व्यापारियों का यही जज्बा इंदौर को हारने नहीं देता, क्लॉथ मार्केट अस्पताल में व्यापारी खुद स्थापित करेंगे सत्तर लाख का ऑक्सीजन प्लांट

व्यापारियों का यही जज्बा इंदौर को हारने नहीं देता, क्लॉथ मार्केट अस्पताल में व्यापारी खुद स्थापित करेंगे सत्तर लाख का ऑक्सीजन प्लांट

मीडियावाला.इन।

इंदौर से प्रदीप जोशी की रिपोर्ट

इंदौर। इंदौर शहर की मूल ताकत यहां के व्यापारी है। कैसा भी संकट हो ना तो व्यापारी हार मानते है और ना ही अपने प्यारे शहर को हारने देते है।

कोरोना महामारी के चलते बीते चौदह माह से व्यापार लगभग चौपट हो चुका है, इसके बावजूद ना तो व्यापारी हताश हुए और ना ही मदद का जज्बा कम हुआ। संकट के इस दौर में कपड़ा व्यापारियों ने क्लाथ मार्केट अस्पताल में बगैर किसी बाहरी मदद के आॅक्सीजन प्लांट स्थापित करने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि एमटी क्लाथ मार्केट के व्यापारियों का पारमार्थिक ट्रस्ट द्वारा क्लाथ मार्केट अस्पताल का संचालन किया जाता है। दरअसल अस्पताल तब चर्चा में आया था जब फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने इंदौर के किसी एक अस्पताल में आॅक्सीजन प्लांट लगाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद यह चर्चा जोरो पर थी कि सूद का प्रस्तावित प्लांट क्लाथ मार्केट अस्पताल में लगाया जाएगा।

एसोसिएशन ने कहा हम है सक्षम
फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने जब इंदौर के किसी एक अस्पताल में आॅक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाने की घोषणा की उसके बाद उनकी टीम अस्पताल के चयन में जुट गई थी। इस बीच यह खबर फैल गई कि क्लाथ मार्केट अस्पताल में यह प्लांट लगाया जाएगा। 
उधर एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरधर गोपाल नागर ने कहा कि हमे भी यह खबर मीडिया के जरिए पता चली। प्लांट स्थापित किए जाने के संबंध में सूद से प्रत्यक्ष रूप से कभी कोई चर्चा नहीं हुई। उधर एसोसिएशन के पदाधिकारी भी हैरान थे। उनका कहना था कि जब धर्मार्थ भावना से इतने बड़े अस्पताल का संचालन हो सकता है तो आॅक्सीजन प्लांट क्यों नहीं लग सकता। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री नागर ने कहा कि सत्तर लाख रुपए की लागत से अस्पताल में आॅक्सीजन प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह राशि श्री वैष्णव पारमार्थिक न्यास और क्लाथ मार्केट की अन्य संस्थाएं और व्यापारियों से जुटाई जाएंगी।

व्यापार के साथ सेवा कार्य है बड़ी पहचान
होल्कर युगीन देश के बड़े कपड़ा बाजारों में से एक महाराजा तुकोजीराव क्लाथ मार्केट की ख्याति जितनी व्यापार को लेकर है उससे ज्यादा शैक्षणिक और पारामार्थिक कार्यो को लेकर है। वर्ष 1973 में यह तय किया गया था कि मार्केट में होने वाले व्यापार में से कुछ राशि धर्मार्थ निकाली जाए। इसके लिए कपड़े की प्रति गठान पचास पैसा धर्मादे में जमा किया जाने लगा। इंदौर में उस वक्त सात कपड़ा मिल थी इन मिलों से भी इतनी ही राशि धर्मार्थ खाते में जमा होने लगी। धर्मार्थ राशि से व्यापारियों के अलग अलग न्यास द्वारा स्कूल, कॉलेज, गो शाला, अस्पताल, औषधालय, गरीबों को भोजन जैसी नियमित गतिविधियां अलग अलग संस्थाओं के माध्यम से संचालित की जाती है। हालांकि अब कपड़ा मिलों पर तालाबंदी हो गई है बावजूद इसके समस्त गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी है। आपदा के मौके पर भी कपड़ा व्यापारी दिल खौल कर जनता की मदद में भी आगे रहते है। RB

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