर्ड ने इस विदेशी फंड को अनुमति दे दी।

आयकर विभाग ने चेताया फिर भी वित्त मंत्रालय रहा चुप

जानकारी के मुताबिक बोर्ड द्वारा केवल 4.62 करोड़ की अनुमति दी गई थी लेकिन आईएनएक्स मीडिया कंपनी ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए 800 रुपए प्रति शेयर के प्रीमियम के साथ 305 करोड़ रुपए एफडीआई के रूप में प्राप्त कर लिए। इस निवेश को लेकर संदेह उत्पन्न होने के बाद आयकर विभाग ने एफआईपीबी को एक पत्र लिखकर मामले की जांच के लिए कहा।

लेकिन इस पर एफआईपीबी ने आयकर विभाग को अगस्त 2007 में लिखा की आपके पत्र पर जांच शुरू कर दी गई है और वित्त मंत्रालय को इसकी जानकारी दे दी गई, लेकिन इस मामले में न तो कोई जांच शुरू की गई और न आयकर विभाग को निर्देश दिए गए। बोर्ड ने आयकर विभाग को बताया कि मामले की वैधता का पता लगा लिया गया है और इस बारे में आईएनएक्स मीडिया से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सरकार की जगह बिल आईएनएक्स ने दिए, वह भी कार्ति की कंपनी को

सीबीआई के दावों के मुताबिक एफआईपीबी अधिसूचना और स्पष्टीकरण के लिए प्रबंधन परामर्श शुल्क के तौर पर एडवांटेज स्ट्रेटेजिक को 10 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इसके लिए कंपनी ने आईएनएक्स मीडिया के नाम 3.5 करोड़ रुपए के बिल भी जारी किए जबकि ये बिल सरकार को दिए जाने थे। यही नहीं जिस कंपनी को इसका भुगतान किया गया था वह ईडी के दावों के मुताबिक कार्ति चिदंबरम की थी।

इंद्राणी का वो बयान व चालान की कॉपी जिससे फंस गए थे कार्ति

इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी ने सीबीआई टीम और प्रवर्तन निदेशालय को बयान दिया कि उन्होंने 2006 में नॉर्थ ब्लॉक कार्यालय में तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम से कंपनी में विदेशी निवेश की मंजूरी प्राप्त करने के लिए मुलाकात की थी। जिस पर ऐसे निवेश के लिए वित्तमंत्री ने उनसे अपने बेटे कार्ति से मिलने की बात कही थी। इंद्राणी मुखर्जी 17 फरवरी 2018 को अपना बयान कोर्ट में दर्ज करा चुकी हैं।

बयान में साफ कहा है कि पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने उनसे 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने कार्ति से दिल्ली के हयात होटल में मुलाकात की थी। रिश्वत की रकम देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से इंद्राणी मुखर्जी, कार्ति की कंपनी में शामिल हुईं। इसके बाद फर्जी मुआवजे के तौर पर कार्ति की कंपनी एएससीपीएल, एडवांटेज स्ट्रेटेजिक और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों ने आईएनएक्स मीडिया के लिए सात लाख डॉलर के चार चालान बनाए और उनका भुगतान किया गया।

इंद्राणी मुखर्जी ने जांच के दौरान सीबीआई और ईडी को बताया कि एफआईपीबी मंजूरी में हुए उल्लंघन को रफा-दफा करने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। इसी मामले में फरवरी 2018 में कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया था।

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