
Kissa-A-IAS: IAS Dr Raja Ganpati : 55 दिनों में तबादला, जनता ने सड़क पर उतरकर किया था विरोध!

Dr Raja Ganpati: राजा गणपति आर, 2015 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जो अपनी ईमानदार और सख्त कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में, वे सीतापुर के जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात हैं। एमबीबीएस डिग्री धारक, राजा गणपति, तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले हैं और स्वास्थ्य विभाग में सुधार के लिए जाने जाते हैं। वे 55 दिनों के प्रयागराज जिले के करछना तहसील के एसडीएम और सिद्धार्थनगर के कार्यकाल के दौरान, 2025 में हुए स्थानांतरण के बाद चर्चा में आए थे। करछना में जब उनका तबादला हुआ था तो जनता ने सड़क पर उतरकर उसका विरोध किया था और सरकार को उनका तबादला निरस्त करना पड़ा था।

प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में उन्होंने इलाहाबाद जिले के करछना तहसील में एसडीएम के पद पर कार्यभार संभाला था। वहां अपने छोटे से कार्यकाल में ही राजा गणपति आर ने जनता के बीच मजबूत छवि बना ली थी।

राजा गणपति आर अपने काम करने के सधे तरीके, ईमानदारी और भ्रष्टाचार के प्रति कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने करछना तहसील की दीवारों पर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं लगवाकर सार्वजनिक स्थानों पर थूकने जैसी गंदगी पर अंकुश लगाया था, जिससे वे चर्चा में आए थे। वहीं उनकी पर्सनल लाइफ की बात करें तो डॉ. राजा गणपति आर की पत्नी आईएएस जे. रीभा भी यूपी कैडर की अधिकारी हैं। दोनों की मुलाकात प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। आईएएस बनने के बाद उनकी शादी हो गई थी। जे रीभा पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में निदेशक के रूप में कार्य कर चुकी हैं। राजा गणपति आर अब तक प्रयागराज, इटावा और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में अपनी कार्यशैली का मजबूत प्रभाव छोड़ चुके हैं।

*डॉ. राजा गणपति आर के बारे में प्रमुख तथ्य:*
सेवा और कैडर: 2015 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी, उत्तर प्रदेश कैडर।
शिक्षा: एमबीबीएस (MBBS) – एक योग्य मेडिकल डॉक्टर, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दिया।
वर्तमान पद: जिलाधिकारी (DM), सीतापुर, उत्तर प्रदेश (अक्टूबर 2025 से)।
पूर्व पोस्टिंग: सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी (DM), ग्रेटर नोएडा के एडिशनल सीईओ, और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में प्रशासनिक निदेशक।
पत्नी: जे. रीभा, 2015 बैच की आईएएस, वर्तमान में बांदा की जिलाधिकारी (DM) हैं।
कार्यशैली: सख्त और ईमानदार छवि के लिए प्रसिद्ध, जिन्हें जनता का अच्छा समर्थन प्राप्त है।

विवाद और चर्चा:
अक्टूबर 2025 में, सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी के रूप में, उन्हें एक दुर्गा मंदिर से संबंधित विवाद के बाद स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक फेरबदल की जगह इस मुद्दे से जोड़ा था। वे सिद्धार्थनगर में अपने कार्यकाल के दौरान अपनी त्वरित और जन-केंद्रित कार्यशैली के लिए बहुत लोकप्रिय हुए थे।





